सिंचाई विभाग की लापरवाही का ‘जल प्रहार’

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किसान डूबे, अफसर बचे – आखिर जिम्मेदार कौन? 
सूर्या परमार शुजालपुर 
अख्तियारपुर – नरोला तालाब से पानी छोड़ने की जल्दबाज़ी ने किसानों पर ऐसा कहर ढाया कि पूरे खेत तालाब बन गए। कनाल की सफाई तो महीनों से नहीं हुई, ऊपर से बारिश के कट भी नहीं भरे गए… नतीजा?
किसानों के खेतों में इतना पानी भर गया कि मानो कोई जाकर उसमें नहा आए!

फसलें खड़ी थीं, उम्मीदें खड़ी थीं, लेकिन सिंचाई विभाग की ‘कागज़ी सफाई’ ने सब डुबो दिया।
अख्तियारपुर 217 की लाइन पूरी तरह जाम पड़ी रही, पानी निकलने का नाम नहीं, और खेत देखते ही देखते मक्का नहीं – मिनी झील बन गए।

अब बड़ा सवाल यह है—
 किसानों की फसल डुबोने का असली गुनहगार कौन?
 तालाब से पानी छोड़ने से पहले कनाल की हालत क्यों नहीं देखी गई?
क्या विभाग की नींद किसानों की तबाही के बाद ही खुलेगी?

किसान रो रहे हैं, फसलें सड़ रही हैं, पर विभाग के अफसर ‘जांच करेंगे’ का रटा-रटाया मंत्र पढ़ रहे हैं।

_यह प्राकृतिक आपदा नहीं…
यह विभागीय लापरवाही की खुली बयानी है।
_किसानों की फसल बही नहीं — _विभाग का सच बह गया है!

इनका कहना 
अनुराधा कुशवाह 
सब इंजिनियर 
 किसानों ने जगह कब्जा में कर रखी JBC निकलने नहीं देते

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