वैवाहिक विवाद में महत्वपूर्ण न्यायिक आदेश : एडवोकेट रजत सोंधी ने रखा पक्ष, पत्नी को प्रकरण वापस लेने की मिली अनुमति
हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13(1) के तहत दायर याचिका निरस्त
रणजीत टाइम्स | इंदौर
इंदौर। पति-पत्नी के वैवाहिक विवाद से जुड़े एक मामले में इंदौर जिला न्यायालय ने महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। प्रकरण HM 53/2024 की सुनवाई अठारहवें जिला न्यायाधीश एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश रूपेश नाईक की अदालत में हुई। न्यायालय ने 21 अगस्त 2026 को पत्नी की ओर से प्रस्तुत आवेदन स्वीकार करते हुए हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13(1) के तहत दायर विवाह-विच्छेद की याचिका वापस लेने की अनुमति प्रदान की।
इस मामले में एडवोकेट रजत सोंधी का नाम प्रमुख रूप से सामने आया है। वादिनी अनारबाई की ओर से न्यायालय के समक्ष यह पक्ष रखा गया कि विवाह हिंदू रीति-रिवाज से हुआ था, लेकिन पक्षकारों के विवाह एवं वैवाहिक विवाद उनकी प्रचलित रीति-रिवाज और प्रथाओं से नियंत्रित होते हैं। इसी आधार पर वर्तमान कार्यवाही आगे नहीं चलाने और सक्षम कानून के अंतर्गत उचित न्यायालय में नई कार्यवाही प्रस्तुत करने की स्वतंत्रता मांगी गई।
दस्तावेज के अनुसार वादिनी अनारबाई ने प्रतिवादी रवि गोहिया के विरुद्ध विवाह-विच्छेद की याचिका प्रस्तुत की थी। मूल याचिका में दोनों का विवाह 16 मई 2017 को हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार होना बताया गया था।
न्यायालय ने आवेदन पर सुनवाई के बाद प्रकरण वापस लेने की अनुमति प्रदान कर दी। आदेश में वादिनी को भविष्य में उचित कानून एवं सक्षम न्यायालय के समक्ष नई याचिका अथवा कार्यवाही प्रस्तुत करने की स्वतंत्रता दी गई।
अदालत ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13(1) के तहत प्रस्तुत प्रकरण को वापस लिए जाने के कारण निरस्त कर दिया और दोनों पक्षों को अपना-अपना वाद व्यय स्वयं वहन करने का आदेश दिया।
एडवोकेट रजत सोंधी की दलीलों के बाद महत्वपूर्ण आदेश
इस आदेश को वैवाहिक कानून और अलग-अलग समुदायों में प्रचलित रीति-रिवाजों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
रणजीत टाइम्स

