ढुलाई परीक्षा का नवाचार ‘प्रैक्टिकल’: बच्चों से उठवाई प्रश्नपत्रों की पेटी

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शैक्षणिक दक्षता की परीक्षा के बीच नन्हे विद्यार्थियों से करवा लिया ‘शारीरिक परिश्रम’ का अभ्यास, अब शिक्षा विभाग परखेगा शिक्षक की कार्यशैली
जिला ब्यूरो नवल किशोर 
कटनी। इन दिनों विद्यार्थी अपनी शैक्षणिक दक्षता साबित करने के लिए परीक्षा कक्षों में पसीना बहा रहे हैं, लेकिन बहोरीबंद क्षेत्र में एक शिक्षक ने परीक्षा की परिभाषा ही बदल दी। यहाँ 10 से 12 वर्ष के बच्चों से प्रश्नपत्रों से भरी भारी लोहे की पेटी कंधों पर ढुलवाकर उनकी ‘शारीरिक दक्षता’ का भी अनौपचारिक इम्तिहान ले लिया गया।
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आते ही चर्चा का विषय बन गया है और शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े होने लगे हैं।

वायरल वीडियो में नन्हे विद्यार्थी करीब 20 से 25 किलोग्राम वजनी लोहे की पेटी कंधों पर उठाए स्कूल की ओर जाते दिखाई दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि यह पेटी बाकल थाना से लाई जा रही थी, जहाँ परीक्षा प्रश्नपत्र सुरक्षित रखे जाते हैं।
विडंबना यह रही कि बच्चे कठिन ग्रामीण रास्ते से करीब 2 से 3 किलोमीटर तक यह बोझ ढोते रहे, जबकि शिक्षक सत्येंद्र पटेल मोटरसाइकिल पर सवार होकर मानो इस ‘विशेष प्रैक्टिकल परीक्षा’ की निगरानी करते दिखाई दिए।
वीडियो सामने आने के बाद अभिभावकों में आक्रोश फैल गया। एक अभिभावक ने सवाल उठाया कि परीक्षा जैसे संवेदनशील कार्य में बच्चों को कुली बनाना किस नियम का हिस्सा है। कई अभिभावकों ने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग में शिकायत दर्ज कराई है।

शिक्षा विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के निर्देश दिए हैं। अडीपीसी धनश्री जैन ने कहा है कि वायरल वीडियो के आधार पर पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराई जाएगी और दोषी शिक्षक या स्टाफ के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
प्रदेश में परीक्षा सामग्री के परिवहन को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं, जिनमें मजिस्ट्रेट या पुलिस की मौजूदगी अनिवार्य बताई गई है। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि जब बच्चे अपनी पढ़ाई की परीक्षा देने निकले थे, तो उनसे यह ‘ढुलाई परीक्षा’ किस पाठ्यक्रम के तहत करवाई गई — और अब शिक्षा विभाग शायद इसी ‘नवाचार’ की असली परीक्षा लेने की तैयारी में है।

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