कुंभ मेला या कमीशन मेला?

  • Share on :

आस्था के नाम पर विकास या जनता के पैसों की लूट?
नासिक, महाराष्ट्र। वर्ष 2027 में नासिक में आयोजित होने वाला कुंभ मेला महाराष्ट्र के लिए गौरव और पूरे देश के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन है। कुंभ की तैयारियों के बीच विकास कार्यों, टेंडर प्रक्रिया, स्वास्थ्य सुविधाओं और पर्यावरण संरक्षण को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं।

पूर्व पंचायत समिति उपसभापति महेश खारोडे ने सवाल उठाते हुए कहा है— “कुंभ मेला आस्था का महापर्व बने, कमीशन का मेला नहीं।”

उनका कहना है कि कुंभ मेले के नाम पर खर्च होने वाले सार्वजनिक धन के प्रत्येक रुपये का हिसाब जनता के सामने होना चाहिए। विकास कार्यों और टेंडरों में पूरी पारदर्शिता तथा गुणवत्ता सुनिश्चित होनी चाहिए। साथ ही धार्मिक आयोजन की व्यवस्थाओं के कारण स्थानीय नागरिकों की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित नहीं होनी चाहिए और विकास के नाम पर पर्यावरण को अनावश्यक नुकसान नहीं पहुंचाया जाना चाहिए।

खारोडे ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि कुंभ से जुड़े बड़े खर्च, टेंडर, वृक्ष कटाई और स्वास्थ्य सुविधाओं से संबंधित फैसलों की पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाए।

सवाल सीधा है—

“विकास जरूर हो, लेकिन जनता के पैसों की जवाबदेही के साथ; कुंभ भव्य हो, लेकिन श्रद्धा के नाम पर कमीशन का खेल नहीं।”

— महेश खारोडे
सातेगांव
पूर्व उपसभापति, पंचायत समिति, अंजनगांव सुर्जी

Latest News

Everyday news at your fingertips Try Ranjeet Times E-Paper