सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख: बंगाल की मतदाता सूची में नहीं जुड़ेंगे खारिज हुए नाम

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कोलकाता। पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची के 'विशेष गहन संशोधन' (SIR) के दौरान संदिग्ध श्रेणी में रखे गए 60 लाख लोगों में से लगभग 27 लाख लोग शायद इस बार मतदान नहीं कर पाएंगे। दावों की जांच कर रहे न्यायिक अधिकारियों ने इनके आवेदनों को खारिज कर दिया है। 23 अप्रैल को होने वाले पहले चरण के चुनाव के लिए मतदाता सूची सोमवार आधी रात को अंतिम रूप से तय  की जानी थी।
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल सरकार और टीएमसी (TMC) समर्थकों की उन याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिनमें उन लोगों के नाम मतदाता सूची में शामिल करने की मांग की गई थी, जिनकी अपील 19 विशेष अपीलीय न्यायाधिकरणों में लंबित है। इन न्यायाधिकरणों का नेतृत्व हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश और न्यायाधीश कर रहे हैं।
मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने स्पष्ट किया कि "दावों की जांच उन न्यायिक अधिकारियों द्वारा की गई है जो निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों का कार्य कर रहे हैं। हमने 28 फरवरी को अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद उन लोगों के नाम पूरक सूची में शामिल करने की अनुमति दी थी, जिन्हें न्यायिक अधिकारियों ने मंजूरी दी थी। लेकिन इस प्रक्रिया को उन अपीलों के अंतिम फैसले तक नहीं खींचा जा सकता, जो न्यायाधिकरणों में लंबित हैं।"
पीठ ने आगे कहा कि अगर न्यायाधिकरणों को 15 अप्रैल तक लाखों अपीलों पर फैसला करने के लिए कहा जाता है, तो यह न केवल उन पर भारी बोझ डालेगा, बल्कि पूरी प्रक्रिया में अराजकता भी पैदा करेगा।
साभार लाइव हिन्दुस्तान

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