मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर के लिंबोदी तालाब पहुंचकर किया श्रमदान

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इन्दौर। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा  कि जल हैं तो कल हैं। जल ही जीवन का आधार है। जल के बिना जीवन नीरस  है। हम प्राकृतिक जल स्रोतों का संरक्षण करें और आसपास  के क्षेत्र की साफ-सफाई करें। जल की एक-एक बूंद बचायें और जल को सहेजे।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह बात आज इंदौर के खंडवा रोड़ स्थित करीब 100 वर्ष से अधिक पुराने लिंबोदी तालाब के जीर्णोद्धार एवं सौंदर्यीकरण के कार्यों के अवलोकन के दौरान कही।  उन्होंने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत शहर के प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में  तालाबों , कुँओं एवं बावड़ियों का गहरीकरण एवं सफाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण के संकल्प को साकार करने के उद्देश्य से जल गंगा संवर्धन अभियान की शुरूआत गुड़ी-पड़वा से की थी। इस अभियान के तहत अभी तक प्रदेश में 2 लाख से अधिक जल संरक्षण एवं संवर्धन के कार्य किये गये।
मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत  इंदौर शहर में 10 से अधिक बड़े तालाबों तथा 250 से अधिक कुएँ एवं बावड़ियों के संरक्षण का कार्य किया गया है। स्वच्छता में देश और दुनिया में अपनी पहचान स्थापित कर चुका इंदौर अब जल संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि शहर के तालाबों एवं उससे जुड़े जल मार्गों (चैनलों) पर हुए अतिक्रमणों को हटाने के लिये विशेष अभियान संचालित किया जायेगा। इस अवसर पर मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने लिंबोदी तालाब के जीर्णोद्धार एवं सौदर्यीकरण के कार्यों का अवलोकन किया और श्रमदान किया। साथ ही नागरिकों को जल संरक्षण की शपथ भी दिलाई।
इस अवसर पर जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट, महापौर श्री पुष्‍यमित्र भार्गव, विधायक श्री मधु वर्मा, नगर निगम आयुक्‍त श्री  क्षितिज सिंघल, अपर आयुक्‍त श्री आशीष पाठक, श्री बबलू शर्मा सहित बड़ी संख्‍या में जनप्रतिनिधि, संबंधित अधिकारी एवं गणमान्‍य लोग उपस्थित थे।
कार्यक्रम में महापौर श्री भार्गव  ने कहा कि मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में शहर के तालाबों, कुँओं और बावड़ियों के संरक्षण, जीर्णोद्धार और विकास के व्यापक कार्य किये जा रहे है। उन्होंने कहा कि अमृत 2.0 के अंतर्गत तालाब संरक्षण एवं विकास हेतु विभिन्‍न कार्य किये जा रहे है, जिनमें  स्‍टोन बोल्‍डर पिचिंग, टो-वॉल निर्माण, बंधान पर रैलिंग, इको फ्रेंडली पाथवे, स्टोन बेंच आदि शामिल है। इन परियोजना की लागत करोड़ों में है। 
उल्लेखनीय है कि 100 वर्ष पूर्व  होलकर महाराज ने इंदौर के खंडवा रोड़ स्थित बिलावली तालाब का निर्माण करवाया था।

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