टीबी के खिलाफ जंग में भारत ने पेश की मिसाल, वैश्विक औसत से दोगुनी रफ्तार से मिली कामयाबी
नई दिल्ली. थिएटर में फिल्म शुरू होने से पहले आपने एक विज्ञापन कभी ना कभी जरूर देखा होगा, जिसमें अंधेरे कमरे में एक आदमी लगातार आती खांसने से परेशान होता दिखता है और जैसे ही वो रुमाल देखता है तो उसपर खून के सुर्ख लाल धब्बे होते हैं. ये विज्ञापन देख भारतीय दर्शकों को एक ऐसी बीमारी के बारे में जागरुक किया जाता था, जिसे कभी लाइलाज माना जाता है. ये बीमारी एक ऐसा खामोश दुश्मन है, जो फेफड़ों के रास्ते शरीर में एंट्री करता है और धीरे-धीरे इंसान को अंदर से खोखला कर देता है. ये बीमारी ट्यूबरक्लोसिस (TB) थी.
लेकिन रुकिए! कहानी में थोड़ा ट्विस्ट है. किसी जमाने में जिस ट्यूबरक्लोसिस से भारत में रहते लोग डरा करते हैं, लेकिन अब इस लाइलाज बीमारी को इलाज से ठीक किया जा सकता है. टीबी भारतीय के सामने घुटने टेक रही है. आज 24 मार्च 2026 को पूरी दुनिया वर्ल्ड टीबी डे मना रही है. इस खास मौके पर आज हम आपको बताएंगे कि आखिर ये बीमारी होती क्या है, इसके लक्षण क्या हैं और इसे कैसे ठीक किया जा सकता है.
टीबी के खिलाफ लड़ाई में भारत साल दर साल बड़ी कामयाबी हासिल कर रहा है. साल 2015 में जहां प्रति लाख 237 केस सामने आते थे, वहीं 2024 में ये घटकर 187 रह गए, यानी करीब 21% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. खास बात ये है कि ये गिरावट वैश्विक औसत से लगभग दोगुनी है, जिससे भारत ने दुनिया के सामने एक मजबूत उदाहरण पेश किया है.
टीवी के सिर्फ मामलों में ही कमी ही नहीं आई है, बल्कि इलाज के मोर्चे पर भी देश ने बड़ी छलांग लगाई है. अब टीबी के ट्रीटमेंट की कवरेज बढ़कर 92% तक पहुंच गई है. साल 2024 में ही 26.18 लाख मरीजों ने इलाज शुरू कर इस बीमारी को चुनौती दी है. ये सभी आंकड़े भारत सरकार की PIB प्रेस रिलीज (12 नवंबर 2025) से लिए गए हैं.
साभार आज तक

