सामुदायिक मध्यस्थता मात्र एक वैकल्पिक विवाद निवारण प्रणाली नहीं, बल्कि एक मानवीय एवं सहभागी न्याय मॉडल है : श्री न्यायमूर्ति विवेक रूसिया

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म.प्र.राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण में एक दिवसीय सामुदायिक मध्यस्थता ओरिएंटेशन कार्यक्रम सम्पन्न
इन्दौर । मुख्य न्यायाधिपति, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय एवं मुख्य संरक्षक मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर श्री न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा के कुशल नेतृत्व एवं  प्रशासनिक न्यायाधिपति मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय एवं कार्यपालक अध्यक्ष मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण श्री न्यायमूर्ति विवेक रूसिया के मार्गदर्शन एवं गरिमामयी उपस्थिति में   12 फरवरी 2026 को म.प्र. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के सभागार में एक दिवसीय सामुदायिक मध्यस्थता ओरिएंटेशन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम विशेष रूप से पैरा लीगल वॉलंटियर्स, सामुदायिक मध्यस्थता स्वयंसेवकों तथा पहली बार विधि-विद्यार्थियों के लिए आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि  श्री न्यायमूर्ति विवेक रूसिया, प्रशासनिक न्यायाधिपति, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय एवं कार्यपालक अध्यक्ष, मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा ग्वालियर एवं भोपाल में नव-स्थापित 4 सामुदायिक मध्यस्थता केन्द्रों का ई-लोकार्पण किया गया।

            कार्यक्रम में श्री मनोज कुमार श्रीवास्तव, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, भोपाल श्री ललित किशोर गर्ग, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, ग्वालियर, सुश्री सुमन श्रीवास्तव, सदस्य सचिव, मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, श्री कौशलेंद्र विक्रम सिंह, कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी, भोपाल, श्री अरविन्द श्रीवास्तव, अतिरिक्त सचिव, मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, श्री शाहिद मोहम्मद, वरिष्ठ प्रशिक्षक, एम.सी.पी.सी. नई दिल्ली, न्यायिक अधिकारीगण, जिला विधिक सहायता अधिकारीगण, बार एसोसिएशन के प्रतिनिधि, पैरा लीगल वॉलंटियर्स, सामुदायिक मध्यस्थता स्वयंसेवक तथा बड़ी संख्या में विधि के विद्यार्थी उपस्थित रहे।

            कार्यक्रम की एक विशिष्ट एवं दूरदर्शी पहल के रूप में विधि विद्यार्थियों का औपचारिक रूप से सामुदायिक मध्यस्थता आंदोलन में समावेश किया गया। मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में पहली बार विद्यार्थियों को संरचित ओरिएंटेशन प्रदान किया गया, जिससे वे मध्यस्थता को एक सामाजिक रूप से उत्तरदायी एवं सहभागी न्याय मॉडल के रूप में समझ सकें। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को छात्र-संबंधी विवादों, पड़ोसी विवादों, लघु दीवानी विवादों एवं सामुदायिक स्तर के तनावों को वाद पूर्व स्तर पर ही संवाद एवं सहमति के माध्यम से सुलझाने के लिए सक्षम बनाना है, ताकि शैक्षणिक संस्थानों एवं समाज में संवाद और सहमति की संस्कृति को प्रोत्साहन मिले।

            अपने संबोधन में  श्री न्यायमूर्ति विवेक रूसिया ने व्यक्त किया कि सामुदायिक मध्यस्थता मात्र एक वैकल्पिक विवाद निवारण प्रणाली नहीं , बल्कि एक मानवीय एवं सहभागी न्याय मॉडल है, जिसका उद्देश्य विवादों को उनकी प्रारंभिक अवस्था में ही संवाद, समझ और सहमति के माध्यम से समाधान करना है। उन्होंने कहा कि समुदाय स्तर पर समय पर हस्तक्षेप से संबंधों का संरक्षण होता है, विरोधात्मक प्रवृत्तियाँ कम होती हैं तथा अनावश्यक वादों में उल्लेखनीय कमी आती है, जिससे सामाजिक सौहार्द और न्याय प्रणाली में जन-विश्वास सुदृढ़ होता है।

            न्यायमूर्ति श्री रूसिया ने जिला प्रशासन, पुलिस विभाग, विधिक सेवा संस्थाओं एवं नागरिक समाज के मध्य सक्रिय समन्वय की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि इन सभी हितधारकों के प्रभावी सहयोग से सामुदायिक मध्यस्थता जमीनी स्तर पर एक समेकित, सुलभ एवं उत्तरदायी विवाद निवारण मंच के रूप में कार्य कर सकती है।

            कार्यक्रम के दौरान इंदौर सामुदायिक मध्यस्थता मॉडल के विकास, उपलब्धियों एवं सामाजिक प्रभाव पर आधारित एक लघु वीडियो प्रदर्शित किया गया, जिसे व्यापक सराहना प्राप्त हुई। कलेक्टोरेट सामुदायिक मध्यस्थता केन्द्र, भोपाल का लोकार्पण श्री मनोज कुमार श्रीवास्तव, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, भोपाल एवं श्री कौशलेंद्र विक्रम सिंह, कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी, भोपाल की उपस्थिति में किया गया।

            ग्लोबल सामुदायिक मध्यस्थता केन्द्र, आकृति बिजनेस सेंटर, भोपाल का लोकार्पण श्रीमती कुमुदिनी पटेल, जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश, भोपाल एवं डॉ. (श्रीमती) प्रतिभा राजगोपाल, पूर्व प्राध्यापक, मध्यप्रदेश प्रशासन अकादमी एवं केन्द्र की निदेशक की उपस्थिति में किया गया। सामुदायिक मध्यस्थता केन्द्र, ग्वालियर का लोकार्पण प्रेस्टिज इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड रिसर्च, विधि विभाग, ग्वालियर में श्री ललित किशोर गर्ग, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, ग्वालियर एवं प्रोफेसर डॉ. राखी सिंह चौहान, प्रशिक्षित मध्यस्थ एवं प्रिंसिपल, विधि विभाग, प्रेस्टिज इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड रिसर्च, ग्वालियर की उपस्थिति में किया गया।

            यह उल्लेखनीय है कि इंदौर सामुदायिक मध्यस्थता मॉडल, जिसकी शुरुआत श्री न्यायमूर्ति विवेक रूसिया के प्रशासनिक न्यायाधिपति, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, खंडपीठ इंदौर के कार्यकाल में हुई थी, आज सामुदायिक आधारित विवाद निवारण का एक अग्रणी एवं प्रशंसित मॉडल बन चुका है। जिला प्रशासन एवं पुलिस विभाग के सक्रिय सहयोग तथा संस्थागत संरचना के माध्यम से इस मॉडल ने प्रारंभिक स्तर पर ही विवादों के समाधान में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है। वर्तमान में, मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यपालक अध्यक्ष के रूप में उनके नेतृत्व में इस मॉडल का राज्यव्यापी विस्तार, विशेषकर भोपाल एवं ग्वालियर में, सामुदायिक मध्यस्थता के संस्थानीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। कार्यक्रम का संचालन श्री अनिरुद्ध जैन, उप सचिव, मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा किया गया तथा समापन पर सुश्री सुमन श्रीवास्तव, सदस्य सचिव द्वारा आभार प्रदर्शन किया गया।

            एक दिवसीय अभिमुखीकरण कार्यक्रम में श्री शाहिद मोहम्मद, वरिष्ठ प्रशिक्षक, एम.सी. पी.सी., भारत के सर्वोच्च न्यायालय, नई दिल्ली द्वारा एक संवादात्मक सत्र आयोजित किया गया। उन्होंने प्रतिभागियों को मध्यस्थता के मूल सिद्धांतों, संरचित संवाद के महत्व, तटस्थता एवं नैतिकता की भूमिका तथा प्रभावी संप्रेषण के माध्यम से विवादों के सौहार्दपूर्ण समाधान के बारे में मार्गदर्शन प्रदान किया। इस अभिमुखीकरण का उद्देश्य पैरा लीगल वॉलंटियर्स, सामुदायिक मध्यस्थता स्वयंसेवकों एवं विधि विद्यार्थियों को सामुदायिक मध्यस्थता की अवधारणा एवं संरचना के प्रति संवेदनशील बनाना तथा उन्हें जमीनी स्तर पर सहमति आधारित विवाद समाधान को प्रोत्साहित करने हेतु आवश्यक वैचारिक एवं व्यावहारिक समझ प्रदान करना था।

            मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण राज्य में सहमति, सहयोग एवं सामुदायिक सौहार्द की संस्कृति को सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि न्याय केवल प्रदान ही न किया जाए, बल्कि वह सुलभ, मानवीय एवं सहभागी रूप में प्रत्येक नागरिक द्वारा अनुभव भी किया जा सके।

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