सहजयोग: बच्चों के सर्वांगीण विकास और सुसंस्कृत परिवार का सहज मार्ग
परम पूज्य सहजयोग प्रवर्तिका श्री माताजी निर्मला देवी जी ने सदैव इस बात पर बल दिया कि एक आदर्श समाज का निर्माण सुसंस्कृत परिवारों से होता है और सुसंस्कृत परिवारों की नींव बच्चों के आध्यात्मिक एवं नैतिक विकास पर आधारित होती है। सहजयोग के अनुसार, बचपन से ही बच्चों को परमात्मा के प्रति श्रद्धा, धर्म के नियमों का पालन, बड़ों का सम्मान, सत्य, प्रेम, करुणा और नैतिक मूल्यों का अभ्यास सिखाया जाना चाहिए। घर का वातावरण प्रेम, सौहार्द, अनुशासन और ईश्वरीय चेतना से परिपूर्ण हो, जहाँ दिन की शुरुआत परमात्मा को नमन से हो, परिवार के सदस्य एक-दूसरे के प्रति सम्मान और स्नेह का व्यवहार करें तथा नियमित पूजा, आरती और सहजयोग ध्यान के माध्यम से आध्यात्मिक वातावरण निर्मित हो। ऐसा वातावरण बच्चों में आत्मविश्वास, संतुलन, विनम्रता, विवेक और आत्मिक जागरूकता का सहज विकास करता है।
श्री माताजी ने बताया कि सहजयोग ध्यान आत्मसाक्षात्कार का सहज एवं निःशुल्क मार्ग है, जिसके माध्यम से मनुष्य अपने भीतर स्थित दिव्य शक्ति का अनुभव करता है। आत्मसाक्षात्कार के पश्चात बच्चों और युवाओं में एकाग्रता, मानसिक शांति, सकारात्मक सोच, नैतिक दृढ़ता तथा संस्कारित जीवन मूल्यों का स्वाभाविक विकास होने लगता है। जब परिवार के सभी सदस्य सहजयोग का नियमित अभ्यास करते हैं, तब घर में प्रेम, आनंद, आपसी विश्वास और आध्यात्मिक उन्नति का वातावरण विकसित होता है, जो केवल परिवार ही नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला बनता है। सहजयोग का संदेश है कि प्रत्येक बालक अपने भीतर दिव्यता का बीज लेकर जन्म लेता है; आवश्यकता केवल उस दिव्यता को जागृत करने की है, ताकि वह एक जिम्मेदार, संवेदनशील, धर्मनिष्ठ और विश्वकल्याण की भावना से प्रेरित नागरिक बन सके।
सहजयोग ध्यान का निःशुल्क अनुभव प्राप्त करने तथा अधिक जानकारी टोल-फ्री नंबर 1800 2700 800 अथवा www.sahajayoga.org.in से प्राप्त कर सकते हैं।

