पटवारी की रिश्वतखोरी: नामांतरण में भ्रष्टाचार और मध्य प्रदेश सरकार के कानून
जमीन खरीदने के बाद नामांतरण (म्यूटेशन) की प्रक्रिया में पटवारियों द्वारा रिश्वत की मांग और जानबूझकर देरी करना आम समस्या बन चुका है। इसे रोकने और प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने कई कानून और प्रावधान लागू किए हैं। यह लेख नामांतरण की प्रक्रिया, सरकार द्वारा उठाए गए कदम, और नागरिकों के अधिकारों पर प्रकाश डालता है।
नामांतरण की कानूनी प्रक्रिया: आपके अधिकार
मध्य प्रदेश सरकार ने भूमि नामांतरण प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए राजस्व पुस्तक परिपत्र (Revenue Book Circular) और लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत नियम बनाए हैं।
1. नामांतरण की प्रक्रिया:
जमीन रजिस्ट्री के बाद आवेदन:
रजिस्ट्री के बाद खरीदार को नामांतरण के लिए पटवारी या तहसील कार्यालय में आवेदन देना होता है।
दस्तावेज़:
बिक्री रजिस्ट्री की प्रमाणित प्रति
भूमि रिकॉर्ड (खसरा, खतौनी)
पहचान पत्र (आधार कार्ड, पैन कार्ड)
शुल्क:
नामांतरण प्रक्रिया के लिए सरकार द्वारा तय मामूली शुल्क लागू होता है।
2. समय सीमा:
मध्य प्रदेश लोक सेवा गारंटी अधिनियम, 2010 के तहत नामांतरण की प्रक्रिया को 30 दिनों के भीतर पूरा किया जाना अनिवार्य है।
यदि प्रक्रिया में देरी होती है, तो संबंधित अधिकारी पर जुर्माना लगाया जा सकता है।
3. डिजिटल नामांतरण प्रक्रिया:
मध्य प्रदेश सरकार ने MP Bhulekh Portal (https://mpbhulekh.gov.in) शुरू किया है।
यहां नागरिक अपने भूमि रिकॉर्ड और नामांतरण आवेदन ऑनलाइन देख और ट्रैक कर सकते हैं।
मध्य प्रदेश सरकार द्वारा उठाए गए कदम
1. लोक सेवा गारंटी अधिनियम:
यह अधिनियम सुनिश्चित करता है कि नामांतरण और अन्य राजस्व सेवाएं एक निर्धारित समय सीमा में प्रदान की जाएं।
यदि अधिकारी समय पर सेवा देने में विफल रहते हैं, तो नागरिक अपील कर सकते हैं।
2. डिजिटलीकरण:
भूमि रिकॉर्ड और नामांतरण प्रक्रिया को डिजिटल करने के लिए MP Online और Bhulekh पोर्टल की शुरुआत की गई है।
यह कदम पटवारियों की मनमानी और भ्रष्टाचार को कम करने में मदद करता है।
3. एंटी-करप्शन सेल:
राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार के मामलों की जांच के लिए लोकायुक्त और आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) स्थापित किए हैं।
4. शिकायत तंत्र:
शिकायत के लिए कलेक्टर और एसडीएम कार्यालय को अधिकृत किया गया है।
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन (181) पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
पटवारी की शिकायत कहां और कैसे करें?
1. कलेक्टर और एसडीएम कार्यालय:
पटवारी द्वारा रिश्वत मांगने या नामांतरण में देरी की शिकायत जिला कलेक्टर या एसडीएम को लिखित रूप से की जा सकती है।
शिकायत में सभी दस्तावेज और घटनाओं का विवरण दें।
2. लोकायुक्त:
रिश्वतखोरी के मामलों में लोकायुक्त कार्यालय में शिकायत दर्ज करें।
शिकायत के लिए सबूत जैसे रिकॉर्डिंग, व्हाट्सएप संदेश, या दस्तावेज़ जमा करें।
3. मुख्यमंत्री हेल्पलाइन (181):
यह हेल्पलाइन नागरिकों की शिकायतों के त्वरित निवारण के लिए है।
यहां शिकायत दर्ज करने के बाद ट्रैकिंग आईडी प्रदान की जाती है।
4. RTI (सूचना का अधिकार):
नामांतरण की प्रगति का पता लगाने और देरी का कारण जानने के लिए RTI आवेदन दायर करें।
5. MP Bhulekh Portal:
यहां ऑनलाइन शिकायत दर्ज की जा सकती है।
शिकायत दर्ज करने के बाद प्रक्रिया की स्थिति ट्रैक करें।
भ्रष्टाचार के खिलाफ नागरिक क्या करें?
1. रिश्वत न दें:
पटवारी या किसी भी अधिकारी को रिश्वत देना न केवल गैरकानूनी है, बल्कि यह भ्रष्टाचार को बढ़ावा भी देता है।
2. ऑनलाइन प्रक्रिया अपनाएं:
नामांतरण के लिए ऑनलाइन आवेदन करें और भौतिक हस्तक्षेप से बचें।
3. आवाज उठाएं:
भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने के लिए सामाजिक संगठनों और मीडिया का सहारा लें।
रिश्वत मांगने वाले अधिकारी का नाम उजागर करें।
4. लोक सेवा गारंटी का उपयोग करें:
नामांतरण में देरी होने पर लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत अपील करें।
निष्कर्ष
पटवारियों द्वारा नामांतरण में रिश्वतखोरी और जानबूझकर देरी करना एक गंभीर समस्या है, लेकिन मध्य प्रदेश सरकार ने इसे रोकने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं। नागरिकों को इन कानूनों और डिजिटल सुविधाओं का लाभ उठाकर अपनी समस्याओं का समाधान करना चाहिए। भ्रष्टाचार तभी रुकेगा, जब हम अपने अधिकारों के लिए खड़े होंगे और रिश्वतखोरी के खिलाफ सख्त कदम उठाएंगे।
रणजीत टाइम्स,
आपका गोपाल गावंडे