चिकित्सा विज्ञान का अनुषंगी बन सकता है सहज ध्यान योग

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चिकित्सा विज्ञान की अनुषंगी सहज ध्यान योग से हमारा तात्पर्य यह है कि यदि आधुनिक चिकित्सा के साथ ध्यान योग को पूरक चिकित्सा पद्धति के रूप में अपनाया जाय तो यह  तनाव कम करने, मानसिक स्वास्थ्य सुधारने, प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत करने और हृदय रोगों व पाचन समस्याओं जैसी स्थितियों में लाभकारी हो सकता है। सहज ध्यान योग से शारीरिक और मानसिक संतुलन स्थापित होता है, और यह निवारक, सहायक और पुनर्वास चिकित्सा का एक प्रभावी साधन सिद्ध होता है।   
    बीमारियाँ मन से गहराई से जुड़ी होती हैं, क्योंकि तनाव शारीरिक बीमारियों का कारण बनती है और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं। मानसिक स्थितियाँ (जैसे डिप्रेशन, चिंता) शरीर को कमजोर कर सकती हैं, जिससे दर्द, थकान और अन्य शारीरिक लक्षण दिखते हैं। यह एक दोतरफा रिश्ता है जहाँ मन और शरीर एक-दूसरे पर गहरा असर डालते हैं, जैसे थायरॉयड की समस्या डिप्रेशन का कारण बन सकती है, और तनाव हृदय रोगों को बढ़ा सकता है। 
सहज योग की तकनीक में आत्मसाक्षात्कार की प्रक्रिया से गुजरते ही सुषुम्ना नाड़ी में सोई हुई कुंडलिनी शक्ति जागृत होकर मध्य नाड़ी यानि सुषुम्ना से ऊपर उठती है और सिर के ऊपर सहस्रार चक्र का भेदन करती है, जिससे  साधक ब्रह्मांडीय ऊर्जा से जुड़ जाता है।  चक्रों के जागृति से उसके अंदर स्वयं को देखने वाली दृष्टि आ जाती है जिससे वह अपने शारीरिक व मानसिक दोषों को देखकर उसे दूर करने की योग्यता पा लेता है। वैसे मामूली बीमारियों के लिए सिर्फ ध्यान योग ही काफी हो सकता है, लेकिन गंभीर या उन्नत अवस्था के रोगों में यह एकमात्र उपचार के रूप में पर्याप्त नहीं होता और इसे अन्य एलोपैथिक उपचारों के साथ पूरक (supplementary) के रूप में उपयोग किया जा सकता है।  सहज ध्यान योग की तकनीक में साधक अपने चारों ओर फैले ईश्वरीय चैतन्य से एकाकारिता पा लेता है और दूसरे व्यक्ति की शारीरिक मानसिक समस्या तक अपने चैतन्य को प्रसारित कर उसकी सहायता करने में समर्थ हो जाता है।   यदि चिकित्सक और मरीज दोनों ही सहज योग प्रक्रिया से ध्यान करें तो रोग के सुधार में बेहतरीन रिजल्ट आयेंगे।   जिस प्रकार  डॉक्टर  मरीज को  स्टेथोस्कोप से चेक करते हैं वैसे सहज ध्यान से व्यक्ति के किस चक्र में समस्या है, ध्यानावस्था में उसका आभास हाथों की उंगलियों के पोर पर कर लेता है। 
 चिकित्सा विज्ञान (शरीर-केंद्रित) और आध्यात्मिक विज्ञान (मन-आत्मा-केंद्रित) है और  एक-दूसरे के पूरक हैं, जहाँ विज्ञान रोगों का इलाज करता है और आध्यात्मिकता मानसिक शांति व संपूर्ण स्वास्थ्य देती है, और दोनों मिलकर व्यक्ति के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक कल्याण के लिए एक समग्र दृष्टिकोण प्रदान कर सकते हैं। 
अत: इसकी सूक्ष्मता ‌को समझते हुये चिकित्सक व‌‌ सभी मानव‌ मात्र सहज योग से जुड़ें और मानव उत्थान में एक सकारात्मक कदम उठाये।  आत्मसाक्षात्कार  को प्राप्त करने हेतु अपने नज़दीकी सहजयोग ध्यान केंद्र की जानकारी टोल फ्री नंबर 1800 2700 800 से प्राप्त कर सकते हैं।  सहज योग सदैव नि:शुल्क है।

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