मौसम की एक करवट ने बढ़ाई किसानों की धड़कनें ! छुरा विकासखंड में खेतों में बिछी धान की फसल, मेहनत पर मंडराया संकट
तेज हवाओं और बारिश से कटाई के करीब पहुंची फसल प्रभावित, उपज बचाने की जद्दोजहद में जुटे किसान, सर्वेक्षण और राहत की उम्मीद
छुरा। जिस धान की सुनहरी बालियों को देखकर किसान अच्छी पैदावार और घर में खुशहाली के सपने संजो रहे थे, उसी फसल पर मौसम की बेरुखी भारी पड़ती नजर आ रही है। छुरा विकासखंड क्षेत्र में तेज हवाओं और बारिश के बाद पककर तैयार हो रही धान की फसल खेतों में बिछ गई है। सामने आई तस्वीरों में जमीन पर गिरी फसल और खेतों में जमा पानी किसानों की बढ़ती मुश्किलों को बयां कर रहे हैं।
कटाई के करीब पहुंच चुकी फसल पर मौसम की मार ने अन्नदाताओं की चिंता बढ़ा दी है। चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के प्रभाव से मौसम में आए बदलाव के बीच किसानों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती महीनों की मेहनत से तैयार उपज को सुरक्षित घर पहुंचाने की है। खेतों में गिरी धान की कटाई और समेटने में अतिरिक्त समय एवं मजदूरी लग सकती है। वहीं लगातार नमी रहने से दाने झड़ने, गुणवत्ता प्रभावित होने और फसल खराब होने का खतरा भी बढ़ सकता है।
खेती की तैयारी से लेकर बीज, खाद, दवाइयों, सिंचाई और मजदूरी तक पूंजी लगाने वाले किसानों को अब संभावित आर्थिक नुकसान की चिंता सता रही है। उनके परिवारों की सालभर की जरूरतें भी काफी हद तक धान की पैदावार से जुड़ी रहती हैं।
छुरा विकासखंड में कितने गांव और कितने रकबे में फसल प्रभावित हुई है, इसका आधिकारिक आंकड़ा फिलहाल सामने नहीं आया है। वास्तविक क्षति का पता कृषि एवं राजस्व विभाग के सर्वेक्षण के बाद ही चल सकेगा। प्रभावित किसान खेतों की तस्वीरें और आवश्यक विवरण सुरक्षित रखें तथा कृषि विशेषज्ञों से सलाह लें। अब किसानों को मौसम साफ होने, समयबद्ध सर्वेक्षण और पात्रतानुसार सहायता मिलने की उम्मीद है।

