भ्रामक विज्ञापन बना रहे हैं जनता को शिकार, सेलिब्रिटी प्रचार से बढ़ रहा भ्रम

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रणजीत टाइम्स विशेष रिपोर्ट


24 जून 2025 | मंगलवार
इंदौर। आज के दौर में टी.वी., सोशल मीडिया और यूट्यूब जैसे माध्यमों पर ऐसे विज्ञापनों की भरमार है जो लोगों को भ्रमित कर रहे हैं। बड़ी-बड़ी कंपनियां और उनसे जुड़ी फिल्मी हस्तियाँ ऐसे उत्पादों का प्रचार कर रही हैं, जिनकी वैज्ञानिक प्रमाणिकता संदिग्ध है।
प्रमुख भ्रामक विज्ञापन जो जनता को गुमराह कर रहे हैं:
1. गोरापन क्रीम:
Fair & Lovely जैसे ब्रांड 7 दिन में चेहरा गोरा करने का दावा करते हैं। लेकिन त्वचा विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल रंगभेद को बढ़ावा देता है और आत्मविश्वास में कमी लाता है।
2. कोल्ड ड्रिंक्स:
Coca-Cola, Pepsi जैसे पेय पदार्थों को एनर्जी से जोड़कर पेश किया जाता है, जबकि इनमें शुगर की मात्रा अत्यधिक होती है और यह मोटापा, डायबिटीज जैसी बीमारियों का कारण बन सकती है।
3. मेमोरी बूस्टर:
Complan, Horlicks, Bournvita जैसे ब्रांड बच्चों को दो गुना तेज़ बनाने का दावा करते हैं। जबकि किसी हेल्थ ड्रिंक से IQ या परीक्षा में नंबर नहीं बढ़ते — यह पूरी तरह से भ्रामक है।
4. मर्दाना शक्ति दवाइयां:
टीवी और लोकल चैनलों पर ऐसे तेल और कैप्सूल बेचे जाते हैं जो 7 दिन में चमत्कारी ताकत लौटाने का दावा करते हैं। लेकिन इनमें अक्सर सर्टिफिकेशन नहीं होता और साइड इफेक्ट्स गंभीर हो सकते हैं।
5. लकी ड्रा वाले फ्रॉड:
“आपकी कार निकली है” या “5 लाख इनाम जीता है” जैसे मैसेज अक्सर लोगों को ठगने के लिए भेजे जाते हैं।
6. साबुन और शैम्पू:
“1 वॉश में डेंड्रफ गायब” या “सिल्की बाल” जैसे दावे विज्ञापन में तो अच्छे लगते हैं, लेकिन वास्तविकता में असर दिखने में लंबा समय लगता है।
7. आयुर्वेदिक पेट दवाएं:
बिना साइड इफेक्ट का दावा करने वाले कई प्रोडक्ट्स में खतरनाक स्टेरॉयड पाए गए हैं, जो शरीर को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
जनता के लिए चेतावनी:
सेलिब्रिटी प्रचार सिर्फ एक ब्रांडिंग रणनीति है। वह प्रोडक्ट वे खुद शायद ही इस्तेमाल करते हैं।
खरीदारी से पहले उत्पाद के रिव्यू पढ़ना, चिकित्सकीय सलाह लेना और विज्ञापन की भाषा को समझना ज़रूरी है।
सरकार और समाज की भूमिका:
ASCI, FSSAI जैसी संस्थाएं ऐसे भ्रामक विज्ञापनों पर कार्यवाही करती हैं, लेकिन जागरूकता ज़्यादा ज़रूरी है।
स्कूलों, कॉलेजों और अखबारों में विज्ञापन साक्षरता अभियान चलाने की आवश्यकता है ताकि अगली पीढ़ी समझदार उपभोक्ता बन सके।

✍️ रिपोर्ट:
गोपाल गावंडे
प्रधान संपादक, रणजीत टाइम्स
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