मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के गुणों की स्थापना आंतरिक शक्ति को बढ़ाती है

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रामनवमी विशेष


जोग लगन ग्रह वार तिथि, सकल भये अनुरूप|
चर अरु अचर हर्षजुत, राम जन्म सुखमूल||
बाल कांड (190) 
यानि, योग, लग्न, ग्रह, वार और तिथि सब अनुकूल हो गये.. जड़ और चेतन हर्ष से भर गये और यही श्री राम के जन्म सुख का मूल है|
   चैत्र नवरात्रि उत्सव में मां दुर्गा  के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है और भगवान राम  का संबंध भी नवरात्रि से होता है। दरअसल, चैत्र नवरात्रि के दौरान चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को राम नवमी का पर्व मनाया जाता है।
    श्री राम का जन्मदिन, श्री राम के अच्छे गुणों को अपने अंदर उतारने हेतु मानव को प्रेरित करता है। श्री रामचंद्र जब संसार में आये तो उन्होंने अपनी मर्यादायें ‌ स्वयं बांधी, अपने तौर तरीकों से अपने आदर्श व्यवहार से। ‌‌वो‌ श्री विष्णु के अवतरण थे। लेकिन वो सामान्य मानव‌ सा जीवन जिये ताकि मानवमात्र के आगे जीवन की आदर्श रुपरेखा रखें। 
  श्री राम के जीवन की सभी घटनाएं जैसे अहिल्या उद्धार, शबरी मोक्ष, अधर्मी बाली वध, रावण वध आदि धर्म का साम्राज्य स्थापित करने का उदाहरण मात्र था।   श्री राम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं और उनकी तरह मर्यादाओं में रहने के लिए सहज योगी अपने सूक्ष्म शरीर के चौथे चक्र अनाहत चक्र के दाहिने  चक्र पर श्री राम  का ध्यान करते हुये उनके गुणों को अपने अंदर स्थापित करते हैं।   श्री राम की उपासना एक अच्छा इंसान बनने का सच्चा योग है।  जब एक आदर्श पुत्र, भाई, स्वामी, मित्र, नीति कुशल राजनेता व पिता के सर्वगुण मानव में स्थित होते हैं, तभी वह मर्यादा पुरुष कहलाता है।  
    राम के गुण यानि सद्गुण, जब यह हमारे अंदर स्थित होते हैं तब अज्ञान जैसी सबसे बड़ी कमजोरी नष्ट हो जाती है। श्री राम के सद्गुणों को अपने अंदर स्थापित करना आसान है- मार्ग है सहज योग।  श्री राम हमारे अंदर हैं और जो हमारे अंदर ही व्याप्त है, उन्हें पाना क्या...वे तो अंदर हैं ही।  बस पाने का तरीका पता होना चाहिए और यह तरीका है सहज योग।   
   बात समर्पण की है सहज योग समर्पण का आसान मार्ग है।  अनाहत चक्र को हृदय चक्र भी कहते हैं। जब हृदय संकीर्ण होगा तो हम उसमें ईश्वर का चैतन्य कितना भर पायेंगे। अत: हृदय को विशाल करना होगा। जब हमारा चित्त हमारे अंदर होता है, तब ईश्वरीय चैतन्य का प्रवाह हमें यथार्थ की अनुभूति देता है।  हमने आठ दिन माँ देवी की आराधना कर ली, आज रामनवमी के दिन अपनी अज्ञानता पर पूर्णरूपेण विजय पाना है, स्वयंसिद्ध बनना है।  यही माँ दुर्गा और श्री राम का संदेश है।   मर्यादित जीवन हमारी आंतरिक शक्ति को  कई गुणा बढ़ा देता है। 
    तो चलिए राम को पाने का लक्ष्य लिए सहजयोग से जुड़ते हैं, जो सदैव व सर्वथा नि:शुल्क है।    आप अपने आत्म साक्षात्कार को प्राप्त करने हेतु अपने नज़दीकी सहजयोग ध्यान केंद्र की जानकारी टोल फ्री नंबर 1800 2700 800 से प्राप्त कर सकते हैं या वेबसाइट www.sahajayoga.org.in पर देख सकते हैं।

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