निष्काम कर्म ही है आध्यात्मिक उन्नति का सच्चा मार्ग
मानव जीवन कर्म आधारित है। कर्म के बिना जीवन की कल्पना संभव नहीं है। इसलिए सफल और सार्थक जीवन के लिए कर्म आवश्यक है। किंतु कर्म तभी श्रेष्ठ बनता है जब उसमें कर्तापन, अहंकार और फल की अपेक्षा न हो।
जब हमारे द्वारा किए गए कार्यों पर अन्य लोग गर्व महसूस करते हैं, लेकिन स्वयं हमें अपने कार्य का अहंकार नहीं होता, तब यह कर्ता भाव के अभाव का संकेत है। अपने कार्य पर संतोष और प्रसन्नता स्वाभाविक है, परंतु जब “मैंने किया” का भाव प्रबल होने लगता है, तब वही गर्व अभिमान का रूप धारण कर लेता है। अभिमान एक नकारात्मक वृत्ति है, जिसकी जड़ में अहंकार छिपा रहता है। ‘मैं’ की भावना ही अभिमान का आधार है।
सहज योग में साधकों को निष्काम भाव से कार्य करने की प्रेरणा दी जाती है। परम पूज्य श्री माताजी निर्मला देवी ने स्पष्ट रूप से बताया है कि जब किसी साधक में कर्ता भाव उत्पन्न होने लगता है, तो वह उसकी आध्यात्मिक उन्नति में बाधा बन जाता है। सहज योग में अनेक सेवाएँ और कार्य होते हैं, किंतु यदि कोई साधक उन कार्यों के माध्यम से प्रसिद्धि या प्रशंसा प्राप्त करने का प्रयास करता है, तो वह निष्काम सेवा के मूल उद्देश्य से दूर हो जाता है।
ईश्वर को वही कर्म स्वीकार होता है जो पूर्णतः निष्काम भाव से किया गया हो। सहज योग में इस अवस्था को प्राप्त करने का एक अत्यंत सरल और प्रभावी मार्ग है। ध्यान के माध्यम से इड़ा (बाईं) और पिंगला (दाहिनी) नाड़ियों का संतुलन स्थापित होता है, जिससे अहंकार और प्रति-अहंकार की प्रवृत्तियाँ धीरे-धीरे समाप्त होने लगती हैं।
तब साधक के भीतर यह ज्ञान स्थापित होता है कि कार्य करने की शुद्ध प्रेरणा भी ईश्वर के आशीर्वाद से प्राप्त होती है और उसे पूर्ण करने की शक्ति भी ईश्वर ही प्रदान करता है। इस सत्य का अनुभव होने पर व्यक्ति समझता है कि वास्तविक कर्ता और करवाने वाला ईश्वर है, जबकि हम केवल उसके माध्यम हैं। ईश्वर का माध्यम बनने की यह अनुभूति गहन शांति, संतोष और आनंद प्रदान करती है।
आइए, हम सभी सहज योग से जुड़कर ध्यान की इस सरल एवं प्रभावशाली विधि को सीखें तथा अपने जीवन को अधिक शांत, संतुलित और आनंदमय बनाएं। सहज योग ध्यान केंद्र सभी नए साधकों का हार्दिक स्वागत करता है।
सहज योग के बारे में अधिक जानकारी हेतु टोल-फ्री नंबर 1800-270-0800 पर या वेबसाइट www.sahajayoga.org.in पर संपर्क कर सकते हैं। सहज योग पूर्णतः निःशुल्क है।

