RBI नियमों की धज्जियाँ उड़ाकर बैंक रिकवरी एजेंटों की गुंडागर्दी; बीच सड़क पर महिलाओं से अभद्रता कर छीनी कार
इंदौर। शहर के कुंदन नगर क्षेत्र में यस बैंक (Yes Bank) के रिकवरी एजेंटों द्वारा मानवता और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के नियमों को ताक पर रखकर सरेराह गुंडागर्दी करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि बैंक एजेंटों ने न केवल उनके साथ धोखाधड़ी की, बल्कि बीच रास्ते में परिवार और महिलाओं के साथ मारपीट व अभद्रता करते हुए जबरन वाहन लूट लिया।
क्या है पूरा मामला?
कुंदन नगर निवासी किशोर पंवार ने 3 सितंबर 2023 को सपना संगीता स्थित जैन कार बाजार से एक अर्टिगा कार (MP 09 WM 1427) खरीदी थी। 10.50 लाख रुपये की इस कार के लिए उन्होंने 3.50 लाख रुपये डाउन पेमेंट दिया था और शेष राशि यस बैंक से फाइनेंस कराई थी। जिसकी 19,510 रुपये की मासिक किस्त हर महीने की 15 तारीख को नियत थी।
पीड़ित के अनुसार, उन्होंने लगातार 26 किस्तें समय पर जमा कीं। नवंबर 2025 तक का भुगतान बैंक रिकॉर्ड में दर्ज है। दिसंबर 2025 में तकनीकी समस्या के कारण बैंक से किस्त नहीं कट पाई, जिसके बाद रिकवरी एजेंट कुलदीप शर्मा और सुनील वर्मा ने घर आकर दिसंबर और जनवरी की किस्त का भुगतान नकद (Cash) लिया। आरोप है कि सिस्टम खराब होने का बहाना बनाकर एजेंटों ने इसकी रसीद नहीं दी।
बीच सड़क पर गुंडागर्दी और अभद्रता
धोखाधड़ी का खुलासा तब हुआ जब बैंक से बकाया होने का कॉल आया। जब किशोर पंवार ने एजेंटों से रसीद मांगी, तो वे टालमटोल करने लगे। लगभग एक महीने पहले, जब किशोर पंवार अपने परिवार और मेहमानों के साथ कार से जा रहे थे, तभी परमाणु नगर के पास कुलदीप और सुनील के भेजे गए गुंडों ने कार को घेर लिया।
पीड़ित का आरोप है कि:
बिना किसी कानूनी नोटिस या सूचना के कार को बीच रास्ते रोका गया।
गुंडों ने परिवार के सदस्यों और महिलाओं के साथ गाली-गलौज व हाथापाई की।
पीड़ित को अपमानित कर जबरन कार छीन ली गई और एजेंट फरार हो गए।

पुलिस और बैंक प्रशासन की चुप्पी
पीड़ित जब बैंक कार्यालय पहुंचे, तो वहां उन्हें सहायता देने के बजाय धमकाया गया। वहीं, कानून की रक्षा करने वाली पुलिस का रवैया भी निराशाजनक रहा। पीड़ित का कहना है कि वे राजेंद्र नगर थाने के तीन चक्कर लगा चुके हैं, लेकिन उनकी शिकायत पर कोई सुनवाई नहीं हुई।
बड़ा सवाल: RBI के स्पष्ट निर्देश हैं कि रिकवरी के लिए किसी भी ग्राहक के साथ शारीरिक बल या अभद्रता का प्रयोग नहीं किया जा सकता। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इंदौर में बैंक एजेंटों को कानून का कोई खौफ नहीं है? क्या प्रशासन इन दबंग एजेंटों पर लगाम लगाएगा या पीड़ित परिवार न्याय के लिए दर-दर भटकता रहेगा?

