“हम कौन हैं? — स्वयं की खोज की एक यात्रा” सहजयोग

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मनुष्य सदियों से एक ही प्रश्न पूछता आया है — “मैं कौन हूँ?” क्या हम केवल यह शरीर हैं? क्या हमारा अस्तित्व केवल नाम, पद, संबंध और विचारों तक सीमित है? जब जीवन में संघर्ष, तनाव, भय और असंतोष बढ़ता है, तब भीतर से एक आवाज़ उठती है — “क्या जीवन का कोई गहरा अर्थ भी है?” सहजयोग इसी प्रश्न का उत्तर देने वाली एक आध्यात्मिक यात्रा है — स्वयं को जानने की यात्रा।
आज का मनुष्य बाहरी उपलब्धियों के पीछे दौड़ रहा है, लेकिन भीतर से खालीपन अनुभव करता है। भौतिक प्रगति के बावजूद मानसिक तनाव, चिंता और असंतोष बढ़ते जा रहे हैं। स्वयं की खोज इसलिए आवश्यक है क्योंकि:
यह हमें आंतरिक शांति देती है
जीवन का वास्तविक उद्देश्य समझाती है
संबंधों में प्रेम और संतुलन लाती है
मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को बेहतर बनाती है
हमें वर्तमान क्षण में जीना सिखाती है
सहजयोग एक सरल, स्वाभाविक और अनुभव आधारित ध्यान पद्धति है, जिसकी स्थापना श्री माताजी निर्मला देवी ने 1970 में की। “सहज” का अर्थ है — जो जन्म से हमारे भीतर विद्यमान है, और “योग” का अर्थ है — आत्मा का परमात्मा से मिलन। सहजयोग का मुख्य उद्देश्य है आत्मसाक्षात्कार — अर्थात अपने वास्तविक स्वरूप, आत्मा, का अनुभव करना।
यह केवल किसी सिद्धांत या दर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि एक जीवंत अनुभव है, जिसे हर व्यक्ति स्वयं महसूस कर सकता है।सहजयोग के अनुसार मनुष्य केवल शरीर, मन और बुद्धि नहीं है। हमारे भीतर एक सूक्ष्म चेतना विद्यमान है जिसे आत्मा कहा गया है। यही आत्मा हमारे अस्तित्व का वास्तविक स्वरूप है।  आत्मा का अनुभव ही स्वयं की खोज की पहली सीढ़ी है।
सहजयोग में बताया गया है कि प्रत्येक मनुष्य के भीतर रीढ़ की हड्डी के आधार में एक सूक्ष्म ऊर्जा स्थित होती है, जिसे कुंडलिनी कहा जाता है। यह शक्ति हमारी आध्यात्मिक माता के समान है। जब ध्यान के माध्यम से यह जागृत होती है, तब यह हमारे सूक्ष्म चक्रों को संतुलित करते हुए सहस्रार तक पहुँचती है। इसी अवस्था में व्यक्ति आत्मसाक्षात्कार का अनुभव करता है।  इस अनुभव के दौरान साधक अपने हाथों और सिर के ऊपर ठंडी हवा या कंपन महसूस कर सकता है, जिसे चैतन्य लहरियाँ कहा जाता है।
जब मनुष्य स्वयं को जान लेता है, तब बाहरी परिस्थितियाँ उसे उतना विचलित नहीं कर पातीं। सहजयोग हमें यह अनुभव कराता है कि:“हम केवल यह शरीर नहीं हैं बल्कि शुद्ध आत्मा हैं।”
“हम कौन हैं?” यह केवल एक दार्शनिक प्रश्न नहीं, बल्कि जीवन का सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न है। सहजयोग इस प्रश्न का उत्तर किसी पुस्तक या तर्क से नहीं, बल्कि प्रत्यक्ष अनुभव से देता है। स्वयं की खोज की यह यात्रा बाहर नहीं, भीतर की ओर जाती है। “अपने भीतर की शांति को पहचानना ही वास्तविक आत्मज्ञान है।” सहजयोग ध्यान पूर्णत: नि:शुल्क है। सहजयोग की अधिक जानकारी टोल फ्री नंबर 1800 2700 800  से प्राप्त कर सकते हैं।

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