दशकों का प्रदूषण दूर: यूपी में अविरल और निर्मल हुई मां गंगा

  • Share on :

दिल्ली। दशकों से प्रदूषण की मार झेल रही गंगा उत्तर प्रदेश में अब नई इबारत लिख रही है। नमामि गंगे अभियान के तहत हुए भारी निवेश और आधुनिक तकनीक के समन्वय से गंगा की मुख्यधारा अब पूरी तरह स्नान-योग्य श्रेणी में आ चुकी है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की ताजा रिपोर्ट ने इस ऐतिहासिक सुधार पर वैज्ञानिक मुहर लगा दी है।
रिपोर्ट के अनुसार, 2018 तक कन्नौज से वाराणसी तक का एक बड़ा हिस्सा प्राथमिकता-चार नामक खतरनाक प्रदूषित श्रेणी में रखा गया था। आज वह पूरी पट्टी साफ हो चुकी है। अब प्रदूषण केवल फर्रुखाबाद, डालमऊ और मिर्जापुर के तीन बेहद छोटे हिस्सों तक सिमट गया है, जिन्हें न्यूनतम प्रदूषण (प्राथमिकता-पांच) की श्रेणी में रखा गया है।
उत्तर प्रदेश में गंगा का प्रवाह सबसे लंबा होने के कारण चुनौती बड़ी थी। इससे निपटने के लिए 16,201 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए। राज्य की 80 परियोजनाओं में से 53 पूरी हो चुकी हैं, जिससे 1,520 एमएलडी शोधन क्षमता चालू है
वाराणसी, कानपुर और प्रयागराज जैसे 11 बड़े शहरों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट मिशन मोड में काम कर रहे हैं
अकेले वाराणसी और आगरा में लाखों नागरिकों के गंदे पानी का शोधन हो रहा है, जिससे गंगा में सीधे गिरने वाला कचरा रुक गया है
अगला लक्ष्य गंगा को शून्य प्रदूषण के स्तर पर ले जाना है। बचे हुए तीन छोटे हिस्सों के लिए भी कार्य योजना तैयार है। एनएमसीजी के उप महानिदेशक नलिन कुमार श्रीवास्तव के अनुसार, बीओडी मानकों में सुधार यह साबित करता है कि दशकों बाद गंगा की जल गुणवत्ता में वास्तविक और वैज्ञानिक सुधार हुआ है। 

Latest News

Everyday news at your fingertips Try Ranjeet Times E-Paper