सहजयोग: आत्मसाक्षात्कार से प्रेममय जीवन की ओर

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आत्मा का बस एक ही आभूषण है सभी से अनन्य प्रेम - श्री माताजी
 
आज का मनुष्य भौतिक उपलब्धियों और व्यक्तिगत स्वार्थों की दौड़ में इतना व्यस्त हो गया है कि उसके जीवन से सहज प्रेम, करुणा और आत्मीयता धीरे-धीरे कम होती जा रही है। जब जीवन केवल शरीर और अहंकार के स्तर पर जीया जाता है, तब व्यक्ति के भीतर असंतोष, प्रतिस्पर्धा और अलगाव की भावना बढ़ने लगती है। किंतु आत्मज्ञान की प्राप्ति होने पर मनुष्य यह अनुभव करता है कि उसका वास्तविक स्वरूप प्रेम है और प्रेम ही आत्मा का स्वाभाविक गुण है।
सच्चा प्रेम किसी अपेक्षा, स्वार्थ या अधिकार भावना से बंधा नहीं होता। वह सबके प्रति समान रूप से प्रवाहित होता है। सभी संतों और महापुरुषों ने प्रेम को ही ईश्वर तक पहुँचने का सबसे सरल और प्रभावशाली मार्ग बताया है। परमात्मा के लिए बाहरी दिखावा, दान या आडंबर से अधिक महत्वपूर्ण हृदय की निर्मलता और प्रेमपूर्ण भावनाएँ हैं।
अक्सर सांसारिक संबंधों में हमारा प्रेम आसक्ति का रूप ले लेता है। हम अपने प्रियजनों को अपने विचारों और इच्छाओं के अनुसार चलाना चाहते हैं। जब वे हमारी अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतरते, तब दुःख, क्रोध या निराशा उत्पन्न होती है। यही आसक्ति प्रेम की शुद्धता को प्रभावित करती है। 
     परम पूज्य श्री माताजी निर्मला देवी ने समझाया है कि मनुष्य को अपने आत्मगौरव में स्थित होकर सभी के प्रति संवेदनशील और करुणामय होना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति असंतुलित या गलत दिशा में जा रहा हो, तो हमें स्वयं असंतुलित होने के बजाय उसे संतुलन की ओर ले जाने का प्रयास करना चाहिए। जब व्यक्ति अपने आत्मस्वरूप में स्थित होता है, तब उसके भीतर से घृणा, क्रोध, ईर्ष्या और प्रतिस्पर्धा जैसी नकारात्मक भावनाएँ स्वतः समाप्त होने लगती हैं।सहजयोग ध्यान के माध्यम से प्राप्त आत्मसाक्षात्कार व्यक्ति के भीतर इस निर्लिप्त प्रेम को जागृत करता है। यह प्रेम न केवल स्वयं के जीवन को आनंद और शांति से भर देता है, बल्कि परिवार, समाज और सम्पूर्ण मानवता के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करता है। आत्मज्ञान के प्रकाश में व्यक्ति यह अनुभव करता है कि सम्पूर्ण सृष्टि एक ही परम चेतना से जुड़ी हुई है और सभी मनुष्य एक ही परमात्मा की संतान हैं।
सहजयोग ध्यान के माध्यम से आत्मसाक्षात्कार प्राप्त कर प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में शांति, संतुलन और निर्लिप्त प्रेम का अनुभव कर सकता है।
ध्यान की इस वैज्ञानिक एवं पूर्णत: नि:शुल्क पद्धति की अधिक जानकारी हेतु हेल्पलाइन नंबर 18002700800 अथवा    www.sahajayoga.org.in पर संपर्क करें।

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