इन्दौर की आस्था का केंद्र: बिजासन टेकरी विकास और विवाद के दोराहे पर

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विशेष रिपोर्ट  राजेश धाकड़ 
इन्दौर। शहर की आस्था का प्रमुख केंद्र मानी जाने वाली बिजासन टेकरी इन दिनों विकास और विवाद के बीच खड़ी नजर आ रही है। एक ओर यहाँ ‘बिजासन लोक’ के भव्य निर्माण का सपना दिखाया जा रहा है, तो दूसरी ओर मंदिर परिसर की जमीन सिमटने को लेकर गहराता असंतोष भक्तों और प्रबंधन की चिंता बढ़ा रहा है। सवाल यह है कि क्या विकास की रफ्तार आस्था की जमीन पर भारी पड़ रही है?
चारों ओर से घिरता दरबार
बिजासन माता का यह पावन स्थल अब चारों दिशाओं से सरकारी परियोजनाओं से घिर चुका है।
एयरपोर्ट विस्तार योजना
मेट्रो डिपो का निर्माण
Border Security Force (बीएसएफ) की सीमाएं
वन विभाग की अधिसूचित भूमि
इन सबने मिलकर मंदिर परिसर को लगभग ‘घेरा’ सा डाल दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले जहाँ खुला परिसर और प्राकृतिक वातावरण था, अब वहाँ सीमांकन की दीवारें और निर्माण कार्यों के बोर्ड नजर आते हैं।
पार्किंग संकट: आस्था बनाम अव्यवस्था
नवरात्रि के दौरान यहाँ प्रतिदिन 2 से 3 लाख श्रद्धालुओं के आने का दावा किया जाता है। ऐसे में सबसे बड़ी समस्या पार्किंग की बनकर उभरी है।
पहले जहाँ वाहनों के लिए पर्याप्त खुला स्थान उपलब्ध था, अब वह सिकुड़ गया है। श्रद्धालुओं को दूर-दूर तक गाड़ियाँ खड़ी करनी पड़ रही हैं और टेकरी तक पैदल लंबा सफर तय करना पड़ता है। बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांगजनों के लिए यह स्थिति और भी कठिन हो जाती है।
मेले का अस्तित्व खतरे में?
बिजासन टेकरी का वार्षिक मेला कभी इन्दौर की सांस्कृतिक पहचान माना जाता था। लेकिन अब जिस परिसर में विशाल आयोजन होते थे, वहाँ विकास परियोजनाओं के बोर्ड और सीमांकन के खंभे दिखाई दे रहे हैं।सूत्रों के अनुसार एयरपोर्ट विस्तार के लिए करीब 25.16 एकड़ भूमि आवंटित की गई है, जबकि मंदिर प्रशासन के पास लगभग 10.67 एकड़ भूमि ही शेष रह गई है। यदि यह स्थिति बनी रही, तो भविष्य में बड़े धार्मिक आयोजनों का स्वरूप प्रभावित हो सकता है।
‘बिजासन लोक’ का सपना
प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की ओर से ‘बिजासन लोक’ के विकास की बात कही जा रही है, जिसमें भव्य प्रवेश द्वार, सुव्यवस्थित मार्ग, प्रकाश व्यवस्था, श्रद्धालु सुविधाएं और पर्यटन को बढ़ावा देने की योजना शामिल है।,लेकिन स्थानीय श्रद्धालुओं का सवाल है,जब जमीन ही सीमित हो जाएगी तो भव्यता कहाँ से आएगी?”आस्था और विकास के बीच संतुलन की जरूरत,इन्दौर तेजी से विकसित होता शहर है। मेट्रो, एयरपोर्ट और सुरक्षा ढांचे का विस्तार समय की मांग है। लेकिन साथ ही, शहर की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखना भी उतना ही जरूरी है।
बिजासन टेकरी सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि लाखों लोगों की आस्था का केंद्र है। विकास योजनाओं में यदि श्रद्धालुओं की सुविधाओं और धार्मिक परंपराओं को प्राथमिकता नहीं दी गई, तो यह असंतोष भविष्य में बड़ा रूप ले सकता है।
प्रशासन और प्रबंधन से अपेक्षाएं
समुचित पार्किंग व्यवस्था का वैकल्पिक समाधान
धार्मिक आयोजनों के लिए पर्याप्त खुला परिसर सुनिश्चित करना
मंदिर प्रशासन और सरकारी एजेंसियों के बीच समन्वय
श्रद्धालुओं की सुविधा को प्राथमिकता
निष्कर्ष
बिजासन टेकरी आज एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ी है। जरूरत है संवेदनशील योजना और संवाद की, ताकि विकास भी हो और आस्था भी सुरक्षित रहे।
क्योंकि शहर की पहचान सिर्फ इमारतों से नहीं, उसकी आस्था और परंपराओं से भी बनती है।

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