'भाषा सीखना कभी व्यर्थ नहीं जाता'; 9वीं में दो भारतीय भाषाएं अनिवार्य करने के फैसले पर रोक लगाने से SC का मना

  • Share on :

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को यह सवाल उठाया कि क्या अंग्रेजी को एक भारतीय भाषा माना जा सकता है। सीबीएसई की तीन भाषा नीति के खिलाफ याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया था कि इस नीति के तहत अंग्रेजी को गैर-मूल भाषा माना गया है । यह प्रश्न उठाते हुए कोर्ट ने मौजूदा एकेडमिक सेशन से क्लास 6 के लिए CBSE की तीन भाषा वाली स्कीम को अनिवार्य करने के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि किसी भाषा को सीखना कभी व्यर्थ नहीं जाता। यह टिप्पणी करते हुए शीर्ष कोर्ट ने सीबीएसई द्वारा शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू की गई तीन-भाषा नीति पर रोक लगाने से मना कर दिया। इस नीति के तहत कक्षा नौ के छात्रों के लिए तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य किया गया है, जिनमें से कम से कम दो भारत की मूल भाषा होनी चाहिए।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और वी. मोहना की पीठ ने मामले की सुनवाई अगले सप्ताह के लिए टाल दी। इससे पहले, याचिकाकर्ता अमनदीप कौर एवं अन्य की ओर से दाखिल याचिकाओं में कहा गया कि सीबीएसई की नई नीति के अनुसार, छात्रों को कक्षा 9 से दो भारतीय भाषाएं अनिवार्य रूप से पढ़नी होंगी। इसका मतलब यह होगा कि उन्हें वे भाषाएं छोड़नी होंगी जो वे कक्षा पांच से लगातार पढ़ रहे हैं।
याचिकाकर्ताओं ने मूल भाषाओं के लिए शिक्षकों और पाठ्यपुस्तकों की उपलब्धता को लेकर चिंता जताई। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दाखिल एक नई याचिका पर नोटिस जारी किया और मामले की सुनवाई के लिए आगामी बुधवार की तारीख तय की गई है।
हालांकि कोर्ट बिना विस्तार से सुनवाई किए इस योजना पर रोक लगाने की याचिका को मंज़ूरी देने के लिए तैयार नहीं था। बेंच ने कहा, "यह नोटिफिकेशन हिंदी और दूसरी क्षेत्रीय भाषाओं को सीखने के संवैधानिक लक्ष्य को आगे बढ़ा रहा है। स्थानीय भाषाओं के नाम और स्थानीय भाषा किसे माना जाए, इस पर फिर से विचार करने की ज़रूरत हो सकती है।" बेंच ने मामले की सुनवाई के लिए 22 जुलाई की तारीख तय की।
नए याचिकाकर्ताओं की ओर से वकील ने दलील दी कि भले ही बच्चों को 22 भाषाओं में से चुनने का विकल्प दिया गया था, लेकिन स्कूलों के लिए इतने सारे टीचर रखना और इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना नामुमकिन था। उन्होंने कहा कि 1 जुलाई तक सभी भाषाओं की किताबें अपलोड करने के वादे के बावजूद, NCERT की वेबसाइट पर सिर्फ तीन भाषाओं की ही किताबें उपलब्ध थीं। एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि सरकार और CBSE 10 दिनों में अपना जवाब दाखिल करेंगे।
साभार लाइव हिन्दुस्तान

Latest News

Everyday news at your fingertips Try Ranjeet Times E-Paper