BRTS को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका, कोर्ट ने सुनवाई के बाद अन्य ट्रैफिक याचिकाओं से टैग किया

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सह संपादक दीपक वाड़ेकर
इंदौर। इंदौर शहर में BRTS (Bus Rapid Transit System) की असफलता और उससे उत्पन्न ट्रैफिक समस्याओं को लेकर दाखिल एक महत्वपूर्ण जनहित याचिका पर मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति श्री विवेक रूसिया तथा न्यायमूर्ति बी  के द्विवेदी की खंडपीठ में सुनवाई हुई। याचिका में मांग की गई थी कि जब शासन स्वयं BRTS को हटाने का निर्णय ले चुका है, iBus संचालन ठप है, और तीन बार टेंडर बुलाने के बावजूद कोई ठेकेदार सामने नहीं आया, तो तब तक BRTS कॉरिडोर को आम जनता के लिए खोला जाए।
याचिकाकर्ता  मोनिका  सोलंकी की ओर से अधिवक्ता श्री जी.पी. सिंह एवं अधिवक्ता हेरंब वशिष्ठ ने पक्ष रखते हुए कहा कि शासन द्वारा हाईकोर्ट के पूर्व आदेश के बाद BRTS की रेलिंग तोड़ने का कार्य रातों-रात शुरू किया गया था, जिसे बिना किसी स्पष्ट कारण के रोक दिया गया और फिर से टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई। तीन बार निविदा आमंत्रण के बावजूद कोई ठेकेदार सामने नहीं आया, जिससे कार्य अधर में लटक गया है और आम नागरिकों को चालान, जाम और असमान प्रवर्तन का सामना करना पड़ रहा है।
याचिका में यह भी तर्क दिया गया कि जब शासन स्वयं मान चुका है कि BRTS का ढांचा अप्रासंगिक हो चुका है, तो न्यायालय को निर्देश देना चाहिए कि जब तक बीआरटीएस पूरी तरह ध्वस्त नहीं हो जाता तब तक बीआरटीएस लेन को आमजन के लिए “मिश्रित यातायात लेन (Mixed Traffic Lane)” घोषित किया जाए तथा किसी भी प्रकार की चालानी कार्यवाही ना की जावे ।
हाईकोर्ट ने संज्ञान लेते हुए इस याचिका को इंदौर की ट्रैफिक व्यवस्था से जुड़ी अन्य लंबित जनहित याचिकाओं के साथ टैग कर लिया है। अब इस मुद्दे पर विस्तृत सुनवाई अन्य ट्रैफिक सुधार से संबंधित याचिकाओं के साथ संयुक्त रूप से होगी।

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