उर्वरक वितरण व्यवस्था, 1 जनवरी 2026 से लागू हुई "ई-विकास प्रणाली

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धार में दो दिवसीय जिला स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न।
दिलीप पाटीदार 
धार मध्य प्रदेश शासन द्वारा प्रदेश की कृषि व्यवस्था को डिजिटल, पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए 1 जनवरी 2026 से "उर्वरक वितरण हेतु ई-विकास प्रणाली को प्रदेशभर में लागू कर दिया गया है। इस नई व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने हेतु श्री ज्ञानसिंह मोहनिया, उप संचालक, किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग, जिला धार के निर्देशन में दो दिवसीय जिला स्तरीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया।
उपसंचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग ने बताया कि प्रशिक्षण शिविर के प्रथम दिवस जिले की शासकीय एवं सहकारी संस्थाओं के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को ई-विकास प्रणाली के तकनीकी एवं प्रशासनिक पहलुओं का प्रशिक्षण दिया गया। वहीं द्वितीय दिवस जिले के निजी पंजीकृत फर्टिलाइज़र विक्रेताओं को नई उर्वरक वितरण प्रणाली के तहत कार्य करने की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।
अधिकारियों ने बताया कि ई-विकास प्रणाली शासन की एक दूरदर्शी योजना है, जिसका उद्देश्य उर्वरक वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता लाना, किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराना तथा कालाबाजारी एवं अनियमितताओं पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है।
 पोर्टल की गहन तकनीकी ट्रेनिंग कृषि विभाग के श्री संतोष पाटीदार, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी द्वारा ई-विकास पोर्टल की विस्तृत एवं व्यावहारिक तकनीकी ट्रेनिंग दी गई। प्रशिक्षण के दौरान विक्रेताओं एवं अधिकारियों को उर्वरकों की ऑनलाइन स्टॉक एंट्री, बिक्री प्रक्रिया, किसान आधार / पहचान सत्यापन, रियल-टाइम डेटा अपलोड, रिपोर्ट जनरेट एवं निगरानी प्रणाली की विस्तार से जानकारी दी गई। साथ ही संभावित तकनीकी समस्याओं एवं उनके समाधान पर भी चर्चा की गई।
 किसानों को मिलेगा सीधा लाभ-अधिकारियों ने बताया कि ई-विकास प्रणाली लागू होने से जिले के किसानों को उचित दर पर सही मात्रा में उर्वरक, समय पर उपलब्ध होगा। डिजिटल निगरानी व्यवस्था से यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि उर्वरक केवल पात्र किसानों को ही वितरित हो तथा किसी भी प्रकार की फर्जी बिक्री या अवैध भंडारण पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।
अनिवार्य होगा नई व्यवस्था का पालन-प्रशिक्षण में स्पष्ट किया गया कि ई-विकास प्रणाली का पालन सभी शासकीय संस्थाओं एवं उर्वरक विक्रेताओं के लिए अनिवार्य रहेगा। किसी भी प्रकार की लापरवाही, गलत प्रविष्टि या नियम उल्लंघन की स्थिति में संबंधित के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
कार्यक्रम के समापन पर अधिकारियों ने सभी प्रतिभागियों से शासन की इस डिजिटल पहल को सफल बनाने में सक्रिय सहयोग करने की अपील की तथा कहा कि यह प्रणाली किसानों के हित में एक मील का पत्थर साबित होगी।
    प्रशिक्षण कार्यक्रम श्री डी.एस. मोर्य, सहायक संचालक कृषि तथा श्रीमती संगीता तोमर, सहायक संचालक कृषि, श्री संतोष पाटीदार, व.कृ.वि.अ. की उपस्थिति में हुआ संपन्न।

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