राजनीति

  • MGR और जयललिता जैसी विरासत की तलाश: क्या डीएमके-एआईएडीएमके के चक्रव्यूह को भेद पाएंगे विजय?

    नई दिल्ली. जोसेफ विजय चंद्रशेखर यानी तमिल सिनेमा फैन्स के थलपति विजय ने 2024 में जब एक्टिंग से रिटायरमेंट अनाउंस की, तो कई लोग शॉक थे. लेकिन तमिलनाडु चुनाव 2026 के नतीजे, विजय की परफॉरमेंस पर टकटकी लगाकर देखे जा रहे हैं. तमिलनाडु ने राजनीति में एक्टर्स के पर्सनालिटी कल्ट के सबसे बड़े उदाहरण देखे हैं. MGR और जयललिता जैसे दो सुपर पॉपुलर एक्टर वहां मुख्यमंत्री रह चुके हैं. पर उस दौर को लंबा वक्त बीत चुका है.
    करीब 35 साल बाद किसी एक्टर से उस दमदार पॉलिटिकल दखल की उम्मीद की जा रही है, जो तमिल सिनेमा के कमल हासन और रजनीकांत जैसे आइकॉन नहीं कर पाए. दो साल पहले जीरो से स्टार्ट करने वाले विजय की इन चुनावों में जो भी जीत होगी, वो उनकी और उनकी पार्टी के लिए उपलब्धि ही होगी. लेकिन इस जीत का स्केल, उन दांवों की सफलता तय करेगा जो विजय ने इस राजनीतिक सफर की शुरुआत के लिए खेले और झेले हैं.
    द्रविड़ आंदोलन से निकले सिद्धांत तमिलनाडु सरकारों की नीतियों में अपनी जगह बना चुके हैं. सामाजिक न्याय पॉलिसी मेकिंग का हिस्सा है और द्रविड़ पहचान सुरक्षित है. लेकिन आज के तमिल युवाओं में एक नई बेचैनी है— पोस्ट द्रविड़ एंग्ज़ायटी. कई बड़े सवाल मुंह ताक रहे हैं— द्रविड़ राजनीति कामयाब तो है, पर आगे क्या? दो ही पार्टियों में से एक कब तक चुनते रहें? पहचान की लड़ाई जीत ली, मगर नौकरियां कहां हैं? पॉलिटिक्स में उत्तर भारतीय कल्चर न होने के बावजूद भ्रष्टाचार क्यों है? जब नीतियों में सोशल जस्टिस दिखता है तो जमीन पर क्यों नहीं दिखता?
    1990 के दशक से स्टार रहे विजय अपनी फिल्मों में सिस्टम से लड़ाई का चेहरा बने. विजय के पिता एस ए चंद्रशेखर की फ़िल्म रसिगन (1994) ने उन्हें ‘इलयाथलपति’ टाइटल दिया था. इस टाइटल का मतलब था- यंग लीडर. थुपक्की (2012), थलाइवा (2013), कत्थी (2014) और मर्सल (2017) जैसी फिल्मों में विजय के हीरो कॉर्पोरेट शोषण, किसानों की जमीन, मेडिकल करप्शन और सरकारी मशीनरी से भिड़ते दिखे. ये सिर्फ सिस्टम की आलोचना नहीं थी, विरासत में मिली सत्ता पर वार भी था. डायरेक्टर एटली ने अपनी फिल्म मर्सल से विजय को ऑफिशियली ‘थलपति’ यानी लीडर का टाइटल दिया था.
    द्रविड़ पहचान के जन आंदोलन से निकलीं तमिलनाडु की दोनों बड़ी पार्टियां DMK और AIADMK आज राजनीति लीगेसी का पर्याय बन चुकी हैं. DMK की कमान करुणानिधि परिवार के हाथ में है. AIADMK की उनके पास, जो MGR या जयललिता के प्रति वफादारी जताते हैं.
    साभार आज तक

  • 'नतीजे मानने से इनकार कर सकती है टीएमसी': जीत के दावों के बीच दिलीप घोष ने जताई आशंका

    कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे आज आ रहे हैं। अब तक के रुझानों में भाजपा ने शतक जड़ दिया है और लगातार टीएमसी पर बढ़त बनाए हुए है। चुनाव आयोग की वेबसाइट के मुताबिक भी भाजपा अब तक 83 सीटों पर बढ़त बना चुकी है, जबकि टीएमसी को 56 सीटों पर ही बढ़त है। ऐसी स्थिति में साफ माना जा रहा है कि भाजपा इस बार सत्ता हासिल कर लेगी। हालांकि आधिकारिक नतीजों के लिए इंतजार करना होगा, लेकिन इतना तय माना जा रहा है कि भाजपा इस बार सत्ता हासिल कर सकती है। इस बीच भाजपा ने नतीजे आने के बाद टीएमसी के रुख को लेकर भी चिंता जता दी है।
    खड़गपुर सदर सीट से भाजपा कैंडिडेट दिलीप घोष का कहना है कि टीएमसी की ओर से नतीजे मानने से इनकार किया जा सकता है। लेकिन इसके लिए चुनाव आयोग ने पूरी तैयारी कर रखी है। उन्होंने यह भी कहा कि बंगाल में कानून-व्यवस्था नाम की कोई चीज ही नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य में हालात तब से ठीक हुए, जब चुनाव आयोग ने कमान संभाली। उन्होंने कहा कि बंगाल के हालात चिंताजनक ही रहे हैं और खूनखराबा होता रहा है, लेकिन इस बार इलेक्शन शांतिपूर्ण रहे हैं। आयोग ने बड़े पैमाने पर सुरक्षा बल तैनात किए, जिससे गड़बड़ी नहीं हो सकी। किसी व्यक्ति का कत्ल नहीं हो पाया। बता दें कि 2021 के चुनाव में हिंसा काफी हुई थी।
    यहां तक कि भाजपा कार्यकर्ताओं में इसे लेकर असंतोष भी था। ऐसे में इस बार जिस तरह की सुरक्षा की गई, उससे भी माहौल बदला दिखा। दिलीप घोष ने कहा कि चुनाव का नतीजा तो तय है और अब सिर्फ औपचारिक घोषणा होनी है। उन्होंने कहा कि भाजपा कोशिश करेगी कि जनता ने जिस विश्वास के साथ मतदान किया है, उस पर खरा उतरा जाए। नई सरकार और बंगाल अब भारत के साथ आगे बढ़ेंगे, वे बांग्लादेश के साथ नहीं जाएंगे। जनता बदलाव चाहती है और उन्होंने भाजपा को अच्छी संख्या में सीटें देकर सरकार बनाने का मौका दिया है। घोष ने कहा कि बंगाल में कोई कानून नहीं चल रहा था।
    उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले जब निर्वाचन आयोग ने व्यवस्था संभाली तो कानून व्यवस्था में सुधार आया। चुनाव शांतिपूर्ण हुए थे और अब काउंटिंग में भी बवाल नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि अब नई सरकार भी इसी तरह से शपथ लेगी। घोष ने कहा कि पहले के चुनाव में गड़बड़ियां की जाती थीं। उन्होंने कहा कि महिलाओं को घरों में ही बंद कर दिया जाता था। उन्हें 15 सालों तक वोटिंग करने से रोका गया। इस बार उन्हें चांस मिला तो उन्होंने बदलाव के लिए मतदान किया है।
    साभार लाइव हिन्दुस्तान

  • नारी शक्ति वंदन अधिनियम प्रभावी: 16 अप्रैल से लागू हुआ महिला आरक्षण कानून 2023

    नई दिल्ली। लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था करने वाला महिला आरक्षण अधिनियम 2023 बृहस्पतिवार से लागू हो गया। केंद्रीय विधि मंत्रालय द्वारा जारी एक अधिसूचना में यह जानकारी दी गई। हालांकि, यह तुरंत पता नहीं चल पाया है कि संसद में इस कानून में संशोधन करने और इसे 2029 में लागू करने पर जारी चर्चा के बीच 2023 के अधिनियम को 16 अप्रैल से प्रभावी क्यों अधिसूचित किया गया।
    कानून को लागू करने के संबंध में एक अधिकारी ने तकनीकी खामियों का हवाला दिया, लेकिन इसके बारे में विस्तार से नहीं बताया। अधिकारी ने कहा कि हालांकि अधिनियम लागू हो चुका है, लेकिन मौजूदा सदन में आरक्षण को क्रियान्वित नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि इसे अगली जनगणना के आधार पर परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही क्रियान्वित किया जा सकता है।
    अधिसूचना के अनुसार, संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम, 2023 की धारा 1 की उपधारा (2) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, केंद्र सरकार एतद्द्वारा 16 अप्रैल, 2026 को वह तिथि घोषित करती है जिस दिन से उक्त अधिनियम के प्रावधान लागू होंगे।
    सितंबर 2023 में, संसद ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पारित किया था, जिसे आमतौर पर महिला आरक्षण अधिनियम के रूप में जाना जाता है, जो विधायी निकायों में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
    इस अधिनियम में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीट आरक्षित करने का प्रावधान किया गया है। 2023 के कानून के तहत, आरक्षण 2034 से पहले लागू नहीं हो पाता, क्योंकि यह 2027 की जनगणना के बाद परिसीमन प्रक्रिया के पूरा होने से जुड़ा हुआ है।
    लोकसभा में वर्तमान में जिन तीन विधेयकों पर चर्चा हो रही है, उन्हें सरकार द्वारा इसलिए लाया गया ताकि 2029 में महिला आरक्षण लागू किया जा सके।
    साभार नवभारत टाइम्स 

  • 'यह युद्ध का अंत नहीं है': ईरान ने दी फायरिंग रोकने की सैन्य चेतावनी, अमेरिका-इजरायल को दी सख्त चेतावनी

    तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच दो हफ्ते के युद्धविराम पर सहमति बन गई है। इस बीच ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने देश की सभी सैन्य इकाइयों को तुरंत फायरिंग रोकने का आदेश दिया है। राज्य संचालित प्रसारक इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग (IRIB) पर जारी बयान में खामेनेई ने कहा कि यह युद्ध का अंत नहीं है, लेकिन सभी सैन्य शाखाओं को सर्वोच्च नेता के आदेश का पालन करते हुए फायरिंग बंद करनी चाहिए।
    युद्धविराम के बावजूद ईरान ने सख्त लहजे में चेतावनी दी है। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने कहा कि यह कदम युद्ध खत्म होने का संकेत नहीं है और अगर अमेरिका या इस्राइल की ओर से कोई भी छोटी सी गलती होती है तो उसका जवाब पूरी ताकत से दिया जाएगा। बयान में कहा गया कि हमारी उंगलियां ट्रिगर पर हैं और दुश्मन की किसी भी गलती का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।
    28 फरवरी को अमेरिका और इस्राइल द्वारा किए गए संयुक्त हमले के बाद शुरू हुए इस संघर्ष में अब तक कई देशों में बड़ी संख्या में लोगों की जान जा चुकी है। ईरान ने अपने नागरिकों के बलिदान के लिए धन्यवाद देते हुए दावा किया कि युद्ध के अधिकांश लक्ष्य हासिल कर लिए गए हैं और दुश्मन को ऐतिहासिक हार का सामना करना पड़ा है।
    साभार अमर उजाला

  • ट्रंप का अल्टीमेटम: '48 घंटे में होर्मुज खोलो वरना तबाह कर देंगे ईरान के पावर प्लांट्स'

    वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि उसने 48 घंटे के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य को बिना किसी शर्त के पूरी तरह नहीं खोला, तो अमेरिका उसके प्रमुख पावर प्लांट्स पर हमला करेगा।
    ट्रंप ने अपने बयान में स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि ईरान ने समयसीमा के भीतर कदम नहीं उठाया, तो अमेरिका उसकी ऊर्जा संरचनाओं को निशाना बनाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि कार्रवाई सबसे बड़े पावर प्लांट से शुरू होगी और अन्य ठिकानों तक बढ़ेगी। यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच पहले से ही तनावपूर्ण संबंध बने हुए हैं।
    होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। अगर यहां किसी तरह की रुकावट आती है, तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और तेल कीमतों पर पड़ सकता है। 
    एक दिन पहले ही अमेरिका ने ईरानी तेल की खरीद पर लगी पाबंदी को हटाने का फैसला लिया था। इसे पश्चिम एशिया में छिड़े संघर्ष के बीच अमेरिका का बड़ा यू-टर्न माना जा रहा है। गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी हमलों के डर की वजह से बड़ी संख्या में तेल और अन्य ऊर्जा संसाधनों को ले जा रहे जहाज फंसे हुए हैं।   
    साभार अमर उजाला

  • तमिलनाडु में बड़ा सियासी धमाका: बीजेपी ने विजय को दिया डिप्टी CM पद का ऑफर, क्या मानेंगे 'थलपति'?

    तमिलनाडु की राजनीति में 'सिनेमा' और 'सियासत' का हमेशा से गहरा नाता रहा है। अब इस कड़ी में एक नया अध्याय जुड़ता दिख रहा है। बीजेपी ने राज्य की सत्ता में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी TVK को गठबंधन का खुला ऑफर दिया है। सूत्रों का दावा है कि बीजेपी ने विजय के सामने उपमुख्यमंत्री पद का प्रस्ताव रखा है। इंडिया टुडे ने अपनी एक रिपोर्ट में बीजेपी के आंतरिक सूत्रों के हवाले से कहा है कि पार्टी ने गठबंधन के तहत TVK को 80 सीटें देने की पेशकश की है। बीजेपी आलाकमान का मानना है कि यदि विजय के प्रशंसकों का वोट एनडीए (NDA) के साथ जुड़ जाता है, तो राज्य के चुनावी नतीजे पूरी तरह पलट सकते हैं।
    बीजेपी रणनीतिकारों का आकलन है कि तमिलनाडु के कड़े मुकाबले में महज 2 प्रतिशत वोटों का अंतर भी जीत और हार की दिशा बदल सकता है। विजय की जबरदस्त लोकप्रियता को देखते हुए बीजेपी उन्हें अपने पाले में लाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है।
    बताया जा रहा है कि इस गठबंधन के लिए एक दूसरे राज्य के उपमुख्यमंत्री मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं, जो विजय के साथ संवाद का रास्ता साफ कर रहे हैं। बीजेपी ने भले ही उपमुख्यमंत्री पद और 80 सीटों का ऑफर दिया हो, लेकिन अभिनेता विजय की नजर मुख्यमंत्री की कुर्सी पर टिकी है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि विजय अपनी पहली ही चुनावी पारी में मुख्य भूमिका निभाना चाहते हैं, जो वर्तमान बातचीत में सबसे बड़ा 'स्पीड ब्रेकर' बना हुआ है।
    वहीं, विजय के करीबी सलाहकारों के बीच इस गठबंधन को लेकर चिंताएं भी हैं। विजय ने अपनी राजनीति की शुरुआत एक 'तीसरे विकल्प' और स्वतंत्र ताकत के रूप में की है। सलाहकारों का मानना है कि इतनी जल्दी किसी राष्ट्रीय गठबंधन (NDA) का हिस्सा बनने से उनकी नई और अलग राजनीति की छवि धूमिल हो सकती है।
    अगर यह गठबंधन हकीकत में बदलता है, तो राज्य में मुख्य मुकाबला त्रिकोणीय या एक नए ध्रुवीकरण की ओर बढ़ सकता है। अब तक राज्य की राजनीति द्रमुक (DMK) और अन्नाद्रमुक (AIADMK) के इर्द-गिर्द घूमती रही है। विजय और बीजेपी का साथ आना इन दोनों स्थापित क्षेत्रीय दलों के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर सकता है।
    साभार लाइव हिन्दुस्तान

क्राइम

  • ओवर ब्रिज के लिए खोदे गए गड्ढों में फंसे वाहन

    दमोह। दमोह शहर के तीन गुल्ली चौराहे पर बन रहे ओवरब्रिज के काम बंद होने के बाद यहां बने गड्ढों में बुधवार सुबह से रात तक करीब आधा दर्जन वाहन फंस गए। इन वाहनों को बड़ी मशक्कत के बाद निकाला गया। इसके बाद यातायात पुलिस ने रात में यहां बैरिकेडिंग करवाई और संकेतक लगाकर वाहन चालकों को दूर से ही सावधान करने का प्रयास किया।
    जानकारी के लिए बता दें कि तीन गुल्ली से मलैया मिल फाटक तक ओवरब्रिज का निर्माण कार्य शुरू हो गया था, लेकिन हाई कोर्ट से स्टे मिलने के बाद पिछले दो महीने से यह काम बंद है। पिछले कई दिनों तक ठेकेदार की सामग्री यहां पड़ी रही, लेकिन स्टे नहीं हटने की वजह से ठेकेदार अपनी सामग्री लेकर वहां से चला गया। इसके बावजूद, ओवरब्रिज के लिए खोदे गए बड़े-बड़े गड्ढे अभी भी तीन गुल्ली पर मौजूद हैं, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
    बुधवार की सुबह एक रोड रोलर इस गड्ढे में फंस गया। इसके बाद वाहनों के फंसने का सिलसिला शुरू हो गया। एक वाहन के निकलते ही दूसरा वाहन गड्ढे में फंस जाता था। देर रात यहां एक यात्री बस फंस गई, जिसे निकालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। इसके बाद यातायात प्रभारी दलबीर सिंह मार्को पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने जहां-जहां गड्ढे थे, वहां बैरिकेडिंग कराई और संकेतक लगाए, ताकि वाहन चालकों को कुछ दूरी से होकर निकलने की सूचना दी जा सके।
    साभार अमर उजाला
     

  • इंदौर एयरपोर्ट पर तीन तस्करों को पकड़ा, सोने को काले मोती, बेल्ट, कैप्सूल में बदल दिया

    इंदौर। इंदौर एयरपोर्ट पर सोने की तस्करी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। गुरुवार रात इंदौर एयरपोर्ट पर तीन तस्करों को पकड़ा गया जिनके पास से 1.7 किग्रा वजन का 92 लाख रुपए का सोना मिला है। इन्होंने सोने को काले मोती, बेल्ट, कैप्सूल में बदल दिया था। इंदौर में सोने की तस्करी का यह पहला मामला है जिसमें सोने को इस तरह अन्य चीजों में बदला गया है। तीनों आरोपी दिल्ली, जयपुर और नागौर के रहने वाले हैं। 
    आरोपियों के पास से मिली एक भी चीज सुनहरे रंग की नहीं थी। उन्होंने सोने की नई चीजें बनाई और सबका रंग बदल दिया। यह पहचानना भी मुश्किल था कि यह चीजें सोने की हैं। इनके पास से दो चेन, एक काले मोतियों के आकार का कड़ा, एक बेल्ट का बक्कल, दो कड़े, दो कैप्सूल और एक अंगूठी जब्त की गई। 
    पकड़े गए आरोपियों में से एक ने मलद्वार से सोने के कैप्सूल को शरीर के अंदर छुपा लिया था। एक व्यक्ति के पास से सोने का एक काले मोती वाला कड़ा और चांदी की पॉलिश चढ़ी एक मोटी सोने की अंगूठी पकड़ी। एक के पास से सोने के बेल्ट का बक्कल, एक कड़ा और एक चेन पकड़ी गई है। इन्होंने सभी सोने की चीजों पर चांदी या रोडियम की पॉलिश कर दी थी। 
    पकड़ाए गए तीनों आरोपी वाहक के रूप में काम करते हैं। इनके पीछे कई अन्य लोग हैं जो इनसे सोना बुलाते हैं और फिर बाजार में इसे बेचते हैं। अब कस्टम्स विभाग इन तीनों से पूछताछ कर मुख्य आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रहा है। 
    साभार अमर उजाला

  • टक्कर के बाद झगड़ा, मारपीट

    इंदौर। तेज गति से जा रहे आटो रिक्शा ने दूसरे आटो रिक्शा को टक्कर मार दी। इसे लेकर विवाद में एक पक्ष ने दूसरे के साथ मारपीट कर दी।
    खजराना पुलिस ने बताया कि हादसा और मारपीट की घटना सुहाना जायका होटल के सामने हुई। अल्फेज पिता आबिद अली निवासी न्यू हीना कालोनी की रिपोर्ट पर पुलिस ने ई रिक्शा क्रमांक एमपी 09 जेडटी 4501 के चालक और उसके साथी पर केस दर्ज किया है। फरियादी ने पुलिस को बताया कि वह अपने दोस्त की रिक्शा से शादी पार्टी के आर्डर से वापस आ रहा था। तभी रास्ते में उसके दोस्त का आटो रिक्शा दूसरे आटो रिक्शा से टकरा गया। इस बात को लेकर आरोपी आटो रिक्शा चालक ने उसके साथी को गाली गलौज की और मारपीट कर जान से मारने की धमकी दी।
    यहां पर भी वाहन चालकों में विवाद
    चंदननगर इलाके में धार रोड पर डी मार्ट के पास भी वाहन चालकों में विवाद हो गया। पुलिस ने बताया कि साजिद पिता मोहम्मद शकुर निवासी लोहा गेट 12 वीं गली की रिपोर्ट पर आरोपी सौरभ उर्फ कान्हा निवासी पंचमूर्ति नगर और विकास चौधरी पर केस दर्ज किया गया। साजिद ने पुलिस को बताया कि आरोपियों ने मुझे गाड़ी सही से चलाने की बात पर विवाद किया और गालियां दी। गालियां देने से मना किया तो आरोपियों ने हाथ थप्पड से मारपीट की और गाड़ी के कांच खोलकर चेहरे और सिर में मार दिया। जान से मारने की धमकी भी दी।

  • देवी मंदिर में एक परिवार हुआ हादसे का शिकार, झूले पर करंट आने से 14 साल की बच्ची की गई जान, कई बचे

    इंदौर। नवरात्रि में दर्शन के लिए बिजासन मंदिर गया एक परिवार हादसे का शिकार हो गया। यहां पर लगे मेले में झूले पर करंट आने से 14 साल की एक बच्ची ने दम तोड़ दिया। 8 साल के बेटे को पिता ने बचा लिया। झूले पर कई अन्य लोगों को भी करंट लगा। 
    एरोड्रम पुलिस ने बताया कि घटना रविवार रात करीब 12 बजे की है। यहां 14 साल की कनक रनवासी अपने 8 साल के भाई नयन के साथ झूला झूल रही थी। यह परिवार हातोद का रहने वाला है। झूला रुकते ही कनक नीचे उतरी तो प्लेटफार्म पर उसे करंट का झटका लगा। वह मदद के लिए चिल्लाई तो भाई ने बहन तो पकड़ लिया। भाई भी करंट की चपेट में आ गया। पिता ने जैसे ही बेटे को पकड़ा तो उन्हें भी करंट लगा। इस पर उन्होंने तुरंत बेटे को अपनी तरफ खींच लिया। तब तक कनक बेहोश हो गई थी। लोगों ने बताया कि कनक ने चप्पल नहीं पहनी थी। माता पिता ने बेहोश कनक को उठाने की कोशिश की लेकिन वह जवाब नहीं दे पा रही थी। इस पर माता पिता उसे पास के अस्पताल ले गए जहां से उसे एमवाय ले जाने की सलाह दी गई। देर रात करीब एक बजे के बच्ची को यहां मृत घोषित कर दिया गया। 
    मेले में मौजूद लोगों ने बताया कि बच्ची को करंट लगने के दौरान आसपास के कई लोगों को करंट लगा। नवरात्र के शुरूआत से ही यहां पर भारी भीड़ थी और प्रशासन ने यहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम भी किए थे। इसके बावजूद यहां पर हादसा हो गया। कनक 10वी कक्षा की पढ़ाई कर रही थी। वहीं बेटा नयन भी तीसरी क्लास का स्टूडेंट है। परिवार ने बताया कि भीड़ होने के चलते उन्हें पुलिस की मदद भी समय पर नहीं मिल पाई। 
    साभार अमर उजाला

  • ऑनलाइन फ्रॉड की शिकायत पर त्वरित कार्यवाही कर, क्राइम ब्रांच इंदौर द्वारा कराये आवेदक के 34 लाख 79 हजार 720 रूपये रिफंड

    • आवेदक द्वारा फेसबुक पर फर्जी ऐड देखकर हुआ था, ठग से संपर्क।
    • ठग द्वारा आवेदक को माल की डिलेवरी देने के लिए एडवांस पेमेंट के रूप में रुपए प्राप्त कर किया था ऑनलाइन फ्रॉड ।
    • इंदौर क्राईम ब्रांच के द्वारा वर्ष 2023 में कुल 02 करोड़ 44 लाख 32 हजार 820  रुपए, आवेदकों के कराए गए है सकुशल वापस ।
    • क्राईम ब्रांच इंदौर द्वारा संचालित Cyber Helpline No. 704912-4445  पर प्राप्त शिकायतों में लगातार त्वरित कार्यवाही कर कराए जा रहे रिफंड 

    इंदौर। क्राइम ब्रांच इंदौर पुलिस के द्वारा संचालित सायबर हेल्पलाइन पोर्टल पर सोशल मीडिया एवं ऑनलाइन फ्रॉड संबंधित शिकायते प्राप्त होती है, जिस पर क्राईम ब्रांच इंदौर पुलिस के द्वारा लगातार आवेदकों के साथ हुए फ्रॉड की राशि रिफंड कराई जा रही है। इसी अनुक्रम में आवेदक सागर के द्वारा cyber helpline पर ऑनलाइन फ्रॉड संबंधित शिकायत की गई थी जिसमे क्राइम ब्रांच की टीम द्वारा आवेदक से फ्राड की संपूर्ण जानकारी लेकर जांच की जिसमे ज्ञात हुआ कि आवेदक सागर निवासी महू जिनका एल्यूमीनियम स्क्रैप का कार्य है के द्वारा facebook सोशल मीडिया पर सस्ते में एल्यूमीनियम स्क्रैप माल का ऐड देखा और ऐड में दिखाए गए नंबर पर संपर्क करते ठग व्यक्ति से संपर्क हुआ, ठग द्वारा जूठे विश्वास में लेकर आवेदक से एडवांस पेमेंट करने का बोला गया, आवेदक को ट्रांसपोर्ट में स्क्रैप मैटेरियल लोड करने का वीडियो भेजा जिसपर आवेदक के द्वारा विश्वास करते हुए अपने HDFC bank से ठग व्यक्ति के खाते में 34,79,820 रू ऑनलाइन ट्रांसफर किए, ठग द्वारा आवेदक से प्राप्त रुपए को अन्य बैंक खातों में ट्रांसफर करते हुए ठगी को अंजाम दिया गया।
     जिस पर क्राइम ब्रांच टीम द्वारा संबंधित बैंक से संपर्क कर आवेदक के 34,79,820/– रुपए सकुशल वापस कराए गए।

    क्राइम ब्रांच इंदौर पुलिस के द्वारा वर्ष 2023(जनवरी से अगस्त तक) में ऑनलाइन फ्रॉड की शिकायतों में 02 करोड़ 44 लाख 32 हजार 782  रुपए आवेदकों के सकुशल रिफंड कराए गए है।
     आमजन को सूचित किया जाता है की सोशल मीडिया (facebook, Instagram, Twitter, YouTube आदि) पर दिखाए गए किसी भी आकर्षक ऐड पर जल्दबाजी में भरोसा न करे, विश्वसनीयता की पूर्णरूप से जांच किए बिना कभी भी अपनी निजी एवं बैंकिंग संबंधित जानकारी किसी को न देवें अन्यथा आप ऑनलाइन ठगी का शिकार हो सकते हो। और इस तरह के फ्रॉड होने पर अपने नजीदीकी थाने एवं क्राइम ब्रांच इंदौर पुलिस द्वारा संचालित सायबर हेल्पलाइन न. 7049124445 पर सूचित करें।

  • अमेरिकी संसद में बांग्लादेश नरसंहार को लेकर पाकिस्तान के...

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  • MGR और जयललिता जैसी विरासत की तलाश: क्या डीएमके-एआईएडीएमके के चक्रव्यूह को भेद पाएंगे विजय?

    नई दिल्ली. जोसेफ विजय चंद्रशेखर यानी तमिल सिनेमा फैन्स के थलपति विजय ने 2024 में जब एक्टिंग से रिटायरमेंट अनाउंस की, तो कई लोग शॉक थे. लेकिन तमिलनाडु चुनाव 2026 के नतीजे, विजय की परफॉरमेंस पर टकटकी लगाकर देखे जा रहे हैं. तमिलनाडु ने राजनीति में एक्टर्स के पर्सनालिटी कल्ट के सबसे बड़े उदाहरण देखे हैं. MGR और जयललिता जैसे दो सुपर पॉपुलर एक्टर वहां मुख्यमंत्री रह चुके हैं. पर उस दौर को लंबा वक्त बीत चुका है.
    करीब 35 साल बाद किसी एक्टर से उस दमदार पॉलिटिकल दखल की उम्मीद की जा रही है, जो तमिल सिनेमा के कमल हासन और रजनीकांत जैसे आइकॉन नहीं कर पाए. दो साल पहले जीरो से स्टार्ट करने वाले विजय की इन चुनावों में जो भी जीत होगी, वो उनकी और उनकी पार्टी के लिए उपलब्धि ही होगी. लेकिन इस जीत का स्केल, उन दांवों की सफलता तय करेगा जो विजय ने इस राजनीतिक सफर की शुरुआत के लिए खेले और झेले हैं.
    द्रविड़ आंदोलन से निकले सिद्धांत तमिलनाडु सरकारों की नीतियों में अपनी जगह बना चुके हैं. सामाजिक न्याय पॉलिसी मेकिंग का हिस्सा है और द्रविड़ पहचान सुरक्षित है. लेकिन आज के तमिल युवाओं में एक नई बेचैनी है— पोस्ट द्रविड़ एंग्ज़ायटी. कई बड़े सवाल मुंह ताक रहे हैं— द्रविड़ राजनीति कामयाब तो है, पर आगे क्या? दो ही पार्टियों में से एक कब तक चुनते रहें? पहचान की लड़ाई जीत ली, मगर नौकरियां कहां हैं? पॉलिटिक्स में उत्तर भारतीय कल्चर न होने के बावजूद भ्रष्टाचार क्यों है? जब नीतियों में सोशल जस्टिस दिखता है तो जमीन पर क्यों नहीं दिखता?
    1990 के दशक से स्टार रहे विजय अपनी फिल्मों में सिस्टम से लड़ाई का चेहरा बने. विजय के पिता एस ए चंद्रशेखर की फ़िल्म रसिगन (1994) ने उन्हें ‘इलयाथलपति’ टाइटल दिया था. इस टाइटल का मतलब था- यंग लीडर. थुपक्की (2012), थलाइवा (2013), कत्थी (2014) और मर्सल (2017) जैसी फिल्मों में विजय के हीरो कॉर्पोरेट शोषण, किसानों की जमीन, मेडिकल करप्शन और सरकारी मशीनरी से भिड़ते दिखे. ये सिर्फ सिस्टम की आलोचना नहीं थी, विरासत में मिली सत्ता पर वार भी था. डायरेक्टर एटली ने अपनी फिल्म मर्सल से विजय को ऑफिशियली ‘थलपति’ यानी लीडर का टाइटल दिया था.
    द्रविड़ पहचान के जन आंदोलन से निकलीं तमिलनाडु की दोनों बड़ी पार्टियां DMK और AIADMK आज राजनीति लीगेसी का पर्याय बन चुकी हैं. DMK की कमान करुणानिधि परिवार के हाथ में है. AIADMK की उनके पास, जो MGR या जयललिता के प्रति वफादारी जताते हैं.
    साभार आज तक

  • 'नतीजे मानने से इनकार कर सकती है टीएमसी': जीत के दावों के बीच दिलीप घोष ने जताई आशंका

    कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे आज आ रहे हैं। अब तक के रुझानों में भाजपा ने शतक जड़ दिया है और लगातार टीएमसी पर बढ़त बनाए हुए है। चुनाव आयोग की वेबसाइट के मुताबिक भी भाजपा अब तक 83 सीटों पर बढ़त बना चुकी है, जबकि टीएमसी को 56 सीटों पर ही बढ़त है। ऐसी स्थिति में साफ माना जा रहा है कि भाजपा इस बार सत्ता हासिल कर लेगी। हालांकि आधिकारिक नतीजों के लिए इंतजार करना होगा, लेकिन इतना तय माना जा रहा है कि भाजपा इस बार सत्ता हासिल कर सकती है। इस बीच भाजपा ने नतीजे आने के बाद टीएमसी के रुख को लेकर भी चिंता जता दी है।
    खड़गपुर सदर सीट से भाजपा कैंडिडेट दिलीप घोष का कहना है कि टीएमसी की ओर से नतीजे मानने से इनकार किया जा सकता है। लेकिन इसके लिए चुनाव आयोग ने पूरी तैयारी कर रखी है। उन्होंने यह भी कहा कि बंगाल में कानून-व्यवस्था नाम की कोई चीज ही नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य में हालात तब से ठीक हुए, जब चुनाव आयोग ने कमान संभाली। उन्होंने कहा कि बंगाल के हालात चिंताजनक ही रहे हैं और खूनखराबा होता रहा है, लेकिन इस बार इलेक्शन शांतिपूर्ण रहे हैं। आयोग ने बड़े पैमाने पर सुरक्षा बल तैनात किए, जिससे गड़बड़ी नहीं हो सकी। किसी व्यक्ति का कत्ल नहीं हो पाया। बता दें कि 2021 के चुनाव में हिंसा काफी हुई थी।
    यहां तक कि भाजपा कार्यकर्ताओं में इसे लेकर असंतोष भी था। ऐसे में इस बार जिस तरह की सुरक्षा की गई, उससे भी माहौल बदला दिखा। दिलीप घोष ने कहा कि चुनाव का नतीजा तो तय है और अब सिर्फ औपचारिक घोषणा होनी है। उन्होंने कहा कि भाजपा कोशिश करेगी कि जनता ने जिस विश्वास के साथ मतदान किया है, उस पर खरा उतरा जाए। नई सरकार और बंगाल अब भारत के साथ आगे बढ़ेंगे, वे बांग्लादेश के साथ नहीं जाएंगे। जनता बदलाव चाहती है और उन्होंने भाजपा को अच्छी संख्या में सीटें देकर सरकार बनाने का मौका दिया है। घोष ने कहा कि बंगाल में कोई कानून नहीं चल रहा था।
    उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले जब निर्वाचन आयोग ने व्यवस्था संभाली तो कानून व्यवस्था में सुधार आया। चुनाव शांतिपूर्ण हुए थे और अब काउंटिंग में भी बवाल नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि अब नई सरकार भी इसी तरह से शपथ लेगी। घोष ने कहा कि पहले के चुनाव में गड़बड़ियां की जाती थीं। उन्होंने कहा कि महिलाओं को घरों में ही बंद कर दिया जाता था। उन्हें 15 सालों तक वोटिंग करने से रोका गया। इस बार उन्हें चांस मिला तो उन्होंने बदलाव के लिए मतदान किया है।
    साभार लाइव हिन्दुस्तान

  • नारी शक्ति वंदन अधिनियम प्रभावी: 16 अप्रैल से लागू हुआ महिला आरक्षण कानून 2023

    नई दिल्ली। लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था करने वाला महिला आरक्षण अधिनियम 2023 बृहस्पतिवार से लागू हो गया। केंद्रीय विधि मंत्रालय द्वारा जारी एक अधिसूचना में यह जानकारी दी गई। हालांकि, यह तुरंत पता नहीं चल पाया है कि संसद में इस कानून में संशोधन करने और इसे 2029 में लागू करने पर जारी चर्चा के बीच 2023 के अधिनियम को 16 अप्रैल से प्रभावी क्यों अधिसूचित किया गया।
    कानून को लागू करने के संबंध में एक अधिकारी ने तकनीकी खामियों का हवाला दिया, लेकिन इसके बारे में विस्तार से नहीं बताया। अधिकारी ने कहा कि हालांकि अधिनियम लागू हो चुका है, लेकिन मौजूदा सदन में आरक्षण को क्रियान्वित नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि इसे अगली जनगणना के आधार पर परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही क्रियान्वित किया जा सकता है।
    अधिसूचना के अनुसार, संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम, 2023 की धारा 1 की उपधारा (2) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, केंद्र सरकार एतद्द्वारा 16 अप्रैल, 2026 को वह तिथि घोषित करती है जिस दिन से उक्त अधिनियम के प्रावधान लागू होंगे।
    सितंबर 2023 में, संसद ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पारित किया था, जिसे आमतौर पर महिला आरक्षण अधिनियम के रूप में जाना जाता है, जो विधायी निकायों में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
    इस अधिनियम में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीट आरक्षित करने का प्रावधान किया गया है। 2023 के कानून के तहत, आरक्षण 2034 से पहले लागू नहीं हो पाता, क्योंकि यह 2027 की जनगणना के बाद परिसीमन प्रक्रिया के पूरा होने से जुड़ा हुआ है।
    लोकसभा में वर्तमान में जिन तीन विधेयकों पर चर्चा हो रही है, उन्हें सरकार द्वारा इसलिए लाया गया ताकि 2029 में महिला आरक्षण लागू किया जा सके।
    साभार नवभारत टाइम्स 

  • 'यह युद्ध का अंत नहीं है': ईरान ने दी फायरिंग रोकने की सैन्य चेतावनी, अमेरिका-इजरायल को दी सख्त चेतावनी

    तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच दो हफ्ते के युद्धविराम पर सहमति बन गई है। इस बीच ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने देश की सभी सैन्य इकाइयों को तुरंत फायरिंग रोकने का आदेश दिया है। राज्य संचालित प्रसारक इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग (IRIB) पर जारी बयान में खामेनेई ने कहा कि यह युद्ध का अंत नहीं है, लेकिन सभी सैन्य शाखाओं को सर्वोच्च नेता के आदेश का पालन करते हुए फायरिंग बंद करनी चाहिए।
    युद्धविराम के बावजूद ईरान ने सख्त लहजे में चेतावनी दी है। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने कहा कि यह कदम युद्ध खत्म होने का संकेत नहीं है और अगर अमेरिका या इस्राइल की ओर से कोई भी छोटी सी गलती होती है तो उसका जवाब पूरी ताकत से दिया जाएगा। बयान में कहा गया कि हमारी उंगलियां ट्रिगर पर हैं और दुश्मन की किसी भी गलती का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।
    28 फरवरी को अमेरिका और इस्राइल द्वारा किए गए संयुक्त हमले के बाद शुरू हुए इस संघर्ष में अब तक कई देशों में बड़ी संख्या में लोगों की जान जा चुकी है। ईरान ने अपने नागरिकों के बलिदान के लिए धन्यवाद देते हुए दावा किया कि युद्ध के अधिकांश लक्ष्य हासिल कर लिए गए हैं और दुश्मन को ऐतिहासिक हार का सामना करना पड़ा है।
    साभार अमर उजाला

  • ट्रंप का अल्टीमेटम: '48 घंटे में होर्मुज खोलो वरना तबाह कर देंगे ईरान के पावर प्लांट्स'

    वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि उसने 48 घंटे के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य को बिना किसी शर्त के पूरी तरह नहीं खोला, तो अमेरिका उसके प्रमुख पावर प्लांट्स पर हमला करेगा।
    ट्रंप ने अपने बयान में स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि ईरान ने समयसीमा के भीतर कदम नहीं उठाया, तो अमेरिका उसकी ऊर्जा संरचनाओं को निशाना बनाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि कार्रवाई सबसे बड़े पावर प्लांट से शुरू होगी और अन्य ठिकानों तक बढ़ेगी। यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच पहले से ही तनावपूर्ण संबंध बने हुए हैं।
    होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। अगर यहां किसी तरह की रुकावट आती है, तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और तेल कीमतों पर पड़ सकता है। 
    एक दिन पहले ही अमेरिका ने ईरानी तेल की खरीद पर लगी पाबंदी को हटाने का फैसला लिया था। इसे पश्चिम एशिया में छिड़े संघर्ष के बीच अमेरिका का बड़ा यू-टर्न माना जा रहा है। गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी हमलों के डर की वजह से बड़ी संख्या में तेल और अन्य ऊर्जा संसाधनों को ले जा रहे जहाज फंसे हुए हैं।   
    साभार अमर उजाला

  • तमिलनाडु में बड़ा सियासी धमाका: बीजेपी ने विजय को दिया डिप्टी CM पद का ऑफर, क्या मानेंगे 'थलपति'?

    तमिलनाडु की राजनीति में 'सिनेमा' और 'सियासत' का हमेशा से गहरा नाता रहा है। अब इस कड़ी में एक नया अध्याय जुड़ता दिख रहा है। बीजेपी ने राज्य की सत्ता में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी TVK को गठबंधन का खुला ऑफर दिया है। सूत्रों का दावा है कि बीजेपी ने विजय के सामने उपमुख्यमंत्री पद का प्रस्ताव रखा है। इंडिया टुडे ने अपनी एक रिपोर्ट में बीजेपी के आंतरिक सूत्रों के हवाले से कहा है कि पार्टी ने गठबंधन के तहत TVK को 80 सीटें देने की पेशकश की है। बीजेपी आलाकमान का मानना है कि यदि विजय के प्रशंसकों का वोट एनडीए (NDA) के साथ जुड़ जाता है, तो राज्य के चुनावी नतीजे पूरी तरह पलट सकते हैं।
    बीजेपी रणनीतिकारों का आकलन है कि तमिलनाडु के कड़े मुकाबले में महज 2 प्रतिशत वोटों का अंतर भी जीत और हार की दिशा बदल सकता है। विजय की जबरदस्त लोकप्रियता को देखते हुए बीजेपी उन्हें अपने पाले में लाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है।
    बताया जा रहा है कि इस गठबंधन के लिए एक दूसरे राज्य के उपमुख्यमंत्री मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं, जो विजय के साथ संवाद का रास्ता साफ कर रहे हैं। बीजेपी ने भले ही उपमुख्यमंत्री पद और 80 सीटों का ऑफर दिया हो, लेकिन अभिनेता विजय की नजर मुख्यमंत्री की कुर्सी पर टिकी है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि विजय अपनी पहली ही चुनावी पारी में मुख्य भूमिका निभाना चाहते हैं, जो वर्तमान बातचीत में सबसे बड़ा 'स्पीड ब्रेकर' बना हुआ है।
    वहीं, विजय के करीबी सलाहकारों के बीच इस गठबंधन को लेकर चिंताएं भी हैं। विजय ने अपनी राजनीति की शुरुआत एक 'तीसरे विकल्प' और स्वतंत्र ताकत के रूप में की है। सलाहकारों का मानना है कि इतनी जल्दी किसी राष्ट्रीय गठबंधन (NDA) का हिस्सा बनने से उनकी नई और अलग राजनीति की छवि धूमिल हो सकती है।
    अगर यह गठबंधन हकीकत में बदलता है, तो राज्य में मुख्य मुकाबला त्रिकोणीय या एक नए ध्रुवीकरण की ओर बढ़ सकता है। अब तक राज्य की राजनीति द्रमुक (DMK) और अन्नाद्रमुक (AIADMK) के इर्द-गिर्द घूमती रही है। विजय और बीजेपी का साथ आना इन दोनों स्थापित क्षेत्रीय दलों के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर सकता है।
    साभार लाइव हिन्दुस्तान

एंटरटेनमेंट

  • MGR और जयललिता जैसी विरासत की तलाश: क्या डीएमके-एआईएडीएमके के चक्रव्यूह को भेद पाएंगे विजय?

    नई दिल्ली. जोसेफ विजय चंद्रशेखर यानी तमिल सिनेमा फैन्स के थलपति विजय ने 2024 में जब एक्टिंग से रिटायरमेंट अनाउंस की, तो कई लोग शॉक थे. लेकिन तमिलनाडु चुनाव 2026 के नतीजे, विजय की परफॉरमेंस पर टकटकी लगाकर देखे जा रहे हैं. तमिलनाडु ने राजनीति में एक्टर्स के पर्सनालिटी कल्ट के सबसे बड़े उदाहरण देखे हैं. MGR और जयललिता जैसे दो सुपर पॉपुलर एक्टर वहां मुख्यमंत्री रह चुके हैं. पर उस दौर को लंबा वक्त बीत चुका है.
    करीब 35 साल बाद किसी एक्टर से उस दमदार पॉलिटिकल दखल की उम्मीद की जा रही है, जो तमिल सिनेमा के कमल हासन और रजनीकांत जैसे आइकॉन नहीं कर पाए. दो साल पहले जीरो से स्टार्ट करने वाले विजय की इन चुनावों में जो भी जीत होगी, वो उनकी और उनकी पार्टी के लिए उपलब्धि ही होगी. लेकिन इस जीत का स्केल, उन दांवों की सफलता तय करेगा जो विजय ने इस राजनीतिक सफर की शुरुआत के लिए खेले और झेले हैं.
    द्रविड़ आंदोलन से निकले सिद्धांत तमिलनाडु सरकारों की नीतियों में अपनी जगह बना चुके हैं. सामाजिक न्याय पॉलिसी मेकिंग का हिस्सा है और द्रविड़ पहचान सुरक्षित है. लेकिन आज के तमिल युवाओं में एक नई बेचैनी है— पोस्ट द्रविड़ एंग्ज़ायटी. कई बड़े सवाल मुंह ताक रहे हैं— द्रविड़ राजनीति कामयाब तो है, पर आगे क्या? दो ही पार्टियों में से एक कब तक चुनते रहें? पहचान की लड़ाई जीत ली, मगर नौकरियां कहां हैं? पॉलिटिक्स में उत्तर भारतीय कल्चर न होने के बावजूद भ्रष्टाचार क्यों है? जब नीतियों में सोशल जस्टिस दिखता है तो जमीन पर क्यों नहीं दिखता?
    1990 के दशक से स्टार रहे विजय अपनी फिल्मों में सिस्टम से लड़ाई का चेहरा बने. विजय के पिता एस ए चंद्रशेखर की फ़िल्म रसिगन (1994) ने उन्हें ‘इलयाथलपति’ टाइटल दिया था. इस टाइटल का मतलब था- यंग लीडर. थुपक्की (2012), थलाइवा (2013), कत्थी (2014) और मर्सल (2017) जैसी फिल्मों में विजय के हीरो कॉर्पोरेट शोषण, किसानों की जमीन, मेडिकल करप्शन और सरकारी मशीनरी से भिड़ते दिखे. ये सिर्फ सिस्टम की आलोचना नहीं थी, विरासत में मिली सत्ता पर वार भी था. डायरेक्टर एटली ने अपनी फिल्म मर्सल से विजय को ऑफिशियली ‘थलपति’ यानी लीडर का टाइटल दिया था.
    द्रविड़ पहचान के जन आंदोलन से निकलीं तमिलनाडु की दोनों बड़ी पार्टियां DMK और AIADMK आज राजनीति लीगेसी का पर्याय बन चुकी हैं. DMK की कमान करुणानिधि परिवार के हाथ में है. AIADMK की उनके पास, जो MGR या जयललिता के प्रति वफादारी जताते हैं.
    साभार आज तक

  • 'नतीजे मानने से इनकार कर सकती है टीएमसी': जीत के दावों के बीच दिलीप घोष ने जताई आशंका

    कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे आज आ रहे हैं। अब तक के रुझानों में भाजपा ने शतक जड़ दिया है और लगातार टीएमसी पर बढ़त बनाए हुए है। चुनाव आयोग की वेबसाइट के मुताबिक भी भाजपा अब तक 83 सीटों पर बढ़त बना चुकी है, जबकि टीएमसी को 56 सीटों पर ही बढ़त है। ऐसी स्थिति में साफ माना जा रहा है कि भाजपा इस बार सत्ता हासिल कर लेगी। हालांकि आधिकारिक नतीजों के लिए इंतजार करना होगा, लेकिन इतना तय माना जा रहा है कि भाजपा इस बार सत्ता हासिल कर सकती है। इस बीच भाजपा ने नतीजे आने के बाद टीएमसी के रुख को लेकर भी चिंता जता दी है।
    खड़गपुर सदर सीट से भाजपा कैंडिडेट दिलीप घोष का कहना है कि टीएमसी की ओर से नतीजे मानने से इनकार किया जा सकता है। लेकिन इसके लिए चुनाव आयोग ने पूरी तैयारी कर रखी है। उन्होंने यह भी कहा कि बंगाल में कानून-व्यवस्था नाम की कोई चीज ही नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य में हालात तब से ठीक हुए, जब चुनाव आयोग ने कमान संभाली। उन्होंने कहा कि बंगाल के हालात चिंताजनक ही रहे हैं और खूनखराबा होता रहा है, लेकिन इस बार इलेक्शन शांतिपूर्ण रहे हैं। आयोग ने बड़े पैमाने पर सुरक्षा बल तैनात किए, जिससे गड़बड़ी नहीं हो सकी। किसी व्यक्ति का कत्ल नहीं हो पाया। बता दें कि 2021 के चुनाव में हिंसा काफी हुई थी।
    यहां तक कि भाजपा कार्यकर्ताओं में इसे लेकर असंतोष भी था। ऐसे में इस बार जिस तरह की सुरक्षा की गई, उससे भी माहौल बदला दिखा। दिलीप घोष ने कहा कि चुनाव का नतीजा तो तय है और अब सिर्फ औपचारिक घोषणा होनी है। उन्होंने कहा कि भाजपा कोशिश करेगी कि जनता ने जिस विश्वास के साथ मतदान किया है, उस पर खरा उतरा जाए। नई सरकार और बंगाल अब भारत के साथ आगे बढ़ेंगे, वे बांग्लादेश के साथ नहीं जाएंगे। जनता बदलाव चाहती है और उन्होंने भाजपा को अच्छी संख्या में सीटें देकर सरकार बनाने का मौका दिया है। घोष ने कहा कि बंगाल में कोई कानून नहीं चल रहा था।
    उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले जब निर्वाचन आयोग ने व्यवस्था संभाली तो कानून व्यवस्था में सुधार आया। चुनाव शांतिपूर्ण हुए थे और अब काउंटिंग में भी बवाल नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि अब नई सरकार भी इसी तरह से शपथ लेगी। घोष ने कहा कि पहले के चुनाव में गड़बड़ियां की जाती थीं। उन्होंने कहा कि महिलाओं को घरों में ही बंद कर दिया जाता था। उन्हें 15 सालों तक वोटिंग करने से रोका गया। इस बार उन्हें चांस मिला तो उन्होंने बदलाव के लिए मतदान किया है।
    साभार लाइव हिन्दुस्तान

  • नारी शक्ति वंदन अधिनियम प्रभावी: 16 अप्रैल से लागू हुआ महिला आरक्षण कानून 2023

    नई दिल्ली। लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था करने वाला महिला आरक्षण अधिनियम 2023 बृहस्पतिवार से लागू हो गया। केंद्रीय विधि मंत्रालय द्वारा जारी एक अधिसूचना में यह जानकारी दी गई। हालांकि, यह तुरंत पता नहीं चल पाया है कि संसद में इस कानून में संशोधन करने और इसे 2029 में लागू करने पर जारी चर्चा के बीच 2023 के अधिनियम को 16 अप्रैल से प्रभावी क्यों अधिसूचित किया गया।
    कानून को लागू करने के संबंध में एक अधिकारी ने तकनीकी खामियों का हवाला दिया, लेकिन इसके बारे में विस्तार से नहीं बताया। अधिकारी ने कहा कि हालांकि अधिनियम लागू हो चुका है, लेकिन मौजूदा सदन में आरक्षण को क्रियान्वित नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि इसे अगली जनगणना के आधार पर परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही क्रियान्वित किया जा सकता है।
    अधिसूचना के अनुसार, संविधान (106वां संशोधन) अधिनियम, 2023 की धारा 1 की उपधारा (2) द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए, केंद्र सरकार एतद्द्वारा 16 अप्रैल, 2026 को वह तिथि घोषित करती है जिस दिन से उक्त अधिनियम के प्रावधान लागू होंगे।
    सितंबर 2023 में, संसद ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पारित किया था, जिसे आमतौर पर महिला आरक्षण अधिनियम के रूप में जाना जाता है, जो विधायी निकायों में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
    इस अधिनियम में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीट आरक्षित करने का प्रावधान किया गया है। 2023 के कानून के तहत, आरक्षण 2034 से पहले लागू नहीं हो पाता, क्योंकि यह 2027 की जनगणना के बाद परिसीमन प्रक्रिया के पूरा होने से जुड़ा हुआ है।
    लोकसभा में वर्तमान में जिन तीन विधेयकों पर चर्चा हो रही है, उन्हें सरकार द्वारा इसलिए लाया गया ताकि 2029 में महिला आरक्षण लागू किया जा सके।
    साभार नवभारत टाइम्स 

  • 'यह युद्ध का अंत नहीं है': ईरान ने दी फायरिंग रोकने की सैन्य चेतावनी, अमेरिका-इजरायल को दी सख्त चेतावनी

    तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच दो हफ्ते के युद्धविराम पर सहमति बन गई है। इस बीच ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने देश की सभी सैन्य इकाइयों को तुरंत फायरिंग रोकने का आदेश दिया है। राज्य संचालित प्रसारक इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग (IRIB) पर जारी बयान में खामेनेई ने कहा कि यह युद्ध का अंत नहीं है, लेकिन सभी सैन्य शाखाओं को सर्वोच्च नेता के आदेश का पालन करते हुए फायरिंग बंद करनी चाहिए।
    युद्धविराम के बावजूद ईरान ने सख्त लहजे में चेतावनी दी है। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने कहा कि यह कदम युद्ध खत्म होने का संकेत नहीं है और अगर अमेरिका या इस्राइल की ओर से कोई भी छोटी सी गलती होती है तो उसका जवाब पूरी ताकत से दिया जाएगा। बयान में कहा गया कि हमारी उंगलियां ट्रिगर पर हैं और दुश्मन की किसी भी गलती का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।
    28 फरवरी को अमेरिका और इस्राइल द्वारा किए गए संयुक्त हमले के बाद शुरू हुए इस संघर्ष में अब तक कई देशों में बड़ी संख्या में लोगों की जान जा चुकी है। ईरान ने अपने नागरिकों के बलिदान के लिए धन्यवाद देते हुए दावा किया कि युद्ध के अधिकांश लक्ष्य हासिल कर लिए गए हैं और दुश्मन को ऐतिहासिक हार का सामना करना पड़ा है।
    साभार अमर उजाला

  • ट्रंप का अल्टीमेटम: '48 घंटे में होर्मुज खोलो वरना तबाह कर देंगे ईरान के पावर प्लांट्स'

    वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि उसने 48 घंटे के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य को बिना किसी शर्त के पूरी तरह नहीं खोला, तो अमेरिका उसके प्रमुख पावर प्लांट्स पर हमला करेगा।
    ट्रंप ने अपने बयान में स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि ईरान ने समयसीमा के भीतर कदम नहीं उठाया, तो अमेरिका उसकी ऊर्जा संरचनाओं को निशाना बनाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि कार्रवाई सबसे बड़े पावर प्लांट से शुरू होगी और अन्य ठिकानों तक बढ़ेगी। यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच पहले से ही तनावपूर्ण संबंध बने हुए हैं।
    होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। अगर यहां किसी तरह की रुकावट आती है, तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और तेल कीमतों पर पड़ सकता है। 
    एक दिन पहले ही अमेरिका ने ईरानी तेल की खरीद पर लगी पाबंदी को हटाने का फैसला लिया था। इसे पश्चिम एशिया में छिड़े संघर्ष के बीच अमेरिका का बड़ा यू-टर्न माना जा रहा है। गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी हमलों के डर की वजह से बड़ी संख्या में तेल और अन्य ऊर्जा संसाधनों को ले जा रहे जहाज फंसे हुए हैं।   
    साभार अमर उजाला

  • तमिलनाडु में बड़ा सियासी धमाका: बीजेपी ने विजय को दिया डिप्टी CM पद का ऑफर, क्या मानेंगे 'थलपति'?

    तमिलनाडु की राजनीति में 'सिनेमा' और 'सियासत' का हमेशा से गहरा नाता रहा है। अब इस कड़ी में एक नया अध्याय जुड़ता दिख रहा है। बीजेपी ने राज्य की सत्ता में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी TVK को गठबंधन का खुला ऑफर दिया है। सूत्रों का दावा है कि बीजेपी ने विजय के सामने उपमुख्यमंत्री पद का प्रस्ताव रखा है। इंडिया टुडे ने अपनी एक रिपोर्ट में बीजेपी के आंतरिक सूत्रों के हवाले से कहा है कि पार्टी ने गठबंधन के तहत TVK को 80 सीटें देने की पेशकश की है। बीजेपी आलाकमान का मानना है कि यदि विजय के प्रशंसकों का वोट एनडीए (NDA) के साथ जुड़ जाता है, तो राज्य के चुनावी नतीजे पूरी तरह पलट सकते हैं।
    बीजेपी रणनीतिकारों का आकलन है कि तमिलनाडु के कड़े मुकाबले में महज 2 प्रतिशत वोटों का अंतर भी जीत और हार की दिशा बदल सकता है। विजय की जबरदस्त लोकप्रियता को देखते हुए बीजेपी उन्हें अपने पाले में लाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है।
    बताया जा रहा है कि इस गठबंधन के लिए एक दूसरे राज्य के उपमुख्यमंत्री मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं, जो विजय के साथ संवाद का रास्ता साफ कर रहे हैं। बीजेपी ने भले ही उपमुख्यमंत्री पद और 80 सीटों का ऑफर दिया हो, लेकिन अभिनेता विजय की नजर मुख्यमंत्री की कुर्सी पर टिकी है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि विजय अपनी पहली ही चुनावी पारी में मुख्य भूमिका निभाना चाहते हैं, जो वर्तमान बातचीत में सबसे बड़ा 'स्पीड ब्रेकर' बना हुआ है।
    वहीं, विजय के करीबी सलाहकारों के बीच इस गठबंधन को लेकर चिंताएं भी हैं। विजय ने अपनी राजनीति की शुरुआत एक 'तीसरे विकल्प' और स्वतंत्र ताकत के रूप में की है। सलाहकारों का मानना है कि इतनी जल्दी किसी राष्ट्रीय गठबंधन (NDA) का हिस्सा बनने से उनकी नई और अलग राजनीति की छवि धूमिल हो सकती है।
    अगर यह गठबंधन हकीकत में बदलता है, तो राज्य में मुख्य मुकाबला त्रिकोणीय या एक नए ध्रुवीकरण की ओर बढ़ सकता है। अब तक राज्य की राजनीति द्रमुक (DMK) और अन्नाद्रमुक (AIADMK) के इर्द-गिर्द घूमती रही है। विजय और बीजेपी का साथ आना इन दोनों स्थापित क्षेत्रीय दलों के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर सकता है।
    साभार लाइव हिन्दुस्तान

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टेक्नोलॉजी

  • Google से प्राप्त कस्टमर केयर/हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करने के पहले ध्यान रखें ?

    Google से सर्च नंबर से वर्ष 2025 में 112 शिकायतों में 51 लाख 17 हजार रुपए की ऑनलाइन ठगी हुई थी।
    शिकायतों से संबंधित ठगो के बैंक अकाउंट फ्रिज कराने सहित 30% से अधिक फ्रॉड राशि आवेदकों को कराई गई रिफंड।
    ठग द्वारा आवेदकों से उनकी समस्या के हिसाब से झूठ बोलकर  किया था ऑनलाइन फ्रॉड ।
    ठग ने आवेदक को अलग–अलग झूठ बोलकर पेमेंट प्रोसेस करवाते हुए रुपए प्राप्त कर, की थी ठगी।
    NCRP पोर्टल एवं Cyber Helpline. 704912–4445 पर पर प्राप्त शिकायत पर तुरंत कार्यवाही कर रिफंड कराये रुपए।
    इंदौर - क्राइम ब्रांच इंदौर पुलिस के द्वारा संचालित सायबर हेल्पलाइन पोर्टल पर सोशल मीडिया एवं ऑनलाइन फ्रॉड संबंधित शिकायते प्राप्त होती है, जिसपर क्राईम ब्रांच इंदौर पुलिस के द्वारा लगातार आवेदकों के साथ हुए फ्रेड की राशि रिफंड कराई जा रही है, इसी अनुक्रम में कई आवेदकों के द्वारा ऑनलाइन फ्रॉड संबंधित शिकायत की गई थी जिसमे से कुछ  आवेदक से फ्राड की संपूर्ण जानकारी लेकर जांच की जिसमे ज्ञात हुआ कि (1). आवेदक विजय(परिवर्तित नाम) के द्वारा Google पर सर्च कर हल्दीराम की फ्रेंचाइजी लेने के लिए संपर्क करते, अज्ञात ठग से संपर्क हुआ, ठग द्वारा फ्रेंचाइजी का एडवांस पेमेंट के रूप में आवेदक को झूठ बोलकर झांसे में लेते हुए 2 लाख 36 हजार रुपए प्राप्त कर ऑनलाइन ठगी की वारदात को अंजाम दिया। 
    (2). आवेदक मोहन (परिवर्तित नाम) के द्वारा SBI बैंक का क्रेडिट कार्ड बंद कराने की हेतु Google पर सर्च करते ठग से संपर्क हुआ ठग द्वारा क्रेडिट कार्ड बंद करने के नाम से आवेदक कोन झांसे में लेते हुए Apk. सॉफ्टवेयर फाईल डाउनलोड करवाकर आवेदक का मोबाईल रिमोटली एक्सेस करते हुए आवेदक के 94,000 हजार रुपए ऑनलाइन ठगी की गई।
    (3). आवेदिका मेघा (परिवर्तित नाम) के द्वारा meshoo ऐप से शॉपिंग की गई थी जिसमें आवेदिका को प्रोडक्ट रिटर्न करने के लिए Google पर meshoo कंपनी का कस्टमर केयर नंबर सर्च करते ठग से संपर्क हुआ ठग द्वारा आवेदक को झांसे में लेते हुए, UPI पेमेंट प्रोसेस करवाते हुए पेमेंट भेजने के नाम से, ठग द्वारा आवेदक के 34,000 हजार रुपए ऑनलाइन प्राप्त कर ठगी की गई।
     (4). आवेदक राजेश (परिवर्तित नाम) के द्वारा अयोध्या में बिरला धर्मशाला की वेबसाइट से रूम बुक करने के लिए Google पर होटल का नंबर सर्च करते ठग से संपर्क हुआ ठग द्वारा आवेदक को झांसे में लेते हुए, एडवांस पेमेंट के रूप में 34,200 हजार रुपए ऑनलाइन प्राप्त किए परन्तु जब आवेदक अयोध्या पहुंचा ओर होटल में सम्पर्क किया तो उसे ज्ञात हुआ कि मेरी होटल बुकिंग नहीं हुई है किसी अज्ञात ठग द्वारा ठगी की गई।
     (5). आवेदक राकेश (परिवर्तित नाम) के द्वारा यूको बैंक का google से लोन डिपार्टमेंट का सर्विस नंबर प्राप्त करते ठग से सम्पर्क हुआ ठग द्वारा आवेदक से लोन हेतु प्रोसेसिंग फीस के रूप में 52,036 रुपए ऑनलाइन प्राप्त कर ऑनलाइन ठगी की गई।

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