सहज योग से नास्तिक इंसान, आस्तिकता को पा सकता है- मात्र शुद्ध इच्छा से

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नास्तिक का मतलब है ईश्वर या किसी भी देवता के अस्तित्व में विश्वास न करना। व्यक्ति जो किसी भी धर्म को नहीं मानता, उसे भी नास्तिक कहा जाता है। नास्तिक ईश्वर के अस्तित्व को नकारता है । जैसा कि अक्सर कहा जाता है, नास्तिक मानते हैं कि ईश्वर का अस्तित्व झूठ है, या ईश्वर का अस्तित्व अत्यंत कम संभावना वाली एक काल्पनिक परिकल्पना है। फिर भी यह बात बनी हुई है कि नास्तिकता का ऐसा लक्षण-चित्रण अन्य तरीकों से अपर्याप्त है।
कहा जाता है कि हम आस्तिक को नास्तिक बना सकते हैं, लेकिन नास्तिक को आस्तिक  बनाना नामुनकिन सा लगता है।    नास्तिक  सत्य, तर्क, बुद्धिवाद, विवेकवाद, विज्ञान से जुड़ा हुआ रहता हैं!  नास्तिक आँख बंद करके परम्परा से चली आएं अवधारणाओं पर  कतई विश्वास नहीं कर सकता! वो खुद सत्य और असत्य की खोज करेगा, सत्य को महसूस करेगा तो ही मानेगा, नहीं होगा तो उसे उधर ही छोड़ देगा!
नास्तिक भले ही स्वयं को नास्तिक कहलवाना पसंद करते हो। पर, अंजाने ही भगवान‌ का नाम ले ही लेते हैं।  'हे भगवान ये क्या हो रहा है? ' , किसी के लिए 'गाॅड ब्लेस यू' और किसी की मृत्यू पर 'ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे' जैसे वाक्य उनके मुंह से निकल ही जाते हैं।   इन‌ वाक्यों का प्रयोग करने वाले सभी नास्तिक को यह समझ लेना चाहिए कि वे बौद्धिक तौर पर भले ही स्वयं को नास्तिक कह रहे हों, पर उनकी आत्मा आस्तिक ही है इसलिए अंजाने में‌ ही सही ईश्वर का नाम मुंह से निकल रहा है।
कई बार नास्तिक यह सबूत चाहते हैं कि ईश्वर सचमुच हैं और अगर ऐसा है तो इस सबूत की शुद्ध इच्छा लिए वे सहज योग केंद्र में आ सकते हैं, शर्त सिर्फ यह है कि अपनी शुद्ध इच्छापूर्ति हेतु अडिग रहे। ‌‌
सहज योग केंद्र में साधक जब नये साधकों को  आत्मसाक्षात्कार देते हैं तो नये साधकों की शुद्ध इच्छा के कारण कुंडलिनी शक्ति जागृत होती है और कुंडलिनी के रीढ की हड्डी से होते हुये उपर उठते ही सभी चक्र व नाड़ियाँ संतुलित होने लगती हैं और हमारे अंदर ईश्वरीय शक्ति चैतन्य रुप में प्रवाहित होने लगती है।  यही ईश्वर के होने का सबूत है। 
ईश्वर को लेकर असमंजस की स्थिति वाले लोग जब अशांत प्रकृति को लेकर सहज योग में आते हैं, तब उनके पूर्व के अनुभव के आधार पर वे बताते हैं कि बिना सोचे समझे दूसरों का अनुसरण करने और गलत गुरुओं के पास जाने से उनकी स्थिति ऐसी हुई है।   ऐसे लोग भी सहज योग ध्यान धारणा के बाद दिव्य शक्ति के अनुभव से शांत होकर, राहत महसूस करने लगते हैं। 
ध्यान में उतरते ही बहुत से सुखद संयोग घटित होते हैं, कई चमत्कारों का अनुभव होता है और अंततः वे यह समझने लगते हैं कि कोई शक्ति है जो उन्हें सही मार्ग पर ले जा रही है। 
उन सभी से जो नास्तिकता का लबादा ओढ़े हुये हैं, उनसे विनम्र निवेदन है कि यदि पवित्र इच्छा से वे सहज योग में आकर ईश्वरीय शक्ति की अनुभूति लेना चाहते हैं तो उनका हमारे सहज योग केंद्रों में स्वागत है। ‌
सहज योग को गहनता से समझने,जुड़ने और आत्मसाक्षात्कार प्राप्त करने हेतु अपने नज़दीकी सहजयोग ध्यान केंद्र की जानकारी टोल फ्री नंबर 1800 2700 800 से प्राप्त कर सकते हैं या वेबसाइट www.sahajayoga.org.in पर देख सकते हैं। सहज योग पूर्णतया निशुल्क है।

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