एसडीएम महेश मंडलोई झाबुआ की अनूठी पहल पत्नी के जन्मदिन पर कन्या आश्रम में आयोजित किया 'तिथि भोज', बच्चियों के चेहरों पर खिली मुस्कान

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वीरांगना रानी दुर्गावती प्राथमिक कन्या आश्रम शाला (अंग्रेजी माध्यम) में हुआ आत्मीय आयोजन एसडीएम महेश मंडलोई ने अपनी पत्नी अस्मिता के जन्मदिन के खास मौके पर आश्रम की बच्चियों संग साझा की खुशियां।
'तिथि भोज' पहल से घर से दूर छात्रावासों में रह रहे बच्चों को मिल रहा है पारिवारिक अपनत्व और स्नेह।
अधिकारियों की इस संवेदनशीलता को देखकर समाज के अन्य लोग भी ले रहे हैं प्रेरणा।
रिपोर्टर:-सलीम हुसैन 
झाबुआ।खुशियां बांटने से हमेशा दोगुनी होती हैं, इस बात को प्रशासन की एक बेहद संवेदनशील और अनूठी पहल ने पूरी तरह से सच कर दिखाया है। शुक्रवार शाम वीरांगना रानी दुर्गावती प्राथमिक कन्या आश्रम शाला (अंग्रेजी माध्यम) में 'तिथि भोज' का एक भव्य और आत्मीय आयोजन किया गया। यह आयोजन एसडीएम महेश मंडलोई द्वारा किया गया। अवसर था उनकी पत्नी अस्मिताके जन्मदिन का, जिसे उन्होंने किसी महंगे होटल या रेस्टोरेंट में मनाने के बजाय, आश्रम की बच्चियों के बीच जाकर मनाने का सार्थक और प्रेरणादायक निर्णय लिया।
प्रशासन द्वारा शुरू की गई 'तिथि भोज' नामक यह पहल इन दिनों जिले भर में चर्चा का विषय बनी हुई है। यह एक ऐसा कदम है जो समाज और प्रशासन के बीच की दूरी को मिटा रहा है। इस योजना के तहत जिले के सभी आला अधिकारी अपने जीवन के विशेष दिनों को—जैसे खुद का या परिवार के किसी सदस्य का जन्मदिन, विवाह की वर्षगांठ, या कोई अन्य शुभ अवसर—छात्रावासों और आश्रमों में रह रहे बच्चों के साथ मनाते हैं। इन विशेष मौकों पर अधिकारियों द्वारा बच्चों के लिए अपनी ओर से सामूहिक सहभोज (भोजन) का आयोजन किया जाता है।इस तरह के आयोजनों का मुख्य उद्देश्य उन बच्चों को पारिवारिक माहौल, स्नेह और अपनत्व का एहसास कराना है, जो अपनी शिक्षा और बेहतर भविष्य के लिए अपने माता-पिता और घरों से दूर रह रहे हैं। अक्सर घर से दूर रहने के कारण बच्चे अकेलापन महसूस करते हैं, लेकिन जब जिले के बड़े अधिकारी आम इंसान की तरह उनके बीच पहुंचते हैं, उनके साथ बैठकर भोजन करते हैं और खुशियां बांटते हैं, तो बच्चों का मनोबल और आत्मविश्वास काफी बढ़ जाता है।वीरांगना रानी दुर्गावती कन्या आश्रम में आयोजित हुए इस 'तिथि भोज' में भी यही नजारा देखने को मिला। स्वादिष्ट भोजन और एसडीएम महेश मंडलोई व उनके परिवार से मिले पारिवारिक स्नेह ने बच्चियों के चेहरों पर एक अलग ही चमक ला दी। प्रशासन की यह मुहिम अब सिर्फ एक सरकारी कार्यक्रम न रहकर एक जन-आंदोलन का रूप लेती जा रही है। अधिकारियों को इस तरह के कार्य करते देख समाज के अन्य सक्षम नागरिक भी आगे आ रहे हैं। यह प्रयास समाज के अंतिम छोर पर खड़े बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें यह बताने का एक सुंदर तरीका है कि पूरा समाज उनके साथ एक परिवार की तरह खड़ा है।

मेरे और मेरे परिवार के लिए सुकून भरा अनुभव -
अपनी पत्नी के जन्मदिन के अवसर पर इन प्यारी बच्चियों के साथ समय बिताना और उनके साथ बैठकर भोजन करना मेरे और मेरे परिवार के लिए एक अद्भुत और सुकून भरा अनुभव रहा। 'तिथि भोज' प्रशासन की एक ऐसी शानदार पहल है जो हमें सीधे इन बच्चों के दिलों से जोड़ती है। घर से दूर रहकर पढ़ाई कर रहे इन बच्चों को सुविधाओं से ज्यादा स्नेह और अपनेपन की आवश्यकता होती है। जब हम उनके बीच जाकर अपनी खुशियां मनाते हैं, तो उनके चेहरों की निश्छल मुस्कान देखकर जो आत्मिक संतुष्टि मिलती है, उसे शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। मेरा समाज के सभी सक्षम नागरिकों से भी यह आग्रह है कि वे अपने जीवन के खास पलों को इन बच्चों के साथ जरूर साझा करें, ताकि समाज में एक सकारात्मक और संवेदनशील वातावरण का निर्माण हो सके महेश मंडलोई, एसडीएम, झाबुआ

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