जगन सरकार के दौरान 'शराब सिंडिकेट' का पर्दाफाश: ईडी ने अटैच की ₹441 करोड़ की चल-अचल संपत्तियां
हैदराबाद. आंध्र प्रदेश के शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय ने बड़ी कार्रवाई की है. जांच एजेंसी ने 441 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्तियां अटैच की हैं. जांच में आरोप है कि पिछली सरकार के दौरान शराब खरीद और सप्लाई सिस्टम में हेरफेर कर हजारों करोड़ रुपए की रिश्वत ली गई.
प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार अटैच की गई संपत्तियों में बैंक बैलेंस, फिक्स्ड डिपॉजिट, जमीन और अन्य अचल संपत्तियां शामिल हैं. ये संपत्तियां मुख्य आरोपी केसिरेड्डी राजशेखर रेड्डी, उनके परिवार के सदस्यों और उनसे जुड़ी कंपनियों की हैं. इसके अलावा दूसरे आरोपियों की संपत्तियां भी शामिल हैं.
इनमें बूनेटी चाणक्य, उनसे जुड़ी कंपनियों, डोनथिरेड्डी वासुदेव रेड्डी, उनके रिश्तेदारों और उनसे संबद्ध संस्थाओं की संपत्तियां भी जब्त की गई हैं. यह कथित घोटाला उस समय का है जब राज्य में वाई एस जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली सरकार सत्ता में थी. उस समय शराब दुकानों पर नियंत्रण करके लूट की गई थी.
जांच एजेंसी का आरोप है कि साल 2019 के विधानसभा चुनावों के बाद राज्य सरकार ने आंध्र प्रदेश स्टेट बेवरेजेज कारपोरेशन लिमिटेड (APSBCL) के जरिए रिटेल शराब दुकानों पर नियंत्रण स्थापित कर लिया था. इसके बाद एक आपराधिक साजिश के तहत ऑटोमेटेड सिस्टम को जानबूझकर बंद कर दिया गया.
उसकी जगह मैनुअल सिस्टम लागू किया गया. इस बदलाव के बाद APSBCL के अधिकारियों को सप्लाई ऑर्डर जारी करने की पूरी छूट मिल गई. ईडी के अनुसार इस मैनुअल सिस्टम का इस्तेमाल शराब के कई जाने-माने ब्रांड के साथ भेदभाव करने के लिए किया गया. कुछ ब्रांड को जानबूझकर बाजार से हटा दिया गया.
इस मामले में वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने लगातार इन आरोपों को बेबुनियाद बताया है. पार्टी का कहना है कि उसके खिलाफ लगाए गए आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है. जांच एजेंसी ने आंध्र प्रदेश पुलिस की SIT की शिकायत के आधार पर इस मामले में सितंबर 2025 में मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया था.
साभार आज तक

