राजस्थान के सांचौर से पकड़े गये मौलवी के मोबाइल से मिली कट्टरपंथ से जुड़ी 3 लाख से ज्यादा फोटो

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गिरफ़्तारी से दो दिन पहले दुबई भागने वाला था ओसामा
ओमप्रकाश बांगड़वा, सांचौर।
राजस्थान एटीएस के हत्थे चढ़ा सांचौर का मौलवी ओसामा उमर आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के लिए स्लीपर सेल तैयार कर चुका था। उसने कई युवाओं को जिहाद की ट्रेनिंग के लिए तैयार कर लिया था। उनमें से 4 को एटीएस ने डीरेडिकलाइज (कट्टरपंथी सोच से बाहर निकालने की प्रक्रिया) के लिए भेज दिया है।
पकड़े जाने से पहले अपने मोबाइल का सारा डेटा डिलीट कर चुका था, जिसे एफएसएल ने रिकवर कर लिया है। उसके मोबाइल से करीब 3 लाख से अधिक फोटो रिकवर हुए हैं, जो धार्मिक कट्टरता को बढ़ावा देने वाली हैं।
लश्कर ए तैयबा के आतंकी सैफुल्लाह से ओसामा उमर बेहद प्रभावित था। उसी के वीडियो देखता था। सैफुल्लाह के कुछ रिश्तेदार ओसामा के टच में थे। लोगों का ब्रेनवॉश करने के लिए ओसामा वॉयस मैसेज के जरिए उनकी बात भी करवाता था। एटीएस के आईजी विकास कुमार के अनुसार, कुछ दिन बाद ओसामा अफगानिस्तान स्थित आतंकी कैंप में ट्रेनिंग लेने के लिए जाने वाला था। उससे पहले ही वो पकड़ा गया।
14 नवंबर को एटीएस ने पकड़ा था-
आईजी एटीएस विकास कुमार ने बताया कि ओसामा को 4 नवंबर को उसे सांचौर से डिटेन किया था। प्रमाणित होने के बाद 6 नवंबर को गिरफ्तार किया था। तब पूछताछ में सामने आया कि कि वो पकड़े जाने के दो दिन बाद यानी 8 नवंबर को ही दुबई भागने की तैयारी कर रहा था। वहां से उसे अफगानिस्तान जाना था। इसके बाद टीटीपी के बेस कैंप में जिहाद की ट्रेनिंग लेनी थी।
यह भी पता चला कि वहां से ट्रेनिंग के बाद भारत लौटकर अपनी स्लीपर सेल को एक्टिवेट करने का भी प्लान बना रखा था।
मोबाइल से 4 साल का डेटा रिकवर
ओसामा के मोबाइल की एफएसएल रिपोर्ट सामने आ गई है। 4 साल से वो आतंकी संगठन के टच में था। ऐसे में मोबाइल से करीब 4 साल का डेटा रिकवर किया गया है। उसमें कट्टरपंथ से जुड़ी 3 लाख से अधिक फोटो रिकवर की गई हैं। अधिकांश फोटो पर उर्दू-अरबी या फारसी में कुछ मैसेज लिखे हुए हैं। इनकी लैंग्वेज एक्सपर्ट को बुलाकर जांच की जाएगी।
इसके अलावा ओसामा के कब्जे से अफगानिस्तान की एक सिम भी मिली है। हालांकि इस बात का खुलासा नहीं हो पाया है कि ओसामा तक यह सिम कैसे पहुंची। एजेंसियां उस सिम की भी जांच कर रही हैं।
परनाना रह चुके विधायक, परिवार को भी थी जानकारी-
ओसामा के परनाना वली मोहम्मद बाड़मेर से विधायक (दूसरी विधानसभा- 1957 से 1962) रह चुके हैं, जबकि नाना जमीयत उलेमा-ए-हिंद राजस्थान के नायब रहे। ओसामा गलत राह पर था, इसकी पूरी जानकारी परिवार को थी।
पूछताछ से पता चला कि परिवार ने ओसामा को कई बार समझाने का भी प्रयास किया, लेकिन वह नहीं माना। परिवार का कोई सदस्य ओसामा की विचारधारा से प्रभावित हुआ या नहीं, इसकी जानकारी अभी तक सामने नहीं आई है।
आईजी एटीएस विकास कुमार ने बताया कि आरोपी के माता और पिता दोनों ही पक्ष का धार्मिक इतिहास रहा है। अधिकतर लोग धार्मिक शिक्षा और मस्जिदों से जुड़े हैं। कोई इमाम है तो कोई मदरसे में शिक्षक। ओसामा के पिता मदरसे में पढ़ाते हैं।
एक चाचा मस्जिद में अजान देते हैं। ओसामा ने करौली में अलीमा की पढ़ाई (धार्मिक शिक्षक बनने की स्टडी) की और फिर सहारनपुर स्थित दारुल उलूम देवबंद से उच्च शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद उसने महाराष्ट्र से अरबी भाषा का कोर्स किया और राजस्थान के कई शहरों अजमेर, करौली, जोधपुर, फलौदी, झुंझुनूं और सांचौर की मस्जिदों में इमाम के रूप में भी काम किया।
4 लोगों को कट्टर बनाने के लिए कर रहा था ब्रेनवॉश-
एटीएस ने हाल ही में ओसामा के संपर्क में आए चार संदिग्धों को भी डिटेन किया था। ओसामा इन सभी पर कट्टरपंथी विचारधारा से जुड़ने का दबाव बना रहा था। एटीएस के अधिकारियों का कहना है कि चारों का अभी तक किसी भी गतिविधि में सम्मिलित होना नहीं पाया गया है। हालांकि ये 6 महीने से ओसामा के संपर्क में थे।

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