विकास के नाम पर उजड़ते जंगल! देश में कितने पेड़ काटे गए, केंद्र के पास नहीं है पूरा हिसाब

  • Share on :

पांच वर्षों में 92 हजार हेक्टेयर से अधिक वन भूमि के गैर-वन उपयोग को मंजूरी, सड़क, रेलवे, खनन और बिजली परियोजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर वन भूमि प्रभावित

विशेष रिपोर्ट | दैनिक रणजीत टाइम्स
नई दिल्ली/इंदौर। देश में विकास के नाम पर सड़कें, हाईवे, रेलवे लाइनें, बांध और औद्योगिक परियोजनाएं तेजी से आगे बढ़ रही हैं। लेकिन इन परियोजनाओं के लिए आखिर कितने पेड़ों की बलि दी गई? इस सवाल का एक समग्र राष्ट्रीय आंकड़ा केंद्र सरकार के पास उपलब्ध नहीं है।

केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा 5 फरवरी 2026 को राज्यसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, वित्त वर्ष 2020-21 से 2024-25 के बीच 6,188 प्रस्तावों के तहत 92,062.85 हेक्टेयर वन भूमि को गैर-वन उपयोग के लिए पूर्व मंजूरी दी गई।

सरकारी आंकड़े क्या कहते हैं?
वित्त वर्ष 2024-25 में ही 1,710 प्रस्तावों के अंतर्गत 17,938.85 हेक्टेयर वन भूमि के उपयोग को मंजूरी दी गई।
पांच वर्षों में विभिन्न परियोजनाओं के लिए स्वीकृत वन भूमि में शामिल हैं:

सड़क परियोजनाएं – 21,693.73 हेक्टेयर
खनन परियोजनाएं – 18,912.77 हेक्टेयर
बिजली ट्रांसमिशन लाइनें – 12,725.63 हेक्टेयर
रेलवे परियोजनाएं – 5,956.96 हेक्टेयर

ये वन भूमि उपयोग की स्वीकृतियां हैं, काटे गए पेड़ों की वास्तविक संख्या नहीं।

मध्य प्रदेश में 12,404 पेड़ों की कटाई

केन-बेतवा लिंक परियोजना के संबंध में जुलाई 2025 में केंद्र सरकार ने बताया था कि दौधन बांध एवं संबंधित निर्माण कार्यों के लिए लगभग 17,101 पेड़ काटने हेतु चिह्नित किए गए थे। इनमें से पन्ना टाइगर रिजर्व क्षेत्र में 12,404 पेड़ काटे जा चुके थे।

 विकास जरूरी, लेकिन पर्यावरण की कीमत पर कब तक?

सवाल यह नहीं है कि देश में विकास होना चाहिए या नहीं। सवाल यह है कि विकास योजनाओं में पेड़ों और जंगलों के संरक्षण को कितनी प्राथमिकता दी जा रही है।

जब किसी परियोजना के लिए हजारों पेड़ काटे जाते हैं, तो उसके बदले कितने पौधे लगाए गए? कितने पौधे जीवित बचे? इसकी निगरानी और सार्वजनिक जवाबदेही भी उतनी ही जरूरी है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब देशभर में काटे गए पेड़ों की एकीकृत संख्या उपलब्ध नहीं है, तो आम नागरिक पर्यावरणीय नुकसान का पूरा हिसाब कैसे जान पाएगा?

सरकार को परियोजनावार पेड़ों की कटाई, प्रतिपूरक वृक्षारोपण और पौधों के जीवित रहने की जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए।

विकास भी जरूरी है, लेकिन हरियाली बचाना भी हमारी जिम्मेदारी है।
— दैनिक रणजीत टाइम्स
जनहित में विशेष रिपोर्ट

Latest News

Everyday news at your fingertips Try Ranjeet Times E-Paper