करैरा नगर परिषद में फर्जी प्रस्ताव और रिकॉर्ड हेराफेरी का आरोप

  • Share on :

2 महिला पार्षदों ने SDM को सौंपा शिकायती पत्र, कहा— अध्यक्ष पति के दबाव में काम कर रही है परिषद 
करैरा - नगर परिषद करैरा में व्याप्त भ्रष्टाचार और अनियमितताओं का मामला अब खुलकर सामने आया है। वार्ड क्रमांक 3 की पार्षद शालिनी सोनी और वार्ड क्रमांक 15 की पार्षद खुशबू यादव ने एसडीएम करैरा को अलग-अलग शिकायती आवेदन सौंपते हुए परिषद में फर्जी प्रस्ताव पारित करने,बैठक कार्यवाही में हेराफेरी करने और महत्वपूर्ण रजिस्टरों को छिपाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। दोनों ने आरोप लगाया कि परिषद अध्यक्ष के पति के दबाव में पूरा प्रशासनिक कामकाज प्रभावित हो रहा है।

2 पार्षदों ने अपने आवेदनों में समान बिंदुओं का उल्लेख करते हुए कहा कि हालिया परिषद बैठक में बजट प्रस्ताव और एफडीआर वापसी का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित दिखाया गया,जबकि उन्होंने स्पष्ट रूप से इन प्रस्तावों का विरोध किया था। शालिनी सोनी ने बताया कि उन्होंने बैठक रजिस्टर में अपनी असहमति दर्ज कराई थी,लेकिन बाद में उसे नजरअंदाज कर फर्जी सर्वसम्मति दर्शाई गई। खुशबू यादव ने भी यही आरोप लगाते हुए कहा कि यह जनप्रतिनिधियों के अधिकारों का खुला उल्लंघन और लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर हमला है।

पार्षदों ने नगर परिषद अधिनियम 1961 की धारा 19 का हवाला देते हुए कहा कि बैठक की कार्यवाही उसी दिन रजिस्टर में अंकित करना अनिवार्य है,लेकिन करैरा परिषद में यह नियम कभी नहीं माना जाता,रजिस्टर मांगने पर हमेशा यही कहा जाता है कि वह अध्यक्ष महोदय के घर पर है। पार्षदों का कहना है कि यह प्रथा वर्षों से चली आ रही है, जिससे पारदर्शिता खत्म हो गई है।

आवेदनों में यह भी उल्लेख है कि पीआईसी बैठकें समय पर नहीं होतीं,और इनकी कार्यवाही केवल कागजों तक सीमित रहती है। परिषद के कैश बुक,कार्यवाही रजिस्टर,स्टोर रजिस्टर और खपत रजिस्टर जैसे दस्तावेज न तो जनप्रतिनिधियों को दिखाए जाते हैं, न ही जनता को। जानकारी मांगने पर यही जवाब मिलता है कि सारे रजिस्टर अध्यक्ष पति के निवास पर रखे हैं।

दोनों पार्षदों ने सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) के तहत जानकारी न देने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आरटीआई आवेदन देने के बावजूद समय पर कोई जवाब नहीं दिया जाता,जिससे जवाबदेही खत्म हो रही है।

पार्षदों ने मांग की है कि फर्जी प्रस्तावों, रजिस्टर हेराफेरी और अध्यक्ष पति की दखलंदाजी की स्वतंत्र जांच कराई जाए। उन्होंने दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ नगर पालिका अधिनियम 1961 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की मांग की है।

एसडीएम कार्यालय पहुंचकर दोनों पार्षदों ने आवेदन सौंपे और कहा कि अगर कार्रवाई नहीं हुई तो वे उच्चाधिकारियों तक शिकायत लेकर जाएंगी। शालिनी सोनी ने कहा, “जनता के हितों की रक्षा के लिए यह कदम उठाना जरूरी हो गया है।” वहीं खुशबू यादव ने कहा, “ऐसी अनियमितताएं लोकतंत्र को कमजोर करती हैं।”
इस प्रकरण के बाद करैरा की स्थानीय राजनीति में हलचल बढ़ गई है और पारदर्शिता की मांग ने नया मोड़ ले लिया है।
जिला ब्यूरो दीपक परमार

Latest News

Everyday news at your fingertips Try Ranjeet Times E-Paper