श्री राधाकृष्ण द्वारा स्थापित आह्लाद को अनुभव करने का पर्व है होली : श्री माताजी

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होली का पर्व भारतीय संस्कृति के प्रमुख पर्वों में से एक है उल्लास, उमंग, प्रेम, सौहार्द, एकरूपता और नकारात्मकता के विनाश का पर्व है होली। फाल्गुनी पूर्णिमा के दिन होलिका दहन व अगले दिन रंगोत्सव का आयोजन होता है। होलिका, प्रहलाद की कथा से हम सभी परिचित हैं। यह कथा हमारी इस धारणा को कि, परम पिता के प्रति संपूर्ण समर्पण के पश्चात कोई बुराई आपका बाल भी बांका नहीं कर सकती दृढ़ करती है। होली का पर्व आज भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग है जिसका प्रारंभ यदि हम देखें तो श्रीकृष्ण के कालखंड में हुआ प्रतीत होता है। यह आनंद उत्सव है भगवान श्री कृष्ण का स्वरूप आनंद प्रदान करने वाला है तथा उनकी शक्ति राधारानी आह्लाददायनी स्वरूप में हैं। सहजयोग संस्थापिका श्री माताजी निर्मला देवी जी ने इस महोत्सव के प्रारंभ की अत्यंत सटीक व्याख्या अपनी अमृतवाणी में की है,
     उस जमाने में कंडीशनिंग की वजह से लोग बहुत गंभीरता से धर्म करने लगे उनका आह्लाद, उनका उल्लास सब खत्म हो गया। राधा जी की जो मुख्य शक्ति थी वह थी आह्लाद  इसलिए उन्होंने होली का त्योहार बनाया, उन्होंने रंग खेलना शुरू किया रंग भी जो है वह देवी के रंग है सारे सातों चक्रों के रंग से होली खेली जाती है सारे चक्रों के रंग ही अपने पर उड़ेल लो खेलो उल्लास और आनंद में गंभीरतापूर्वक बैठने की क्या जरूरत है? 
 आनंद के साथ साथ होली सामाजिक एकरूपता का भी प्रतीक है। सभी प्रकार के भेदभाव मिटाकर लोग प्रेम के रंग में सराबोर हो जाते हैं। इस तरह से एक समाजवाद और एक सामाजिक खुशी का त्यौहार अपने देश में होता है।
 होली के पर्व के मूल तत्व के बारे में श्री माताजी वर्णन करते हुए कहती हैं कि,
   होली का तत्व जानना चाहिए होली में अपने अंदर की गंदगी और दोष जलाकर हृदय शुद्ध करते ही जो प्रेम उमड़ आता है उसके चैतन्य से व सब तरफ चैतन्य के रंगों की बौछार होने से सब लोग मस्त हो जाते हैं। इसलिए होली में सर्वप्रथम अपने अंदर की बाधाएं जलानी चाहिए। ...स्वच्छ हो जाओ मुक्ति में जो आनंद आ रहा है इसमें नाचो - गाओ और सब को आनंदित करो। सहजयोग की होली श्री कृष्ण की होली है। 
      इस फागोत्सव चैतन्य के रंगों में सराबोर होने के लिए श्री माता जी के सानिध्य में कुंडलिनी जागरण द्वारा अपना आत्म साक्षात्कार प्राप्त कर आत्मानंद का अनुभव अवश्य प्राप्त करें। स्वयं को पाने का आनंद ही वास्तविक आनंद होता है।
सहजयोग से संबंधित  जानकारी निम्न साधनों से प्राप्त कर सकते हैं। यह पूर्णतया निशुल्क है। टोल फ्री नं – 1800 2700 800, यूट्यूब चैनल लर्निंग सहजयोगा।

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