खुद को बताया CIA अधिकारी, फाइटर जेट का झांसा देकर इंडोनेशिया सरकार से ऐंठे 425 करोड़; भारतवंशी गौरव श्रीवास्तव का पर्दाफाश

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वॉशिंगटन। अक्सर हमने फिल्मों में देखा है कि कोई जासूस कैसे दूसरे देश में जाकर वहां की सरकार में घुसपैठ करता है और फायदा उठाता है। ऐसा ही कुछ हकीकत में हुआ है और एक भारतवंशी ने पूरे देश की सरकार को चकमा देकर अरबों रुपये का चूना लगा दिया। दरअसल भारतीय मूल के एक कारोबारी ने कथित तौर पर खुद को अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए का एजेंट बताकर इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के करीब आया। आरोप है कि उसका उद्देश्य अरबों डॉलर के रक्षा सौदे हासिल करना था।
ऑर्गनाइज्ड क्राइम एंड करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट (OCCRP) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारतवंशी कारोबारी गौरव श्रीवास्तव ने खुद को सीआईए का अधिकारी बताकर कई प्रभावशाली लोगों का भरोसा जीता और फिर उन्हें अमेरिका के साथ अरबों डॉलर के रक्षा समझौते का झांसा दिया। गौरव ने इंडोनेशियाई सेना के लिए 36 लड़ाकू विमान, ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर और मिलिट्री कमांड सिस्टम दिलाने के नाम पर इंडोनेशिया की सरकार को अरबों रुपये का चूना लगाया। 
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि गौरव श्रीवास्तव ने इंडोनेशिया के पूर्व रक्षा मंत्री और वर्तमान राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो से नजदीकी संबंध बनाए। साल 2020 में वह कथित तौर पर वॉशिंगटन डीसी और जकार्ता में सुबियांतो के साथ कई उच्चस्तरीय बैठकों में शामिल हुआ, जहां लड़ाकू विमानों और अन्य रक्षा उपकरणों की खरीद पर चर्चा हुई थी। इसके बाद फर्जी शेल कंपनियों के जरिए गौरव ने इंडोनेशिया से 425 करोड़ रुपये का कर्ज भी मंजूर करा लिया। 
श्रीवास्तव ने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति के साथ मुलाकात में यह भी दावा किया था कि उसने वर्ष 2002 के बाली बम धमाकों के दोषियों की पहचान करने में मदद की थी। इन आतंकवादी हमलों में 200 से अधिक लोगों की मौत हुई थी। इसके अलावा उसने यह भी कथित तौर पर कहा कि प्रबोवो सुबियांतो का नाम अमेरिकी इमिग्रेशन ब्लैकलिस्ट से हटवाने में उसकी अहम भूमिका रही।
साभार अमर उजाला

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