सहजयोग द्वारा जानें ब्रम्ह नाड़ी के रहस्य को
पू. श्रीमाताजी श्री निर्मलादेवीने ५ मई १९७० कुंडलीनी जागरण द्वारा आत्मा को जागृति देने की एक अभिनव पद्धति खोज निकाली। इस पद्धति का उल्लेख अनेक धर्म- ग्रंथो मे एवं उपनिषदों में भी मिलता है।
देहमध्ये ब्रम्हनाडी सुषुम्णा सूर्यरूपिणी पूर्णचन्द्राभ वर्तते।
सा तु मूलाधारादारभ्य ब्रम्हरंधगामिनी भवति ।
तन्मध्ये तटकोटिसमानकान्त्या मृणालसूत्रवत् सूक्ष्मागी कुण्डलिनीति प्रसिद्धा अस्ति । तां दृष्टा मनसव नरः सर्वपापविनाश द्वारा मुक्तो भवति।
'अद्वय- तारकोपनिषद् '
उपरोक्त वर्णित श्लोक देह में ब्रम्हनाडी सुषुम्ना परम प्रकाश है। वह मूलाधार से ब्रम्हरंध्र तक जाती है। उसके साथ सूक्ष्म तन्तु में जुड़ी माँ स्वरुपिनी कुंडलिनी शक्ति है। उसका भावनात्मक दर्शन करने से मनुष्य सब पापों और बंधनों से छुटकारा प्राप्त कर लेता है। कुंडलीनी में सुषुम्ना, ब्रम्ह नाड़ी का, अत्यन्त महत्वपूर्ण स्थान हैं ।
परम पूज्य श्री माता जी निर्मला देवी द्वारा सहजयोग भी सुषुम्ना नाड़ी की ओर हमें प्रकाशवान बनाने की बात करता है। अब हमारे सामने प्रश्न है कि, हम कैसे प्रकाशवान बनेंगे? श्रीमाताजी कहते हैं, हमें अपने हृदय की संकीर्णता को त्याग कर महान बनना चाहिये। मैंने "आपको अनेकों बार बताया है कि परमात्मा ने केवल एक ही सृष्टी की रचना की थी। निसंदेह, परमात्मा ने केवल सौंदर्य की रचना हेतु मानवों में भिन्नता बनाई, लेकिन हम लोग कितने अंधे हैं, जो यह सोचते हैं कि हम अलग - अलग तरह के इंसान हैं, हम अलग-अलग देशो से है ,अलग-अलग नस्लों से हैं, अलग जातियों से हैं, अलग समुदाय से हैं,अलग शहरों से है और उसके बाद छोटी-छोटी गलियों के अलग-अलग घरों से हैं। हमें अपना हृदय खोल कर प्रकाश जैसा बनना होगा। छोटा नहीं बनना है। हम कुछ महान बनने के लिए विशेष रूप से चुने गए लोग हैं। अहंकार सबसे बड़ी समस्या है। यह अंहकार ह्रदय को ढक लेता है और आपको मिथ्या पहचान "मै एक भारतीय हूँ या अमेरिकन हूं, मैं हिंदू हूँ या मैं सिख हूँ, मैं ऐसा हूँ मै वैसा हूँ , में मग्न रखता है।
उपरोक्त वर्णित श्रीमाताजी की अमृतवचनो से स्पष्ट है कि हमें प्रकाशवान बनने में हमारा अहंकार ही बाधा है। सहजयोग में जब हमें अपना आत्म साक्षात्कार प्राप्त होता है, तो हमें यह पता लग जाता है कि हम में अहंकार आ गया था या प्रति अहंकार, और हम इससे कैसे छुटकारा पाएं। सही मायने में हमारा अहंकार या प्रति- अहंकार से छुटकारा पाना ही सभी पापों से मुक्त होना है।
सहज योग पूर्णतया निशुल्क है अपने आत्म साक्षात्कार को प्राप्त करने हेतु अपने नज़दीकी सहजयोग ध्यान केंद्र की जानकारी टोल फ्री नंबर 1800 2700 800 अथवा यूट्यूब चैनल लर्निंग सहजयोगा से प्राप्त कर सकते है।

