स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फिर बंद: वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारत की दोहरी चुनौती

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मिडिल ईस्ट में युद्ध के आठवें हफ्ते में प्रवेश करते ही वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है। शुक्रवार को जिस स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने की घोषणा पर दुनिया ने राहत की सांस ली थी, शनिवार को वहां फिर से बारूद की गंध फैल गई। अमेरिका द्वारा ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी जारी रखने के फैसले के बाद ईरान ने न केवल मार्ग दोबारा बंद कर दिया, बल्कि वहां से गुजरने वाले जहाजों पर फायरिंग भी शुरू कर दी है।
शुक्रवार को ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने घोषणा की थी कि व्यापारिक जहाजों के लिए रास्ता पूरी तरह खुला है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इसका स्वागत किया, लेकिन चंद मिनटों बाद ही उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर समझौता होने तक अमेरिकी नौसैनिक घेराबंदी जारी रहेगी। इसे 'धोखा' करार देते हुए ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने शनिवार को जवाबी कार्रवाई की और चेतावनी दी कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की ओर आने वाले किसी भी जहाज को दुश्मन का सहयोगी मानकर निशाना बनाया जाएगा।
ईरानी नौसेना की इस आक्रामकता की चपेट में भारत के दो मर्चेंट जहाज (एक टैंकर और एक कंटेनर पोत) भी आ गए। ब्रिटिश सैन्य संस्था UKMTO के अनुसार, ईरानी गनबोट्स ने एक टैंकर पर फायरिंग की, जबकि एक अन्य कंटेनर जहाज पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ। इस घटना ने भारत को नाराज कर दिया है और भारत सरकार ने तुरंत ईरानी दूत को तलब कर सख्त विरोध दर्ज कराया है।
भारत अपनी कच्चा तेल जरूरतों का लगभग 85% आयात करता है, जिसका बड़ा हिस्सा सऊदी अरब और यूएई से इसी संकरे रास्ते (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) के जरिए आता है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या भारत 28 फरवरी से जारी इस नाकेबंदी और भविष्य के लंबे संकट को झेलने में सक्षम है? रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई 'अनौपचारिक मंत्री समूह' (IGoM) की उच्च स्तरीय बैठक में भारत की तैयारियों का खाका पेश किया गया।
सरकार के पास वर्तमान में कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल और एटीएफ (हवाई ईंधन) का 60 दिनों से अधिक का भंडार मौजूद है। इसके अलावा एलएनजी (LNG) का 50 दिन और एलपीजी (LPG) का 40 दिन का स्टॉक सुरक्षित है। इसमें भूमिगत गुफाओं में रखा गया रणनीतिक रिजर्व भी शामिल है।
साभार लाइव हिन्दुस्तान

 

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