बिना प्रयास ध्यान : सहज योग की विशेषता
वर्तमान समय में मेडिटेशन (ध्यान) के प्रति लोगों का रुझान तेजी से बढ़ रहा है, और यह अब केवल आध्यात्मिक अभ्यास न रहकर एक वैश्विक स्वास्थ्य प्रवृत्ति बन गया है। भागदौड़ भरी जिंदगी, बढ़ते मानसिक तनाव और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता के कारण लोग अब मानसिक शांति की तलाश में ध्यान की ओर रुख कर रहे हैं।
परंतु ध्यान की सही विधि और इसके साइंस को समझे बिना ध्यान मात्र एक क्रिया बनकर रह जायेगी। मेडिटेशन (ध्यान) की सही विधि में मुख्य बाधाएं अति-विचार (Overthinking), शारीरिक बेचैनी, नींद/आलस्य, ध्यान न लगना और परिणाम के लिए जल्दबाजी हैं। इन्हें दूर करने के लिए प्रतिदिन एक ही समय पर नियमानुसार अभ्यास करना होगा, आरामदायक आसन पर बैठकर पहले सांसों पर ध्यान केंद्रित कर और विचारों को जबरदस्ती रोकने के बजाय साक्षी भाव से देखने का अभ्यास करना होगा।
सहज योग एक ऐसी अद्वितीय ध्यान पद्धति है जो 1970 में श्री माताजी निर्मला देवी द्वारा विकसित की गई थी, जिसके माध्यम से कुण्डलिनी ऊर्जा को सहजता से और लगभग बिना किसी प्रयास के जाग्रत किया जा सकता है जो ध्यान की गहनता के लिए सबसे ज्यादा आवश्यक है। सहज योग ध्यान पद्धति आत्म-साक्षात्कार (Self-Realization) के द्वारा आत्म-ज्ञान और आंतरिक शांति प्राप्त करने की एक स्वैच्छिक और नि:शुल्क विधि है। सहज योग पद्धति में आसन, प्राणायाम या कठिन मानसिक अनुशासन के बिना सीधे कुंडलिनी शक्ति जाग्रत होती है। सहज योग में ध्यान, मन को सप्रयास नियंत्रित नहीं करता है बल्कि यह स्वतः ही "विचार-रहित जागरूकता" की स्थिति लाता है, जहाँ मन शांत और स्पष्ट हो जाता है।
इसमें सचेत प्रयास की आवश्यकता नहीं होती; केवल दृढ़ इच्छा और समर्पण से ध्यान लगता है। यह तकनीक पूरी तरह से नि:शुल्क है और इसे कोई भी, कभी भी और कहीं भी इसका अभ्यास कर सकता है। यह न केवल आध्यात्मिक विकास करता है, बल्कि मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक संतुलन भी लाता है, जिससे तनाव और चिंता कम होती है। सहज योग के माध्यम से व्यक्ति अपने स्वयं का गुरु बन जाता है आत्म-संतोष, आनंद और आंतरिक शांति की अनुभूति पाने की विधि वह स्वंय सीख लेता है। विस्तार से सहज योग को जानने हेतू और आत्मसाक्षात्कार को प्राप्त करने हेतु अपने नज़दीकी सहजयोग ध्यान केंद्र की जानकारी टोल फ्री नंबर 1800 2700 800 से प्राप्त कर सकते हैं। सहज योग सदैव नि:शुल्क है।

