MGR और जयललिता जैसी विरासत की तलाश: क्या डीएमके-एआईएडीएमके के चक्रव्यूह को भेद पाएंगे विजय?
नई दिल्ली. जोसेफ विजय चंद्रशेखर यानी तमिल सिनेमा फैन्स के थलपति विजय ने 2024 में जब एक्टिंग से रिटायरमेंट अनाउंस की, तो कई लोग शॉक थे. लेकिन तमिलनाडु चुनाव 2026 के नतीजे, विजय की परफॉरमेंस पर टकटकी लगाकर देखे जा रहे हैं. तमिलनाडु ने राजनीति में एक्टर्स के पर्सनालिटी कल्ट के सबसे बड़े उदाहरण देखे हैं. MGR और जयललिता जैसे दो सुपर पॉपुलर एक्टर वहां मुख्यमंत्री रह चुके हैं. पर उस दौर को लंबा वक्त बीत चुका है.
करीब 35 साल बाद किसी एक्टर से उस दमदार पॉलिटिकल दखल की उम्मीद की जा रही है, जो तमिल सिनेमा के कमल हासन और रजनीकांत जैसे आइकॉन नहीं कर पाए. दो साल पहले जीरो से स्टार्ट करने वाले विजय की इन चुनावों में जो भी जीत होगी, वो उनकी और उनकी पार्टी के लिए उपलब्धि ही होगी. लेकिन इस जीत का स्केल, उन दांवों की सफलता तय करेगा जो विजय ने इस राजनीतिक सफर की शुरुआत के लिए खेले और झेले हैं.
द्रविड़ आंदोलन से निकले सिद्धांत तमिलनाडु सरकारों की नीतियों में अपनी जगह बना चुके हैं. सामाजिक न्याय पॉलिसी मेकिंग का हिस्सा है और द्रविड़ पहचान सुरक्षित है. लेकिन आज के तमिल युवाओं में एक नई बेचैनी है— पोस्ट द्रविड़ एंग्ज़ायटी. कई बड़े सवाल मुंह ताक रहे हैं— द्रविड़ राजनीति कामयाब तो है, पर आगे क्या? दो ही पार्टियों में से एक कब तक चुनते रहें? पहचान की लड़ाई जीत ली, मगर नौकरियां कहां हैं? पॉलिटिक्स में उत्तर भारतीय कल्चर न होने के बावजूद भ्रष्टाचार क्यों है? जब नीतियों में सोशल जस्टिस दिखता है तो जमीन पर क्यों नहीं दिखता?
1990 के दशक से स्टार रहे विजय अपनी फिल्मों में सिस्टम से लड़ाई का चेहरा बने. विजय के पिता एस ए चंद्रशेखर की फ़िल्म रसिगन (1994) ने उन्हें ‘इलयाथलपति’ टाइटल दिया था. इस टाइटल का मतलब था- यंग लीडर. थुपक्की (2012), थलाइवा (2013), कत्थी (2014) और मर्सल (2017) जैसी फिल्मों में विजय के हीरो कॉर्पोरेट शोषण, किसानों की जमीन, मेडिकल करप्शन और सरकारी मशीनरी से भिड़ते दिखे. ये सिर्फ सिस्टम की आलोचना नहीं थी, विरासत में मिली सत्ता पर वार भी था. डायरेक्टर एटली ने अपनी फिल्म मर्सल से विजय को ऑफिशियली ‘थलपति’ यानी लीडर का टाइटल दिया था.
द्रविड़ पहचान के जन आंदोलन से निकलीं तमिलनाडु की दोनों बड़ी पार्टियां DMK और AIADMK आज राजनीति लीगेसी का पर्याय बन चुकी हैं. DMK की कमान करुणानिधि परिवार के हाथ में है. AIADMK की उनके पास, जो MGR या जयललिता के प्रति वफादारी जताते हैं.
साभार आज तक

