"कोई भी सिस्टम परफेक्ट नहीं, पर कॉलेजियम ही बेस्ट": जजों की नियुक्ति पर बोले जस्टिस गवई
बेंगलुरु। देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बी आर गवई ने रविवार को कहा है कि जजों की नियुक्ति के लिए मौजूदा समय में कॉलेजियम प्रणाली ही भारत के लिए सबसे उपयुक्त है। पूर्व CJI 'सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन' के पहले राष्ट्रीय सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान 'न्यायिक शासन की पुनर्कल्पना' विषय पर बोलते हुए गवाई ने कई अहम मुद्दों पर बात की।
पूर्व CJI ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा, ''कॉलेजियम के कामकाज के संबंध में एक मुद्दा उठाया गया था। मैं यह नहीं कहूंगा कि कॉलेजियम प्रणाली एक त्रुटिहीन प्रणाली है। कोई भी प्रणाली परिपूर्ण नहीं हो सकती। हर प्रणाली के अपने फायदे और नुकसान होते हैं। लेकिन इतने वर्षों तक काम करने के बाद, मुझे लगता है कि कम से कम फिलहाल के लिए, कॉलेजियम प्रणाली हमारे देश के लिए सबसे उपयुक्त है।''
जस्टिस गवई ने आगे कहा कि कॉलेजियम मनमाने ढंग से काम नहीं करता है। उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और दो वरिष्ठतम न्यायाधीशों की कॉलेजियम द्वारा न्यायाधीशों के नामों की सिफारिश की जाती है, और उसके बाद यह केंद्र सरकार को भेजा जाता है। उन्होंने कहा, ''केंद्र सरकार, खुफिया विभाग और सभी पक्षों से सुझाव एकत्र किए जाते हैं, और उसके बाद उच्चतम न्यायालय की कॉलेजियम अंतिम निर्णय लेती है। नामों को भेजे जाने के बाद भी अगर सरकार या कार्यपालिका को कोई आपत्ति होती है, तो उन आपत्तियों को कॉलेजियम के समक्ष रखा जाता है। कॉलेजियम आपत्तियों पर विचार करता है और उसके बाद अंतिम फैसला किया जाता है।''
साभार लाइव हिन्दुस्तान

