इंदौर में ब्लैक पैंथर की अफवाह: हकीकत क्या है और घबराने की ज़रूरत क्यों नहीं

  • Share on :

आदित्य शर्मा

इंदौर। मंगलवार सुबह इंदौर के आरआरकैट परिसर के पास हिम्मतगढ़ गांव क्षेत्र में “ब्लैक पैंथर” देखे जाने का दावा करने वाली एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई। कुछ ही समय में यह तस्वीर व्हाट्सऐप ग्रुपों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर फैल गई, जिससे कैट रोड और आसपास के गांवों में लोगों के बीच चिंता और चर्चा का माहौल बन गया।

हालांकि, वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि मामले की वैज्ञानिक जांच और मौके पर की गई पड़ताल में अब तक किसी भी बड़े वन्यजीव, विशेष रूप से ब्लैक पैंथर या तेंदुए की मौजूदगी का कोई प्रमाण नहीं मिला है।

क्या दावा किया गया था

सोशल मीडिया पर फैली जानकारी के अनुसार, यह तस्वीर 16 दिसंबर को सुबह करीब 11:15 बजे 12 वर्षीय बालक मीत चौधरी द्वारा ली गई बताई गई, जो आरआरकैट क्षेत्र के पास रहता है। इसके अलावा, पास की एक फैक्ट्री में काम करने वाली एक महिला ने भी शाम करीब 7 बजे पैंथर जैसे जानवर को देखने का दावा किया।

इन दावों को गंभीरता से लेते हुए, इंदौर वन मंडल की टीम ने तुरंत जांच शुरू की।

वन विभाग की ज़मीनी जांच

सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और आरआरकैट की सीमा, आसपास की झाड़ियों, खेतों, गांव के रास्तों, नालों और खुले मिट्टी वाले क्षेत्रों में गहन तलाशी ली। आमतौर पर अगर तेंदुआ या कोई बड़ा मांसाहारी जानवर उस इलाके से गुजरा होता है, तो उसके पंजों के निशान, मल, खरोंच या अन्य संकेत ज़मीन पर मिल जाते हैं।

लेकिन कई बार जांच करने के बावजूद, मौके पर ऐसे कोई निशान नहीं मिले जो तेंदुए या किसी बड़े वन्यजीव की मौजूदगी की पुष्टि कर सकें।

तस्वीर और बयानों की जांच

जांच के दौरान उस मोबाइल फोन की भी पड़ताल की गई जिससे तस्वीर ली गई बताई गई थी। जांच में सामने आया कि तस्वीर में कई बार एडिटिंग की गई थी। जब तस्वीर की पृष्ठभूमि की तुलना वास्तविक स्थान से की गई, तो पेड़-पौधों, ज़मीन और आसपास के ढांचे मेल नहीं खाते पाए गए।

इसके अलावा, पूछताछ के दौरान दिए गए बयानों में भी विरोधाभास पाया गया। फैक्ट्री में काम करने वाली महिला के दावे की भी मौके पर जाकर जांच की गई, लेकिन वहां भी किसी तरह के वन्यजीव के संकेत नहीं मिले।

ब्लैक पैंथर को लेकर भ्रम

वन विभाग के अधिकारियों ने लोगों को यह भी समझाया कि ब्लैक पैंथर कोई अलग या खतरनाक प्रजाति नहीं है। दरअसल, यह सामान्य भारतीय तेंदुए का ही एक रूप होता है, जिसमें मेलानिज़्म नामक आनुवंशिक कारण से उसका रंग काला दिखाई देता है। उसका स्वभाव और व्यवहार सामान्य तेंदुए जैसा ही होता है।

भारत में ब्लैक पैंथर बहुत दुर्लभ हैं और वे आमतौर पर घने जंगलों वाले इलाकों में पाए जाते हैं, जैसे पश्चिमी घाट, ताडोबा, पेंच और अचानकमार टाइगर रिज़र्व। इंदौर जैसे शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्र में इसकी मौजूदगी असामान्य मानी जाती है और इसके लिए ठोस वैज्ञानिक प्रमाण आवश्यक होते हैं।

एहतियात के तौर पर कदम

हालांकि अब तक कोई पुष्टि नहीं हुई है, फिर भी लोगों को आश्वस्त करने के लिए इंदौर वन मंडल ने हिम्मतगढ़, कैट रोड और आसपास के इलाकों में गश्त बढ़ा दी है। साथ ही, रणनीतिक स्थानों पर कैमरा ट्रैप भी लगाए जाएंगे, ताकि यह पूरी तरह स्पष्ट हो सके कि क्षेत्र में किसी बड़े वन्यजीव की गतिविधि है या नहीं।

अधिकारियों ने बताया कि यदि भविष्य में किसी तेंदुए की मौजूदगी की वैज्ञानिक पुष्टि होती है, तो जन सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उसे पकड़कर सुरक्षित जंगल क्षेत्र में स्थानांतरित करने सहित सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

लोगों से अपील

वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें, सोशल मीडिया पर बिना पुष्टि की गई जानकारी साझा न करें और किसी भी वन्यजीव के दिखने की सूचना सीधे वन विभाग को दें। विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस समय घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है और स्थिति पर पूरी तरह निगरानी रखी जा रही है।

वन विभाग की जांच के अनुसार, आरआरकैट क्षेत्र में ब्लैक पैंथर देखे जाने का दावा फिलहाल प्रमाणित नहीं हो सका है।

प्रदीप मिश्र IFS 
डीएफओ इंदौर

Latest News

Everyday news at your fingertips Try Ranjeet Times E-Paper