सभी धर्मों की मूल आध्यात्मिक एकता को आत्मसात करता है सहजयोग

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विश्व में अनेक धर्म, परंपराएँ और आध्यात्मिक मार्ग प्रचलित हैं। बाहरी रूप, पूजा-पद्धति और रीति-रिवाजों में भिन्नता होने के बावजूद सभी धर्मों का मूल उद्देश्य मानव को सत्य, प्रेम, शांति और ईश्वर से जोड़ना है। सहजयोग इसी सार्वभौमिक सत्य को स्वीकार करता है कि सभी धर्मों की जड़ एक ही आध्यात्मिक चेतना में निहित है। यही कारण है कि सहजयोग किसी धर्म विशेष का प्रचार न होकर मानवता की आध्यात्मिक एकता का संदेश देता है।
सहजयोग का दृष्टिकोण
श्री माताजी निर्मला देवी जी ने सहजयोग की स्थापना इस विचार के साथ की कि प्रत्येक मनुष्य के भीतर एक दिव्य शक्ति विद्यमान है, जिसे जागृत करके आत्म-साक्षात्कार प्राप्त किया जा सकता है। उनका मानना था कि सभी धर्मों के महान संतों, पैगंबरों और अवतारों ने मानवता को आत्मिक उन्नति का ही मार्ग दिखाया है।
       सहजयोग यह नहीं कहता कि व्यक्ति अपने धर्म को त्याग दे, बल्कि यह सिखाता है कि अपने धर्म की वास्तविक आध्यात्मिक गहराई को समझा जाए। इस प्रकार यह हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन और अन्य सभी धर्मों के मूल तत्वों को एक सूत्र में जोड़ता है।
यदि हम विभिन्न धर्मों के मूल सिद्धांतों को देखें, तो उनमें कई समानताएँ दिखाई देती हैं
प्रेम और करुणा – ईसा मसीह ने प्रेम का संदेश दिया, बुद्ध ने करुणा का, और श्रीकृष्ण ने मानव कल्याण का मार्ग बताया।
आत्मशुद्धि – हर धर्म मन और आत्मा की पवित्रता पर बल देता है।
ध्यान और प्रार्थना – सभी धार्मिक परंपराओं में ध्यान, प्रार्थना या इबादत के माध्यम से ईश्वर से जुड़ने की प्रेरणा दी गई है।
सत्य और नैतिकता – सत्य, ईमानदारी और सदाचार सभी धर्मों की आधारशिला हैं।सहजयोग इन सभी मूल्यों को आत्मसात कर व्यक्ति को यह अनुभव कराता है कि आध्यात्मिकता किसी सीमा, भाषा या पंथ की मोहताज नहीं है।
आज संसार में धार्मिक असहिष्णुता और विभाजन की समस्याएँ बढ़ती जा रही हैं। ऐसे समय में सहजयोग लोगों को आपसी प्रेम, सम्मान और सह-अस्तित्व का मार्ग दिखाता है। विभिन्न देशों और संस्कृतियों के लोग सहजयोग के माध्यम से एक साथ ध्यान करते हैं और यह अनुभव करते हैं कि आध्यात्मिक सत्य सार्वभौमिक है।
सहजयोग सभी धर्मों की मूल आध्यात्मिक एकता को आत्मसात करने वाला एक अद्वितीय मार्ग है। यह मानव को बाहरी मतभेदों से ऊपर उठाकर आत्मिक सत्य की ओर ले जाता है। वर्तमान समय में इसकी यह भावना मानव समाज को अधिक शांत, सहिष्णु और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध बना सकती है। सहजयोग ध्यान पूर्णत: नि:शुल्क है। सहजयोग की अधिक जानकारी टोल फ्री नंबर 1800 2700 800  से प्राप्त कर सकते हैं।

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