बूंद-बूंद से सागर
रणजीत टाइम्स – कहानी का झरोखा
एक छोटे से गाँव में एक वृद्ध व्यक्ति रोज़ सुबह नदी किनारे जाता था। उसके हाथ में दो घड़े होते थे। एक घड़ा बिल्कुल सही था, जबकि दूसरे में एक छोटा सा छेद था।
घर लौटते-लौटते छेद वाले घड़े का आधा पानी रास्ते में ही गिर जाता।
वह घड़ा हमेशा दुखी रहता और सोचता, "मैं किसी काम का नहीं हूँ।"
एक दिन उसने अपने मालिक से कहा,
"मुझमें कमी है, मैं आपका पूरा काम नहीं कर पाता।"
वृद्ध मुस्कुराए और बोले,
"क्या तुमने रास्ते के उस किनारे को देखा है जहाँ से तुम्हारा पानी टपकता है?"
घड़े ने देखा—वहाँ रंग-बिरंगे फूल खिले हुए थे।
वृद्ध बोले,
"मैं तुम्हारी कमी जानता था। इसलिए मैंने उसी तरफ फूलों के बीज बो दिए थे। तुम्हारे टपकते पानी ने उन्हें सींचा और आज इन्हीं फूलों से मेरा घर महकता है।"
घड़े की आँखें नम हो गईं। उसे समझ आ गया कि कभी-कभी हमारी कमियाँ भी किसी के जीवन में खुशियाँ बिखेर सकती हैं।
सीख
हर इंसान में कोई न कोई कमी होती है, लेकिन वही कमी सही दिशा और सही सोच के साथ किसी की सबसे बड़ी ताकत बन सकती है।
"अपनी कमियों से मत घबराइए, उन्हें अपनी पहचान और दूसरों के लिए उपयोगी बनने का अवसर बनाइए।"
रणजीत टाइम्स | कहानी का झरोखा

