जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण स्वरूप में सजे धूमेश्वर महादेव, दिव्य दर्शन को उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
धूमेश्वर धाम में अद्भुत श्रृंगार आरती ने रचा आध्यात्मिक दृश्य, महामंडलेश्वर अनिरुद्ध वन जी महाराज के सानिध्य में भक्तों ने किए अलौकिक दर्शन
शिवपुरी/पवाया। तीन जिलों की सीमा के मध्य स्थित प्राचीन सिद्धपीठ श्री धूमेश्वर धाम पर श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पावन पर्व शुक्रवार, 4 सितंबर को भक्ति, आस्था और आध्यात्मिक उल्लास के बीच मनाया गया। संध्या काल में हुई श्रृंगार आरती के दौरान धूमेश्वर महादेव का भगवान श्रीकृष्ण के मनोहारी स्वरूप में किया गया श्रृंगार श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।
श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर अनिरुद्ध वन जी महाराज के सानिध्य में बाबा भोलेनाथ का यह अद्भुत स्वरूप सामने आया तो मंदिर परिसर में उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो शिव और कृष्ण की भक्ति एक ही ज्योति में समाहित हो गई हो। भक्तों के बीच यह भाव मुखर रहा—“जग में सुंदर हैं दो नाम, चाहे कृष्ण कहो या राम।”
धूमेश्वर महादेव के श्रीकृष्ण स्वरूप के दिव्य दर्शन के लिए विभिन्न प्रदेशों से आए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। जिसने भी इस अलौकिक श्रृंगार के दर्शन किए, उसकी दृष्टि कुछ क्षणों के लिए वहीं ठहर गई। मंदिर परिसर में हर ओर जय श्रीकृष्ण और हर-हर महादेव के जयघोष गूंजते रहे।
संत की तपस्या से तपोभूमि बनी धूमेश्वर धाम
धूमेश्वर धाम की आध्यात्मिक आभा यहां विराजमान संत एवं पीठाधीश्वर श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर अनिरुद्ध वन जी महाराज की साधना और तपस्या से और अधिक गहन होती दिखाई देती है। प्रकृति की गोद में बसे इस दिव्य शिवालय में आने वाले श्रद्धालु सांसारिक कोलाहल से दूर शांति और आत्मिक आनंद की अनुभूति करते हैं।
धाम के समीप कल-कल बहती जलधारा इसकी प्राकृतिक सुंदरता को और भी मनोहारी बना देती है। श्रद्धालुओं के लिए यह स्थान केवल पूजा-अर्चना का केंद्र नहीं, बल्कि आत्मिक शांति और आध्यात्मिक अनुभूति की भूमि बन चुका है।
जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण के रूप में सजे धूमेश्वर महादेव का यह मनोहारी स्वरूप श्रद्धालुओं के लिए लंबे समय तक स्मरणीय रहने वाला आध्यात्मिक दृश्य बन गया।
शिवपुरी जिला ब्यूरो चीफ
हेमंत भार्गव

