जटिल मोतियाबिंद सर्जरी के पश्चात लेंस प्रत्यारोपण पर शोध के लिए डॉ. टीना अग्रवाल को मिला राष्ट्रीय सम्मान

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स्कूल ऑफ एक्सीलेंस फॉर आई, महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज इंदौर की प्रोफेसर एवं नेत्र सर्जन डॉ. टीना अग्रवाल ने नेत्र चिकित्सा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। इन्हें भारत के प्रतिष्ठित नेत्र विज्ञान जर्नल इंडियन जर्नल ऑफ ऑप्थैल्मोलॉजी में प्रकाशित उनके शोधपत्र के लिए “बेस्ट ओरिजिनल आर्टिकल – कैटरैक्ट” पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
  स्कूल ऑफ एक्सीलेंस फॉर आई , एमजीएम मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक डॉ. डी.के. शर्मा ने बताया कि यह सम्मान 12 से 15 मार्च 2026 के मध्य जयपुर में आयोजित अखिल भारतीय नेत्र विज्ञान सोसायटी के वार्षिक सम्मेलन में प्रदान किया गया। इस शोध कार्य में उनके साथ डॉ. महेश अग्रवाल, डॉ. साक्षी तिवारी तथा सांख्यिकी विशेषज्ञ श्री दुर्गेश शुक्ला सह-लेखक रहे, जिन्हें भी इस उपलब्धि के लिए सम्मानित किया गया।
     यह शोध जटिल मोतियाबिंद सर्जरी के बाद उन मरीजों में लेंस प्रत्यारोपण की नई तकनीक पर आधारित है, जिनमें ऑपरेशन के दौरान सामान्य रूप से कृत्रिम लेंस प्रत्यारोपण संभव नहीं हो पाता है।
मरीजों को मिलेगा बेहतर लाभ
       प्रोफेसर डॉ. टीना अग्रवाल ने बताया कि इस तकनीक के माध्यम से ऐसे मरीजों में, जिनमें पहली सर्जरी के समय लेंस प्रत्यारोपण नहीं हो पाया, बाद में भी सफलतापूर्वक लेंस प्रत्यारोपण किया जा सकता है। इससे मरीजों की दृष्टि को पुनः बेहतर बनाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि यह तकनीक अपेक्षाकृत कम खर्चीली है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को भी इसका लाभ मिल सकेगा।
सफल परिणाम और विशेषज्ञों की सराहना
     डॉ. अग्रवाल द्वारा पिछले कुछ वर्षों में स्कूल ऑफ एक्सीलेंस फॉर आई में इस तकनीक से कई सफल ऑपरेशन किए गए हैं, जिनके परिणाम अत्यंत उत्साहजनक रहे हैं। नेत्र चिकित्सा विशेषज्ञों ने इस उपलब्धि को देश के लिए गर्व का विषय बताया है और कहा है कि इस शोध से जटिल मोतियाबिंद सर्जरी के बाद उपचार के नए विकल्प विकसित होंगे।
   इस उपलब्धि पर अधिष्ठाता एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. अरविंद घनघोरिया तथा अस्पताल अधीक्षक डॉ. डी.के. शर्मा ने डॉ. टीना अग्रवाल को बधाई देते हुए उनके कार्य की सराहना की है।

 

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