बुरहानपुर: छात्रावास के राशन में 'हेराफेरी' की बू, सरकारी गेहूं की सील खोलते पकड़े जाने पर अधीक्षक के गोलमोल जवाब
महेन्द्र मालवीय रणजीत टाईम्स
तुकईथड़ (बुरहानपुर): जनपद पंचायत खकनार अंतर्गत आने वाले ग्राम तुकईथड़ स्थित 'नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय बालिका छात्रावास' एक बार फिर चर्चा में है। मामला बालिकाओं के आहार के लिए आने वाले सरकारी राशन से जुड़ा है, जहाँ राशन के कट्टों को छात्रावास में उतारने के बजाय सुनसान स्थान पर ले जाकर उनकी सरकारी सील खोलने का संदिग्ध मामला सामने आया है।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, शासकीय उचित मूल्य दुकान से छात्रावास के लिए गेहूं और चावल का कोटा पिकअप वाहन के जरिए रवाना किया गया था। चश्मदीदों के मुताबिक, वाहन ने छात्रावास में केवल चावल के कट्टे उतारे और गेहूं के सील बंद कट्टों को लेकर वह छात्रावास से करीब 2-3 किलोमीटर दूर झिरमिटी रोड स्थित एक मकान के आंगन में पहुँच गया।
वहाँ वाहन खड़ा कर गेहूं के कट्टों की सरकारी सिलाई (सील) खोली जा रही थी। इस बीच जब हलचल बढ़ी, तो छात्रावास अधीक्षक राजकुमारी सोनी के भाई ने मौके पर पहुँचकर स्थिति को संभाला और वाहन को वापस छात्रावास की ओर रवाना कर दिया।
जिम्मेदारों के बयानों में विरोधाभास
जब इस घटना को लेकर संबंधित पक्षों से बात की गई, तो चौंकाने वाले जवाब सामने आए:
वाहन चालक (मुन्ना): "मैडम ने कट्टे गाड़ी में डालकर अपने भाई के साथ जाने को कहा था। मुझे नहीं पता था कि राशन कहाँ और क्यों ले जाया जा रहा है।"
छात्रावास अधीक्षक (राजकुमारी सोनी): उन्होंने आरोपों को टालते हुए तर्क दिया कि गेहूं में 'घुन, मेंढक और छिपकली' जैसे जीव निकलते हैं, इसलिए गाड़ी को दूर भेजकर सफाई करवाई जा रही थी।
सेल्समैन (अर्चना दीक्षित): उचित मूल्य दुकान की सेल्समैन ने अधीक्षक के दावे को सिरे से नकारते हुए कहा कि सरकारी राशन के कट्टे पूरी तरह सिलाई बंद और पैक होते हैं, जिनमें बाहरी जीवों का घुसना मुमकिन नहीं है।
गंभीर सवाल: सफाई खेत में क्यों ?
स्थानीय लोगों और अभिभावकों में इस बात को लेकर आक्रोश है कि यदि राशन में कोई समस्या थी, तो उसे छात्रावास परिसर में ही जांचने के बजाय 3 किलोमीटर दूर एकांत में ले जाने की क्या आवश्यकता थी? सरकारी सील को गुपचुप तरीके से खोलना सीधे तौर पर राशन की कालाबाजारी या सामग्री में बदलाव की आशंका को जन्म देता है।
प्रशासन से मांग: क्या आदिवासी बालिकाओं के निवाले पर डाका डाला जा रहा है? वरिष्ठ अधिकारियों को इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए।
पत्रकार को झूठे केस में फंसाने की धमकी
इस घटना को जिस पत्रकार ने कवरेज किया है उसे अधीक्षिका द्वारा उसे डराने धमकाने और झूठे केस में फसाने की बात कही। देखते है शासन इस विषय पर क्या जांच करता है।

