महाकाल मिनरल का अवैध रेत साम्राज्य,प्रशासन भी मौन, क्या है शासन की चुप्पी का राज

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प्रदीप सिंह बघेल 
उमरिया। उमरिया। संभागीय मुख्यालय के अंतर्गत उमरिया जिले में खनिज विभाग की नाक के नीचे रेता ठेका कंपनी महाकाल मिनरल्स रेत का काला कारोबार करने पर उतारू है। जिले के मानपुर क्षेत्र में इन दिनों रेत के अवैध उत्खनन और परिवहन को लेकर गंभीर मामल समाने आ रहा है। बालोड़, मानपुर क्षेत्र में रेत का अवैध कारोबार धड़ल्ले से संचालित हो रहा है, और जिम्मेदार विभाग के द्वारा किसी भी प्रकार से कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है।
लीज क्षेत्र से हटकर बेधड़क रेत की निकासी विशाल पोकलेन मशीन लगाकर निकाली जा रही है। माइनिंग कॉरपोरेशन ने ठेका कंपनी को खुली छूट दी हुई है। उमरिया जिले में जगह-जगह से रेत का अवैध उत्खनन किया जा रहा है, जिस जगह से उत्खनन किया जाता है न तो वहां कंपनी को कोई खदान स्वीकृत है और न ही खदानों पर कोई सीमांकन और न ही कोई सूचना बोर्ड लगा होता है। जब स्थानीय लोगों द्वारा इस अवैध उत्खनन का विरोध किया जाता है तो कंपनी के द्वारा वहां से अवैध खनन बंद कर दिया जाता है।
ग्रामीणों के अनुसार, दिन में भी बाबा महाकाल मिनरल्स कंपनी के द्वारा लगातार रेत का अवैध व्यापार किया जा रह रहा है, बालोड़ और पौड़ीकला के बीच बहने वाली सोन नदी के बीच धारा में पोकलेन मशीनों के माध्यम से दिनदहाड़े रेत निकाली जा रही है। इसी तरह से रेत का उत्खनन चलता रहा। नदी के प्राकृतिक स्वरूप और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है, जिससे नदी का अस्तित्व भी खतरे में पड़ सकता है।
ऐसा लगता है कि बाबा महाकाल मिनरल कंपनी के आगे शासन प्रशासन में अपने घुटने टेक दिए हैं, रेत से भरी गाड़ियां कई पोस्टों से गुजरती है, लेकिन मजाल है कि उन गाड़ियों को कई रोक लिया जाए। उमरिया से लेकर शहडोल तक बड़े पैमाने पर रेत का उत्खनन किया जा रहा है। आरोप है कि यहां से निकाली गई रेत की आपूर्ति रीवा सहित उत्तर प्रदेश और बिहार के विभिन्न क्षेत्रों तक की जा रही है।
क्षेत्रवासियों का यह भी कहना है कि संबंधित कंपनी को शासन से स्वीकृति प्राप्त होने की बात कही जा रही है, जिसके चलते अवैध गतिविधियों पर रोक नहीं लग पा रही है।

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