ट्रंप के दावे और भारत की चुप्पी: ड्रैगन ने डील के बीच खोजा 'संदेह का कोना'

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नई दिल्ली। अमेरिका की ओर से भारत पर टैरिफ को 50 फीसदी से घटाकर सीधे 18 पर्सेंट किए जाने पर चीन का भी रिएक्शन आया है। चीन के सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने एक एक्सपर्ट के हवाले से लिखा है कि भले ही अमेरिका और मोदी सरकार के बीच टैरिफ घटाने पर सहमति बन गई है, लेकिन दोनों के बयानों में अंतर है। चीन ने दरअसल उस बात का उल्लेख किया है, जिसमें ट्रंप ने दावा किया है कि भारत ने रूसी तेल की खरीद बंद करने का भरोसा दिया है। इसके अलावा कृषि उत्पाद, तकनीक समेत तमाम अमेरिकी चीजों की खरीद पर भी भारत ने सहमति जताई है। अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ को जीरो फीसदी तक घटाने का भी ट्रंप का दावा है।
वहीं भारत ने ट्रंप के ऐसे किसी भी दावे पर बात नहीं की है। डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने जो ट्वीट किया है, उसमें उनके इन दो दावों के बारे में बात नहीं की। उन्होंने सिर्फ अमेरिका को धन्यवाद दिया और डोनाल्ड ट्रंप के दुनिया में शांति के लिए किए गए प्रयासों की सराहना की है। इसी को लेकर चीन का कहना है कि दोनों नेताओं की भाषा में बड़ा अंतर दिखता है। चीन की सिंघुआ यूनिवर्सिटी के नेशनल स्ट्रेटजी इंस्टिट्यूट के डायरेक्टर कियांग फेंग का कहना है कि यह पहली बार नहीं है, जब डोनाल्ड ट्रंप ने भारत की ओर से रूसी तेल की खरीद रोके जाने का दावा किया है।
उन्होंने कहा कि पहले भी ट्रंप ऐसे दावे करते रहे हैं और भारत ने उन्हें खारिज किया है। उनका कहना है कि ट्रंप के इन दावों की पुष्टि तभी की जा सकती है, जब भारत की ओर से कोई आधिकारिक सूचना इस संबंध में दी जाए।
साभार लाइव हिन्दुस्तान

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