सहजयोग में कुंडलिनी जागरण द्वारा जीवन को सार्थक दिशा प्राप्त होती है

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लोगों को समय और जीवन बर्बाद करते देख मन में बहुत चिंता सी होती है किस तरह लोग अपना समय व्यर्थ, कर रहे हैं। क्या केवल खाना-पीना, मौज - मस्ती करना ही जीवन है ? क्या केवल मंदिर जाना, पूजा-पाठ, करना तीर्थ करना ही धर्म का सार है देखिए आपको क्या लगता है? सोचकर देखिए आखिर जीवन क्या है? जीवन  का उद्देश्य क्या है क्या आप यूं ही जीवन व्यतीत करते- करते  पंचतत्व में विलीन होना चाहते हैं? सोचिए आप किस तरह अपना जीवन व्यतीत करना चाहते हैं। जरा, सोचिए ऐसी  कौनसी  शक्ति है, जो सारे संसार को चालना देती है कौनसी सी शक्ति है जो आपको चला रही है? आपका हृदय कौन चला रहा है ? आपकी श्वासों का नियंत्रण कैसे हो रहा है? कौन सी शक्ति है, जो शरीर को स्वस्थ रखती है? सोचकर देखिए संसार में इतने जीवंत कार्य किस प्रकार हो रहे हैं?, अलग-अलग फूलों का खिलना, पेड़ों का बढ़ना, जन्म-मरण आदि । कभी सोचा है, ईश्वर कौन है? यदि आप ईश्वर की शक्ति महसूस करना चाहते हैं तो स्वयं का आत्म परीक्षण कर अपनी शक्ति से अपनी आत्मा से साक्षात्कार कीजिए जो केवल कुंडलिनी जागरण से  ही संभव है। सहजयोग में कुंडलिनी जागरण के पश्चात् आप उस परमेश्वरी शक्ति से एकाकार हो जाते हैं जो इस ब्रह्माण्ड को चला रही है। इसके लिए आपको अंतस्थ होना होगा ध्यान के माध्यम से आप इस स्थिति को बड़ी सहजता और सरलता से प्राप्त कर सकते हैं। ध्यान के माध्यम से आपकी शक्ति जागृत होती है जो  धीरे-धीरे सूक्ष्म चक्रों से गुजरती है और उन्हें प्लावित करती है। इस शक्ति के माध्यम से आपका शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक तथा आध्यात्मिक हर स्तर  का विकास होता है। हम वर्तमान में जीना सीखते हैं। भूत, भविष्य की बेड़ियों से मुक्त हो कर साक्षी स्वरूप हो जाते हैं। आनंद के उस शिखर पर स्थापित हो जाते हैं जहां मात्र निरानंद, शांति और सुकून होता है। सुख-दुख, जीवन - मरण के बंधन छूट जाते हैं   तथा उस शक्ति से एकाकार हो जाते हैं जिसने हमें बनाया है। सहजयोग ध्यान के माध्यम से अपनी शक्तियों की अनुभूति प्राप्त करने हेतु अधिक जानकारी टोल फ्री नंबर 1800 2700 800 अथवा यूट्यूब चैनल  लर्निंग सहजयोगा से प्राप्त कर सकते है।

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