नंद घर आनंद भयो जय कन्हैया लाल की हाथी घोड़ा पालकी कृष्ण जनपद झुमका नाचे श्रद्धालु
ग्वालियर से ब्यूरो चीफ दिव्यानंद अर्गल
ग्वालियर अचलेश्वर महादेव मंदिर पर चल रही भागवत कथा के चौथे दिन अयोध्या से पधारे प्रसिद्ध भागवताचार्य वेदांत जी महाराज ने कहा कि मनुष्य जीवन भर भगवान का नाम नहीं लेता है और मृत्यु के समय भगवान को याद करता है क्योंकि मरते समय मनुष्य के मुंह में गंगाजल डालने से वह अंदर नहीं जाता है क्योंकि यह के दूत उसके गले को पकड़ लेते हैं उन्होंने ब्यास गद्दी से समझाते हुए कहा पूजा तप त्याग से भगवत प्राप्ति नहीं होती है जब तक किसी महापुरुष का सानिध्य प्राप्त न हो तथा घर छोड़ने से भगवत प्राप्ति हो यह संभव नहीं है महाराज श्री ने भक्त प्रहलाद की भक्ति का वर्णन किया की किस प्रकार रहने कश्यप ने अपने पुत्र को मारने का प्रयास किया लेकिन हर बार श्रीमन नारायण की भक्ति ने उसे बचाया कथा में मत्स्य अवतार वामन अवतार कथा भगवान राम के अवतारी कथा सुनाई प्रसिद्ध भागवत आचार्य ने भगवान श्री कृष्ण जन्मोत्सव का प्रसंग सुनाया तो श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमर पड़ी और पूरा पंडाल जयकारों से गूंज उठा उन्होंने देव की वासुदेव के संतानों की उत्पत्ति कंस का अत्याचार और श्री कृष्ण के प्राकट्य बताया कि भाद्र मास की अष्टमी को पहरेदार रात को सो गए तो देवकी के गर्भ से भगवान श्री कृष्ण का अवतरण हुआ तब जेल में अलौकिक प्रकाश फैल गया और बंदी ग्रह के द्वारा अपने आप खुल गए वासुदेव नन्हे श्याम सुंदर को यमुना पार गोकुल में छोड़ा है जन्मोत्सव की कथा सुनकर श्रोता विभोर हो गए और भजन कीर्तन के बीच झूमने लगे कथा के अंत में परीक्षित घनश्याम सेन एवं उनके परिवार तथा महेंद्र भदकारिया उनकी पत्नी कल्ली पंडित रवि चौबे आदि में भगवान कृष्ण की आरती की कथा भागवत महापुराण की आरती के पश्चात प्रसादी वितरण किया गया।

