नल-जल योजना में भ्रष्टाचार का खुलासा, पत्रकार को धमकी, पैसे की पेशकश और सरकारी वाहन से दबाव!
मध्यप्रदेश सरकार द्वारा ग्रामीणों को पेयजल उपलब्ध कराने हेतु चलाई जा रही "नल-जल योजना" और "जल जीवन मिशन" अब भ्रष्टाचार का बड़ा अड्डा बनती जा रही हैं। देवास जिले के कन्नौद क्षेत्र में एक स्वतंत्र पत्रकार द्वारा जब योजना में भारी गड़बड़ियों और ग्रामीणों को पानी न मिलने की खबर प्रकाशित की गई, तो पीएचई विभाग के अधिकारी बौखला गए।
इस खबर के प्रसारण के बाद पत्रकार को कन्नौद एसडीएम कार्यालय परिसर में बुलाया गया, जहाँ पीएचई विभाग की उपयंत्री छाया दुबे, उनके भाई और अन्य विभागीय कर्मी मौजूद थे।
वे MP09DT7219 नंबर की शासकीय बोलेरो गाड़ी में आए थे, जिस पर "एसडीओ" लिखा हुआ था। यह वाहन पीएचई विभाग से संबंधित था और इसी वाहन में बैठकर दबाव बनाने की कोशिश की गई।
पत्रकार ने जब पैसे लेने से साफ इनकार किया और अपनी ईमानदार पत्रकारिता की बात कही, तो उपयंत्री के भाई ने किसी को फोन लगाकर पत्रकार की बात कराई। फोन पर साफ कहा गया:
“आपका पैसा भेज दिया गया है।”
अब सवाल उठता है –
यह पैसा आखिर किस बात के लिए दिया जा रहा है?
क्या ये रिश्वत है? दबाव है? या पत्रकार की ईमानदारी को खरीदने की कोशिश?
पत्रकार ने पहले ही पुलिस थाना कन्नौद में एक लिखित आवेदन देकर अपनी सुरक्षा की चिंता जताई थी। उन्होंने स्पष्ट किया है कि पी एच ई विभाग के कुछ अधिकारी उन्हें झूठे केस में फँसाने की साजिश कर सकते हैं ताकि वे सच्चाई सामने लाने से डर जाएँ।
इस पूरी बातचीत का वीडियो भी मौजूद है, जिसमें उपयंत्री छाया दुबे स्पष्ट कहती हैं:
“घोटाला हुआ है, और सबसे पहले उपयंत्री ही फँसता है।”
यह बयान खुद एक उच्च पदस्थ अधिकारी द्वारा घोटाले की अप्रत्यक्ष स्वीकारोक्ति है।
मुख्य तथ्य:
पी एच ई अधिकारी और उनके भाई द्वारा पत्रकार को धमकी, चेतावनी और पैसे का प्रस्ताव
शासकीय वाहन (MP09DT7219) से दबाव बनाया गया
पत्रकार का मोबाइल छीनने की कोशिश, और सीसीटीवी से पुष्टि संभव
पुलिस को पहले से सूचना, पत्रकार को फँसाने की साजिश की आशंका
नल-जल योजना में भारी भ्रष्टाचार के सबूत उजागर
अब ये सवाल जनता और शासन के सामने है:
क्या पत्रकार को धमकाने और रिश्वत की पेशकश करने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई?
क्या पीएचई विभाग की गहराई तक निष्पक्ष जांच होगी?
क्या सरकारी योजनाओं को भ्रष्टाचार मुक्त बनाया जाएगा?
क्या पीएचई विभाग की गहराई तक जांच होगी?
और क्या ग्रामीणों को उनका हक – साफ़ पानी – मिलेगा?
जब तक इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच नहीं होती, तब तक यह कहा जा सकता है कि यह सिर्फ योजना का नहीं, बल्कि जनता के भरोसे का भी घोटाला है।
खबर के सामने आने के बाद यह साफ होता जा रहा है कि पीएचई विभाग में गहरे स्तर पर भ्रष्टाचार फैला है। यदि जांच निष्पक्ष रूप से की जाती है, तो कई अधिकारी जेल की सलाखों के पीछे जा सकते हैं।
PHE विभाग की कुर्सी पर जमें भ्रष्टाचार के दलाल!"
"देवास में 'कागज़ी पानी', असली में सूखा लूट का खुलासा
देवास में PHE विभाग की सच्चाई
PHE विभाग के कई अधिकारी वर्षों से एक ही पद पर जमे हैं। ट्रांसफर होने के बावजूद, जुगाड़ लगाकर वापस लौट आते हैं। मंशा साफ है कुर्सी नहीं छोड़ेंगे ताकि घोटाले छुपे रहें और मोटी रकम मिलती रहे।
गांव वालों को पानी मिले या न मिले, लेकिन अधिकारियों की जेबें जरूर भर रही हैं।अब तो हाल ऐसा है कि दाल में कुछ काला नहीं, पूरी दाल ही काली लगती है।अगर जांच हुई और परतें खुलीं, तो बड़े-बड़े अधिकारी जेल की हवा खा सकते हैं।
जनप्रतिनिधियों और जनता की सीधी मांग है वर्षों से जमे अधिकारियों को तत्काल हटाया जाए और जल जीवन मिशन की स्वतंत्र जांच हो।

