शुभता, शुचिता व शक्ति की आराधना का पर्व - गुड़ी पड़वा

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( प्रथम नवरात्रि मां शैलपुत्री की होगी आराधना )
वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥

भारत के प्रमुख पर्वों में से एक है नवरात्रि। चैत्र नवरात्रि का प्रथम दिवस लूनार कैलेंडर के अनुसार भारतीय नव वर्ष के रूप में उत्साह पूर्वक मनाया जाता है।
    नवरात्रि में देवी के नौ रूपों का पूजन व साधना की जाती है वस्तुतः यह सभी स्वरूप स्वयं आदिशक्ति द्वारा समय व आवश्यकतानुसार धारण किए गए। स्वयं आदिशक्ति श्री माताजी निर्मला देवी जी ने अपनी अमृतवाणी में इसका उल्लेख किया है
देवी नौ बार पृथ्वी पर आईं, देवी ने उन सभी लोगों से युद्ध किया जो साधकों का विनाश कर रहे थे तथा उनका जीवन दूभर कर रहे थे। सताए हुए इन महात्माओं ने देवी से प्रार्थना की, उन्होंने भगवती की पूजा की और देवी नौ बार आवश्यकतानुसार अवतरित हुईं।
       नवरात्रि के प्रथम दिवस मां शैलपुत्री की आराधना की जाती है। मां शैलपुत्री, श्री आदिशक्ति का प्रथम अवतरण मानी जातीं हैं क्योंकि इससे पूर्व श्री आदिशक्ति  सुरभि गाय के रूप में अवतरित हुई थीं।  उन्होंने हिमालय में जन्म लिया था  इसलिए उन्हें शैलपुत्री (हिमालय की पुत्री) कहा जाता है। 
चैत्र नवरात्रि का प्रथम दिवस भारत के कुछ भागों में गुड़ी पड़वा के रूप में भी मनाया जाता है महाराष्ट्र मैं विशेष तौर पर इसे भव्य रुप में आयोजित किया जाता है श्री माताजी ने गुड़ी पड़वा का वर्णन अपनी अमृतवाणी में इस प्रकार किया है कि,
यह दिन इसलिए मनाया जाता है क्योंकि यह नए साल का दिन है।...  इसे गुड़ी पड़वा कहते हैं।  इस दिन वे एक छोटे से झंडे के साथ एक छड़ी पर एक छोटा घड़ा डालते हैं।  घड़ा कुंडलिनी का प्रतिनिधित्व करता है।
इस गुड़ी पड़वा कुंडलिनी शक्ति की मात्र प्रतीकात्मक पूजा ना करके अपनी कुंडलिनी शक्ति को साक्षात जागृत करने का प्रयत्न करें।  श्री माता जी के सानिध्य में कुंडलिनी जागरण द्वारा अपना आत्म साक्षात्कार प्राप्त कर कुंडलिनी शक्ति की चैतन्य लहरियों का आनंद सम अनुभव करें।
कुंडलिनी जागरण द्वारा आत्मसाक्षात्कार प्राप्त करने  टोल फ्री नम्बर  18002700800 पर सम्पर्क करें। 

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