“वैश्विक समरसता केवल व्यापार और समृद्धि का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कृति-संवर्धन का सशक्त समन्वयक भी है - डॉ. भरत शर्मा”

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नीदरलैंड से ग्लोबल इंडियन ऑर्गेनाइजेशन और इंडो-यूके फ़ोरम के चेयरमैन राजिंदर तिवारी रियान के साथ मध्यप्रदेश में भोपाल, सीहोर, ग्वालियर और इंदौर से आये प्रतिनिधिमंडल ने डॉ. भरत शर्मा, सदस्य - संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार, ने नेतृत्व में मुलाक़ात कर भारतीय इकाइयों द्वारा निर्मित उत्पाद, जैविक खेती, भारतीय आयुर्वेदिक पदार्थों को वैश्विक व्यापार के अवसर प्रदान करने और भारतीय सांस्कृतिक संवर्धन और विश्व में इसके प्रचार और प्रसार के विषय पर विस्तार से संभावनाओं पर चर्चा की गई। भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री के नेतृत्व में महत्त्वाकांशी प्रकल्प “मेक इन इंडिया” अभियान एक नई व्यावसायिक और वैश्विक रोज़गारोत्तपन्न परियोजना का कारक बन गया है । भारत द्वारा निर्मित उत्पाद विश्व स्तर पर भारी आयात और निवेश के लिए निवेशकों और स्टार्टअप संस्थाओं को अपनी व्यापारिक क्षमताओं से आकर्षित कर रहा है।
उल्लेखनीय है कि यूके, यूरोप, अमेरिका, अफ्रीका, हॉलैंड, दुबई और जापान से लगभग ३०० लोगो का डायस्पोरा इंदौर में राजेंद्र तिवारी रियान के संगठन ग्लोबल इंडियन एसोसिएशन के माध्यम से आया है जो भारतीय व्यापारिक और सांस्कृतिक संवर्धन और विकास के लिए कृतसंकल्पित है।

राजेन्द्र तिवारी से मुलाक़ात कर प्रदेश के व्यापारिक और औद्योगिक संगठन के प्रतिनिधियों में विस्तृत चर्चा कर संभावनाओं की तलाश कर डॉ भरत शर्मा के इस सार्थक वैश्विक समागम की पहल को सराहा। आपने कहा कि भारत विश्व में तेज गति से प्रगति करने वाला देश बन कर उभरा है और वैश्विक मुद्रास्फीति की २०२५ में संभावित दर ४.४% है। ऐसे में भारतीय बाज़ार की तरफ़ विश्व बड़ी आशा से व्यापारिक और सांस्कृतिक विकास की दृष्टि से देख रहा है। आपने जैविक खेती और भारतीय मूल में प्राचीलित कृषि, जीवन शैली और सांस्कृतिक विविधता के साथ विश्वगुरु बनने के भारत की सार्थकता पर अपनी सहमति व्यक्त की है ।

डॉ. भरत शर्मा ने कहा कि हमारी वैश्विक समरसता केवल व्यापारिक अवसरों और आर्थिक समृद्धि तक सीमित नहीं रहती, वह तो विभिन्न सभ्यताओं के बीच सांस्कृतिक संवर्धन और आदान–प्रदान का भी सशक्त सेतु बनती है। अर्थशास्त्र, नीतिशास्त्र, साहित्यिक एवं विविध विषयों पर भारतीय वेद, शास्त्र और आध्यात्मिक दृष्टिकोण और सांस्कृतिक ज्ञान का महत्व वैश्विक समरसता व्यापार और समृद्धि का मार्ग तो प्रशस्त करती ही है, साथ ही वह संस्कृति-संवर्धन के सूक्ष्म सूत्रों को जोड़ने वाली अनिवार्य धुरी भी बन जाती है।

राजेंद्र तिवारी का स्वागत डॉ भरत शर्मा द्वारा किया गया और आभार शिक्षाविद डॉ राजीव झालानी (प्राध्यापक-माहेश्वरी महाविद्यालय, और अध्यक्ष - निजी महाविद्यालय संगठन) द्वारा किया गया।

उक्त अवसर पर भोपाल से जनजातीय उत्थान के लिए कार्यरत कंचन किशोर, स्टार्टअप इंडिया कें लिए कार्यरत लगभग ५००० लोगो से अधिक को प्रशिक्षण दे चुके आर्थिक प्रगट, ग्रामीण विकास से जुड़ी मोनिका कर्णावत, आईआईटी इंदौर में आई टी विभाग की डीन रीमा सुखीजा, फार्मास्यूटिकल उद्योग के उद्योगपति अंकुश बाहेती विशेष रूप से मौजूद रहे।

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